ज़हरीला हुआ गंगा का पानी, लाखों मछलियों मरी

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गंगा को साफ-सुथरा करने के दावे के बीच यह खबर आंख खोलने वाली है। फैक्ट्रियों का निकलने वाला गंदा पानी गंगा के पवित्र जल को जहरीला बना रहा है। कन्नौज में इसी जहरीले पानी ने लाखों की संख्या में मछलियों की जान ले ली।

यहां मेंहदीघाट पर नहाने पहुंचे श्रद्धालु हर तरफ मरी हुई मछलियों का ढेर देखकर दुखी हो गए। छोटी मछलियां ही नहीं बल्कि बड़ी और वजनी मछलियां भी घाट के किनारे लग गईं।

रविवार की सुबह जो भी मेंहदीघाट तट पर पहुंचा वहां का नजारा देखकर चौंक पड़ा। गंगा का पानी पूरी तरह काला पड़ चुका था, उसके बहाव में मरी हुई मछलियां बहकर आ रही थीं। यह नजारा देखकर श्रद्धालु परेशान हो गए। देखते ही देखते मरी हुई मछलियों का अम्बार लग गया।

इनमें से सैकड़ों की संख्या में बड़ी और वजनी मछलियां भी शामिल थीं। गंगा तट पर हर तरफ मरी हुई मछलियों के ढेर लग गए। मरी हुई मछलियों का निवाला देखकर चील-कौओं का भी हुजूम उमड़ पड़ा। यह नजारा देख मेंहदीघाट स्थित मंदिरों के पुजारियों में खासी नाराजगी है।

पड़ोसी जिला हरदोई और शाहजहांपुर स्थित फैक्ट्रियों के केमिकल युक्त जहरीले पानी ने गंगा का पानी दूषित किया। घाट किनारे स्थित मंदिरों के पुजारियों ने बताया कि हरदोई में कुंडा के करीब स्थित फैक्ट्रियों का पानी वहां की गर्रा नदी में गिरता है। गर्रा बाद में गंगा में मिल जाती है, उसी से गंगा का पानी जहरीला हुआ है।

डीएम कन्नौज रविंद्र कुमार सोमवार को खुद टीम लेकर मेंहदीघाट पहुंचे। उनके साथ कानपुर और कानपुर देहात की प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अलावा वन विभाग और पंचायत की टीमें भी पहुंची। इन टीमों ने गंगा में कई प्वाइंट पर सेंपल लिए। यहां मंदिरों मेंरहने वाले संतों ने बताया कि सोमवार को गंगा का पानी उतना काला नहीं दिखा जितना रविवार को था। किनारों पर अभी भी कई जगह मरी मछलियां इकट्ठा हैं।

DEMO PIC

कुछ को पचंयात की टीम ने साफ कर दिया तो कुछ पानी के साथ बह गयीं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीमें पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि अचानक किस कारखाने से जहरीला पैनी गंगा में पहुंचा जिससे लाखों मछलियां मर गयीं

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