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यात्रा को यादगार बनाते पटना के ये प्रमुख पर्यटन स्थल

मनोरंजन

बिहार की राजधानी पटना का गौरवमय इतिहास रहा है। पर्यटन की दृष्टि से बिहार के सभी स्थलों में पटना एक विशेष स्थान रखता है। आइये जाने बिहार के उन प्रमुख स्थलों के बारे में जो आपकी बिहार यात्रा को यादगार बनाने में सहायक होंगे।

1. पटना संग्रहालय


1917 में बना बिहार का पहला संग्रहालय स्थानीय लोगों में जादूघर के नाम से भी जाना जाता है। इस म्यूज़ियम में मौर्य, शक, कुषाण तथा गुप्त काल के हिन्दू, जैन तथा बौद्ध धर्म की कई निशानियाँ हैं। लगभग २० करोड़ वर्ष पुराने पेड़ के 16 मीटर लंबा तने का फॉसिल, भगवान बुद्ध की अस्थियाँ तथा दीदारगंज, पटना सिटी से प्राप्त यक्षिणी की मूर्ति यहाँ की विशेष धरोहर है।

बिहार के पुरातत्वाविदों द्वारा किए गए अनुसंधानों को समग्र रूप से इस संग्रहालय में रखा गया है। इसमें मौर्य और गुप्तव काल की मूर्तियाँ (पत्थ र, टेराकोटा, और लोहे की बनी हुई), मुगलकाल के सिक्के, तिब्बती थंग्का चित्र आदि संरक्षित है।

2. गोलघर
1770 ईस्वी में इस क्षेत्र में आए भयंकर अकाल के बाद 137000 टन अनाज भंडारण के लिए बनाया गया यह गोलाकार ईमारत अपनी खास आकृति के लिए प्रसिद्ध है। 1786 ईस्वी में जॉन गार्स्टिन द्वारा निर्माण के बाद से 29 मीटर ऊँचा गोलघर0 पटना शहर का प्रतीक चिह्न बन गया।

आधार पर 3.6 मीटर चौड़े दिवाल के शीर्ष पर दो तरफ बनी घुमावदार सीढियों से ऊपर चढकर पास ही बहनेवाली गंगा और इसके परिवेश का शानदार अवलोकन संभव है।

3. तख्त श्रीहरमंदिर साहिब
पटना सिक्खों के दसमें और अंतिम गुरु गोबिन्द सिंह की जन्मस्थली है। नवम गुरु तेगबहादुर के पटना में रहने के दौरान गुरु गोविन्दसिंह ने अपने बचपन के कुछ वर्ष पटना सिटी में बिताए थे। सिक्खों के लिए हरमंदिर साहब पाँच प्रमुख तख्तों में से एक है। गुरु नानक देव की वाणी से अतिप्रभावित पटना के श्री सलिसराय जौहरी ने अपने महल को धर्मशाला बनवा दिया।

भवन के इस हिस्से को मिलाकर गुरुद्वारे का निर्माण किया गया है। यहाँ गुरू गोविंद सिंह से संबंधित अनेक प्रमाणिक वस्तु एँ रखी हुई है। बालक गोविन्दराय के बचपन का पंगुरा (पालना), लोहे के चार तीर, तलवार, पादुका तथा ‘हुकुमनामा’ गुरुद्वारे में सुरक्षित है।

यह स्थाेन दुनिया भर में फैले सिक्ख धर्मावलंबियों के लिए बहुत पवित्र है। प्रकाशोत्सकव के अवसर पर पर्यटकों की यहाँ भारी भीड़ उमड़ती है।

4. अगम कुआँ एवं शीतला मंदिर
मौर्य वंश के शासक सम्राट अशोक के काल का एक कुआँ गुलजा़रबाग स्टेशन के पास स्थित है। लोकश्रुति है कि शासक बनने के लिए अशोक ने अपने 99 भाईयों को मरवाकर इस कुँए में डाल दिया था।

राजद्रोहियों को यातना देकर इस कुँए में फेंक दिया जाता था। पास ही स्थित एक मन्दिर स्थानीय लोगों के शादी-विवाह का मह्त्वपूर्ण स्थल है।

5. कुम्हरार पार्क
पटना जंक्शन से 6 किलोमीटर पूर्व कंकरबाग रोड पर स्थित यह स्थान पटना शहर के स्वर्णिम दिनों की याद दिलाता है। ऐतिहासिक पर्यटन के दृष्टिकोण से यह स्था न काफी महत्वकपूर्ण है। ६०० ईसापूर्व से ६०० ईस्वी के बीच बने भवनों की चार स्तरों में खुदाई हुई है। मगध के महान शासकों द्वारा शुरु में बनवाए गए लकड़ी के महल अब मौजूद नहीं है लेकिन बाद में पत्थर से बने 80 स्तंभों का महल के कुछ अंश देखनेलायक हैं।

