Pegasus मामले में अमित शाह कौन सी क्रोनोलॉजी समझा रहे हैं? जानिए क्या है स्पाईवेयर और WhatsApp हैक का पूरा मामला

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संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत से पहले ही एक ऐसा मुद्दा सामने आया है, जिसने हर किसी को हिला दिया है. अंतरराष्ट्रीय मीडिया द्वारा दावा किया गया है कि Pegasus सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से भारत में कई पत्रकारों, नेताओं और अन्य लोगों के फोन हैक किए गए थे. इससे पहले Pegasus साल 2019 में भी चर्चा में रहा. ये चर्चा तब शुरू हुई थी जब कई WhatsApp यूजर्स को वॉट्सऐप की ओर से मैसेज मिला कि उनके फोन को Pegasus की मदद से ट्रैक किया जा रहा है. इसमें पत्रकार, एक्टिविस्ट शामिल थे. इसके बाद से Pegasus सॉफ्टवेयर लगातार चर्चा में ही है.

संसद का मानसून सत्र शुरू होते ही केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पेगासस फोन हैकिंग रिपोर्ट के सामने आने पर संदेह जताया है. शाह ने कहा कि इसके लीक होने के पीछे किसी बड़ी साजिश का इशारा है. अमित शाह ने कहा, कुछ लोग देश के लोकतंत्र को बदनाम करना चाहते हैं. उनका मकसद भारत की विकास यात्रा को पटरी से उतारना है. लेकिन, इन ताकतों के मंसूबों को सरकार सफल नहीं होने देगी. मानसून सत्र देश में विकास के नए पैमाने स्‍थापित करेगा.

शाह ने कहा, ‘देश के लोकतंत्र को बदनाम करने के लिए मानसून सत्र से ठीक पहले कल देर शाम एक रिपोर्ट आती है, जिसे कुछ वर्गों द्वारा केवल एक ही उद्देश्य के साथ फैलाया कि कैसे भारत की विकास यात्रा को पटरी से उतारा जाए और अपने पुराने नैरेटिव के तहत अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को अपमानित किया जाए. लोगों को क्रोनोलोजी समझनी चाहिए कि यह भारत के विकास में विघ्न डालने वालों की भारत के विकास के अवरोधकों के लिए एक रिपोर्ट है.’

क्या है Pegasus स्पाईवेयर पूरा मामला जो WhatsApp को भी कर लेता है हैक

समाचार एजेंसी भाषा के मुताबिक एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठन ने खुलासा किया है कि केवल सरकारी एजेंसियों को ही बेचे जाने वाले इजराइल के खुफिया जासूसी साफ्टवेयर पेगासस के जरिए कई देशों की सरकारें अपने यहां चिन्हित लोगों के फोन हैक कर उनकी जानकारियां हासिल कर रही थीं. इसमें भारत का भी नाम है, यहां के दो केंद्रीय मंत्रियों, 40 से अधिक पत्रकारों, विपक्ष के तीन नेताओं और एक मौजूदा न्यायाधीश सहित बड़ी संख्या में कारोबारियों और अधिकार कार्यकर्ताओं के 300 से अधिक के फोन हैक किए जाने का दावा किया गया है.

इसी खुलासे के बाद से बीते दिन से ही विपक्ष द्वारा सरकार पर निशाना साधा जा रहा है. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत के करीब 300 फोन नंबर को इस दौरान हैक किया गया था. अधिकतर नंबर को 2018 और 2019 के बीच हैक किया गया था. मीडिया कंपनियों द्वारा इस मसले पर पूरी सीरीज़ निकाली जाएगी, इसकी पहली कड़ी में पत्रकारों के नाम सामने लाए गए हैं.

स्पाईवेयर सॉफ्टवेयर: Pegasus 

Pegasus एक स्पाईवेयर सॉफ्टवेयर है. यानी इससे किसी की जासूसी की जा सकती है. इसे एक इजरायली कंपनी NSO ग्रुप बनाता है. ये कंपनी साइबर वेपन्स बनाने के लिए जानी जाती है.

बीते दिन हुए खुलासे पर एनएसओ ग्रुप द्वारा जवाब दिया गया है और पूरी कहानी को गलत करार दिया गया है. NSO कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि जो रिपोर्ट साझा की गई है, वह पूरी तरह गलत है. ऐसा लगता है किसी अनजान सोर्स ने गलत जानकारी दी है, जिसके आधार पर इसे तैयार किया गया है. NSO ग्रुप द्वारा ये रिपोर्ट छापने वाली मीडिया कंपनियों पर मानहानि का केस करने की तैयारी है.

Pegasus सॉफ्टवेयर से फोन हैक करने पर यूजर्स को पता भी नहीं चलता है कि उनका फोन हैक हुआ है. इस वजह से इसका यूज किया जाता है. एक बार हैकर हैक करने वाले फोन को टारगेट लें तो वो उसको malicious वेबसाइट की लिंक सेंड करते हैं. अगर यूजर इसपर क्लिक करते हैं तो उनके फोन में Pegasus इंस्टॉल हो जाता है. इसे वॉट्सऐप वॉयस कॉल के जरिए भी कई बार इंस्टॉल कर दिया जाता है. ये इतना ज्यादा एडवांस सॉफ्टवेयर है कि इसे बस मिसकॉल के जरिए भी टारगेट फोन में इंस्टॉल किया जा सकता है.

