एक छोटे से केज से शुरू हुआ पटना चिड़ियाघर आज है देश के 10 बड़े चिड़ियाघरों में से एक

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संजय गांधी जैविक उद्यान की 22 जून को 45वीं वर्षगांठ मनाई गई। राजभवन के एक छोटे से केज में हिरण पालन से चिड़ियाघर का बीजारोपण हुआ था।

अब यह उद्यान देश के 10 बड़े चिड़ियाघरों में से एक है। गैंडा प्रजनन एवं गैंडों की अधिक संख्या के कारण विश्व भर में यह चिड़ियाघर प्रसिद्ध है। चिड़ियाघर का रंग-रूप अब पूरी तरह से बदल गया है। दो माह बाद इसमें और बदलाव आएंगे।

स्थानीय चिड़ियाघर में अब तक रहे निदेशकों को स्थापना दिवस के अवसर पर आमंत्रित किया गया है। पहले निदेशक बीसी झा का निधन हो चुका है। रणवीर सिंह और वाइके सिंह चौहान को छोड़कर सभी निदेशक आने की सहमति दे दी है।

आयोजन के दौरान चिड़ियाघर के 45 वर्षो के सफर पर चर्चा की जाएगी। बेहतर प्रदर्शन करने और उत्कृष्ट बनाने के लिए सुझाव लिए जाएंगे। चिड़ियाघर की स्थापना की शुरुआत 1969 में हुई थी। एक छोटा सा केज बनाकर इसमें हिरण रखा गया था।

1972 में राजस्व विभाग की 58 एकड़ और लोक निर्माण विभाग ने 60 एकड़ भूमि इसके लिए स्थानांतरित की। अक्टूबर 1980 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र ने उद्यान का नामकरण करते हुए जय गांधी जैविक उद्यान कर दिया। आठ मार्च 1983 को उद्यान को सुरक्षित वन क्षेत्र घोषित कर दिया गया।

उद्यान में 100 प्रजाति के 1200 से अधिक वन्य प्राणी हैं। यहां बाघ, शेर, गैंडा, हिपो का प्रजनन हो रहा है। तेंदुआ और चिम्पैंजी दर्शकों को अपनी तरफ आकर्षित करने में सफल रहते हैं।
प्रतिवर्ष 22 लाख से अधिक दर्शक यहां भ्रमण के लिए आते हैं। उद्यान का स्वरूप बदलने की भी कवायद तेज कर दी गई है। गेट ख्या एक को भव्य बनाया जा रहा है। एक बड़ा वाहन पार्किंग स्थल बना दिया गया है।

गेट ख्या दो के गेट का भी लुक बदल गया है। अंदर प्रवेश करते ही हरियाली स्वागत करती है। मुख्य सड़क के दोनों तरफ घास उगाने का प्रयास चल रहा है। सिकंदराबाद से घास मंगाई गई है। शौचालय का भी स्वरूप बदल गया।

चारदीवारी पर वन्य प्राणियों की तस्वीरें बनाकर आकर्षण का केंद्र बना दिया गया है। बच्चों के खेलकूद के लिए एक से एक आकर्षक झूले लगाए गए हैं। मछली घर की भी स्थिति में सुधार लाया गया है।

बच्चों को शिशु रेल का इंतजार है। उद्यान में जू शिक्षा केंद्र जागरुकता का केंद्र बन गया है। यहां पर वन्य प्राणियों एवं वनस्पतियों के बारे में जानकारी दी जाती है। इसी केंद्र में राजकीय आयुर्वेद कॉलेज के चिकित्सक बैठते हैं।

 

नि:शुल्क औषधीय सलाह देते हैं। थ्री डी थियेटर का निर्माण किया जा रहा है। यहां वन्य प्राणी एवं वनस्पति पर आधारित फिल्में दिखाई जाएंगी। इसके तैयार होने में अभी समय लगेगा।

भव्य गेस्ट हाउस भी बनकर तैयार हो गया है। उसे अंतिम रूप दिया जा रहा है।

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