पॉकेट मनी की जमा पूंजी से उच्च शिक्षा लेकर भविष्य संवारने की मुहिम, 80 लाख हैं जमा, 3950 खाताधारी

जानकारी प्रेरणादायक

मनीष कुमार ने गुल्लक बच्चा बैंक में अब तक 6593 रुपये जमा किये। इन पैसों का इस्तेमाल मनीष ने स्नातक में नामांकन के समय किया। मनीष कहते हैं कि 50 रुपये पॉकेट खर्च मिलता था। इसमें 20 रुपये खर्च कर बाकी 30 रुपये गुल्लक बच्चा बैंक में जमा कर देता था।

किलकारी पटना में चल रहे गुल्लक बच्चा बैंक में अब तक 3950 खाताधारी हो चुके हैं। वर्तमान में 796 बच्चे लेनदेन करते हैं। ज्ञात हो कि गुल्लक बच्चा बैंक बच्चों के लिए बच्चों द्वारा खोला गया बैंक है। इसमें बैंक मैनेजर से लेकर खाताधारी तक सारा काम बच्चों द्वारा ही किया जाता है। किलकारी परिसर में यह 12 दिसंबर 2009 में पांच बच्चों ने मिलकर खोला था।

80 लाख रुपये जमा हैं बैंक में

अभी तक बैंक में 80 लाख रुपए के लगभग पैसे जमा हो चुके हैं। सभी खाताधारी को पासबुक दिया जाता है। बैंक में पैसे जमा करने पर सालाना चार फीसदी ब्याज भी दिया जाता है। वर्तमान में गुल्लक बच्चा बैंक की सबसे बड़ी खाताधारी छात्रा सुकन्या है। सुकन्या के खाते में 23 हजार रुपए हैं। दूसरे नंबर पर ईरानी बनरवाल है। जिसके खाते में 9616 रुपये हैं। गुल्लक बच्चा बैंक से बच्चे जरूरत पड़ने पर निकासी भी करते हैं। सुमित कुमार ने बताया कि पेंटिंग करने में रंग, ब्रश आदि की जरूरत होती है तो पैसे निकालते हैं। पांच सौ रुपए से अधिक की निकासी के लिए अभिभावक की अनुमति जरूरी है।

केस-1

इंद्रजीत कुमार का एक पैर पोलियोग्रस्त है। कन्या मध्य विद्यालय मुसल्लहपुर में आठवीं का छात्र है। गुल्लक बच्चा बैंक में पांच हजार रुपये जमा किये थे। पिता की तबीयत खराब हुई तो पैसे निकाल कर इलाज करवाया। इससे काफी फायदा हो रहा है।

केस-2

राहुल कुमार अभी प्लस टू में पढ़ रहा है। राहुल कुमार जब किलकारी में था तभी गुल्लक बच्चा बैंक में खाता खुलवाया था। राहुल ने आठ हजार रुपए जमा किये। जब प्लस टू करने के लिए कॉलेज में नामांकन लिया तो इसमें बचत पैसे से काफी मदद मिली।

लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज

किलकारी के गुल्लक बच्चा बैंक का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में 2017 में दर्ज हुआ। इस बैंक को खोलने का श्रेय एएन कॉलेज की भूगोल की प्रो. पूर्णिमा शेखर को जाता है। गुल्लक बच्चा बैंक में 16 साल तक ही खाताधारी होते हैं।

किलकारी की निदेशक ज्योति परिहार कहती हैं कि गुल्लक बच्चा बैंक से बच्चों को बचत करने की आदत लगती है। इससे बैंक की कार्यप्रणाली को जान रहे है। किलकारी में आने वाले अधिकतर बच्चे इसमें खाता खुलवाते हैं।

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