फोन में इंस्टॉल हो जाने के बाद ये अपना काम शुरू कर देता है. ये कॉल लॉग हिस्ट्री को डिलीट कर देता है. इससे यूजर को मिसकॉल के बारे में भी नहीं पता चल पाता है. फोन पर ये पूरी तरह से नजर रख सकता है. यहां तक कि ये वॉट्सऐप एन्क्रिप्टेड चैट्स को भी पढ़ने लायक बना देता है. ये यूजर्स के मैसेज को पढ़ने के अलावा, कॉल को ट्रैक, यूजर की एक्टिविटी को ट्रैक कर सकता है.

सिक्योरिटी रिसर्चर के अनुसार, Pegasus लोकेशन डेटा, फोन के वीडियो कैमरा का एक्सेस, माइक्रोफोन का एक्सेस भी ले लेता है. इससे वो किसी की बातचीत को भी आसानी से सुन सकता है. ये ब्राउजर हिस्ट्री, कॉन्टैक्ट डिटेल्स, मेल पढ़ने, स्क्रीनशॉट लेने में भी सक्षम है.

ये एक अल्टीमेट सर्विलांस टूल है. अगर कोई सरकार किसी पर नजर रखना चाहती है तो वो Pegasus की ओर जा सकती है. ये काफी स्मार्ट और एडवांस सर्विलांस सॉफ्टवेयर है. अगर इसका संपर्क कमांड और कंट्रोल सर्वर से 60 दिन तक नहीं हो पता है या इसे लगता है ये गलत डिवाइस पर इंस्टॉल हो गया है तो ये अपने आप को नष्ट कर लेता है.

आपको बता दें कि Pegasus काफी महंगा सॉफ्टवेयर है. इसकी कीमत लाखों डॉलर है. कंपनी ने कहा है ये सिर्फ सरकार को ही सॉफ्टवेयर बेचती है. Pegasus का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर नहीं हो सकता है. इस वजह से आम आदमी को इससे डरने की जरूरत नहीं है.

भारत सरकार का क्या कहना है ?

कंपनियों के खुलासे, विपक्ष के आरोपों के बीच सरकार ने इन सभी मसलों को गलत करार दिया है. सरकार की ओर से किसी भी तरह की हैकिंग में शामिल होने से इनकार किया गया है, साथ ही इसे भारत जैसे मजबूत लोकतंत्र की छवि बिगाड़ने की कोशिश बताया गया है.

भारत सरकार ने अपने जवाब में कहा है कि भारत एक मजबूत लोकतंत्र है जो अपने सभी नागरिकों को मौलिक अधिकार के रूप में निजता के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है.

भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने मीडिया रिपोर्ट में आये पेगासस जासूसी विवाद पर कहा कि इस पूरे मामले से भारत सरकार या भाजपा को जोड़ने के मामले में अंशमात्र भी सबूत नहीं हैं. भाजपा नेता ने इस मुद्दे पर कांग्रेस के आरोपों को निराधार बताया. रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इस खबर को सामने लाने वालों ने भी यह दावा नहीं किया कि उस डेटाबेस में मौजूद कोई भी विशेष मोबाइल नंबर यह साबित नहीं करता है कि उसके ऊपर पेगासस स्पाइवेयर (जासूसी सॉफ्टवेयर) का हमला हुआ है.

‘पेगासस प्रोजेक्ट’ मीडिया रिपोर्ट को लेकर कांग्रेस के दबाव पर पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘भाजपा के खिलाफ कांग्रेस द्वारा लगाए गए राजनीतिक औचित्य की निराधार और बेबुनियाद टिप्पणियों का पार्टी पुरजोर खंडन करती है. 50 से अधिक वर्षों से भारत पर शासन करने वाली पार्टी के लिए यह एक नया निचला स्तर है.’ प्रसाद ने कहा, ‘कांग्रेस पार्टी ने भाजपा पर ऐसे स्तरहीन आरोप लगाए हैं जो राजनीतिक शिष्टाचार से परे हैं. भाजपा कांग्रेस द्वारा लगाए गए पेगासस मामले के सारे आरोपों को खारिज करती है. कांग्रेस ने अब तक पेगासस मामले में कोई सबूत पेश नहीं किए हैं.’

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अजीब स्थिति है. NSO कंपनी इसका खंडन कर रही है और कह रही है कि उसके अधिकतर उत्पादों को पश्चिमी देशों में इस्तेमाल किया जा रहा है लेकिन भारत को निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा, “ऐसा कोई भी सबूत नहीं है जो ‘पेगासस’ कहानी में भाजपा या भारत सरकार के किसी भी संबंध को साबित करता है. और क्या हम इस बात से इनकार कर सकते हैं कि एमनेस्टी जैसी संस्थाओं का कई मायनों में भारत विरोधी घोषित एजेंडा था. जब उनसे उनकी फंडिंग का स्रोत पूछा जाता है तो वे कहते हैं, भारत में काम करना मुश्किल है.”

 

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