पटना विश्‍वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में नीतीश कुमार की पार्टी यूं ही नहीं जीत गई, असली रणनीतिकार तो ये लोग रहे

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 बिहार में नीतीश कुमार के मुख्‍यमंत्री बनने के बाद जनता दल यूनाइटेड की ताकत लगातार बढ़ रही थी, लेकिन 2014 के लोकसभा चुनाव में बाजी पलट गई। 2015 के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में जदयू ने फिर से मजबूती हासिल की, लेकिन 2020 के विधानसभा चुनाव में पार्टी तीसरे नंबर पर पहुंच गई। लेकिन, पटना विश्‍वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में जीत ने जदयू के हौसले बुलंद कर दिए हैं।

नीतीश कुमार जताते रहे हैं अपना दर्द

 

मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार अक्‍सर सार्वजनिक मंचों से यह दर्द बयां करते रहे हैं कि नई पीढ़ी को उनके कार्यकाल के दौरान बिहार में आए बदलावों के बारे में ठीक तरीके से बताया नहीं जा रहा है। युवाओं को यह नहीं पता कि उनके सीएम बनने से पहले और अब के हालात में क्‍या बदलाव आया है। लेकिन, पटना यूनिवर्सिटी की जीत के बाद उनकी पार्टी के नेता कह रहे हैं कि युवा वर्ग नीतीश कुमार को ही अपना नेता मानता है।

जदयू की जीत इस तरह से अहम

पटना विश्‍वविद्यालय छात्र संघ के चुनाव में छात्र जदयू के अलावा छात्र राजद, बीजेपी से जुड़ी एबीवीपी, कांग्रेस से जुड़ा एनएसयूआइ सहित कई संगठन मैदान में थे। लेकिन, केंद्रीय पैनल की पांच में से चार सीटें जदयू ने अकेले कब्‍जा लीं। बिहार की सरकार में जदयू के सहयोगी, राजद, कांग्रेस और वाम दलों से जुड़े छात्र संगठन पुसु चुनाव के लिए केंद्रीय पैनल में खाता तक नहीं खोल सके। अलबत्‍ता विरोधी दल भाजपा से जुड़ी एबीवीपी को एक सीट जरूर मिल गई।

2018 में भी जदयू को मिली थी जीत

पुसु चुनाव में छात्र जदयू समर्थित उम्‍मीदवार ने अध्यक्ष पद पर दूसरी बार सफलता मिली है। इससे पहले वर्ष 2018 में मोहित प्रकाश को सफलता मिली थी। तब चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर एक रणनीति से चुनाव में सफलता अर्जित की थी। उस समय भी पूर्व विधान पार्षद व बीएन कालेज के प्राध्यापक डा. रणवीर नंदन सहयोगी रणनीति की भूमिका में थे।

रणवीर नंदन की टीम में ये रहे सक्रिय

इस बार वह मुख्य भूमिका में आने के बाद उनके सहयोग के लिए पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष व वर्तमान में युवा जदयू के अध्यक्ष दिव्यांशु भारद्वाज, जदयू प्रवक्ता अन्नू प्रिया पटेल, छात्र जदयू के अध्यक्ष नीतीश पटेल, पूर्व छात्र संघ कोषाध्यक्ष कोमल कुमारी विशेष रणनीति के तहत कालेज के साथ-साथ छात्रावास में अपनी पैठ बढ़ाते हुए जीत को सुनिश्चित किया।

2021 से ही चल रही थी तैयारी

इसके लिए सभी आठ-नौ महीने से कार्य पर जुटे थे। पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2021 में ही कराने की तैयारी चल रही थी, लेकिन शैक्षणिक सत्र विलंब होने के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन ने चुनाव विलंब से कराने का फैसला लिया। इसके बाद से ही छात्र जदयू अपनी टीम के साथ रणनीति बनाकर कार्य किया और कैंपस में अपनी स्थिति मजबूत कर लिया।

युवाओं के असली हीरो नीतीश कुमार: जदयू

जदयू के प्रदेश सचिव रंजीत कुमार झा ने रविवार को कहा कि पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के चुनाव में जदयू समर्थित उम्मीदवारों की जीत ने यह साबित किया है कि आज भी विद्यार्थियों और युवाओं के असली हीरो नीतीश कुमार हैं। युवा वर्ग नीतीश कुमार के कुशल नेतृत्व पर पूर्ण भरोसा रखता है। रंजीत ने कि इस जीत के लिए वह जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह के प्रति भी आभार प्रकट करते हैं। उनके नेतृत्व में संगठन हर स्तर पर मजबूत हुआ है।

उमेश कुशवाहा ने जदयू की नीतियों पर बताया मुहर

जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश सिंह कुशवाहा ने कहा है कि पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के चुनाव में चार पदों पर जदयू से जुड़े साथियों की जीत ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि युवा वर्ग जदयू के सिद्धांतों के साथ है। यह जीत मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की लोकप्रियता का प्रमाण है। जदयू प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जो काम किए हैं, उसके प्रति लोगों का झुकाव दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। प्रदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति लगाव स्पष्ट रूप से दिख रहा है।

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