कुम्हरार मौर्य कालीन अवशेषों को देखने के लिए महत्वापूर्ण स्‍थानों में से एक है। चंद्रगुप्त मौर्य, बिन्दुसार तथा अशोक कालीन पाटलिपुत्र के भग्नावशेष को देखने के लिए यह सबसे अच्छी जगह है। कुम्हरार परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा संरक्षित तथा संचालित है और सोमवार को छोड़ सप्ताह के हर दिन १० बजे से ५ बजे तक खुला रहता है।

6. पादरी की हवेली

ईसाई मिशनरियों द्वारा सन 1713 में स्थापित संत मेरी चर्च पटना सिटी के निवासियों में पादरी की हवेली नाम से मशहूर हो गया। 70 फीट लंबा, 40 फीट चौड़ा और 50 फीट ऊँचा यह शानदार चर्च सन 1772 में कलकत्ता से आए इटालियन वास्तुकार तिरेतो द्वारा वर्तमान रूप में बनाया गया।

बिहार का प्राचीनतम चर्च बंगाल के नवाब मीर कासिम तथा ब्रिटिस ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच की कड़वाहटों का गवाह है। 25 जून 1763 को मीर कासिम के सैनिकों द्वारा चर्च को रौंदा गया, फिर सन 1857 की क्रांति के दौरान भी इसे नुकसान पहुँचा।

विशालकाय घंटी और मदर टेरेसा से जुड़ाव के चलते यह गिरिजाघर धार्मिक तथा कलाप्रेमी पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है। 1948 में मदर टेरेसा ने यहीं रहकर नर्सिंग का प्रशिक्षण लिया और कोलकाता जाकर पीड़ितों की सेवा में लग गयीं।

7. दरभंगा हाउस एवं काली घाट

इसे नवलखा भवन भी कहते हैं। इसका निर्माण दरभंगा के महाराज कामेश्वर सिंह ने करवाया था। गंगा के तट पर अवस्थित इस प्रासाद में पटना विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभागों का कार्यालय है।

इसके परिसर में एक काली मन्दिर भी है जहाँ राजा खुद अर्चना किया करते थे। इसी कारण यहाँ पर स्थित गंगा घाट को काली घाट कहते हैं। यहाँ आप नौका विहार का लुत्फ़ उठा सकते हैं।

गंगा के उस पार जाने के लिए नौका उपलब्ध रहती है। सुकून भरे कुछ पल के लिए आप गंगा की लहरों के करीब समय बिता सकते हैं।

8. खुदाबक़्श लाइब्रेरी

अशोक राजपथ पर स्थित यह राष्ट्रीय पुस्तकालय 1891 में स्थापित हुआ था। खुदाबक़्श पुस्तकालय की शुरुआत मौलवी मुहम्मद बक़्श जो छपरा के थे उनके निजी पुस्तकों के संग्रह से हुई थी।

भारत सरकार ने संसद में 1969 में पारित एक विधेयक द्वारा इसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थान के रूप में प्रतिष्ठित किया है। यहाँ अतिदुर्लभ मुगल कालीन पांडुलपियाँ संग्रहित हैं।

खुदाबक़्श ओरिएंटल पब्लिक लाइब्रेरी राजपूत और मुगलकालीन पेंटिंग्सु, कुरान की अद्भुत प्रति, अरबी और फारसी पांडुलिपि तथा प्रमाणिक संग्रह के लिए अद्वितीय है।

9. गाँधी मैदान

वर्तमान शहर के मध्यभाग में स्थित यह विशाल मैदान पटना का दिल है। ब्रिटिश शासन के दौरान इसे पटना लॉन्स या बाँकीपुर मैदान कहा जाता था। जनसभाओं, सम्मेलनों तथा राजनीतिक रैलियों के अतिरिक्त यह मैदान पुस्तक मेला तथा लोगों के दैनिक व्यायाम का भी केन्द्र है।

इसके चारों ओर अति महत्वपूर्ण सरकारी इमारतें, प्रशासनिक तथा मनोरंजन केंद्र, चर्च आदि बने हैं।

10. श्रीकृष्ण विज्ञान केंद्र

गाँधी मैदान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में आकाशवाणी केंद्र के साथ ही छज्जूबाग में बना बना विज्ञान केंद्र बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह के नाम पर बना है।

किशोरवय तथा बालमनोविज्ञान को ध्यान में रख कर इस केंद्र की स्थापना की गयी है। चित्रों, चलंत मॉडल तथा दृश्य-श्रव्य माध्यम से विज्ञान के विभिन्न पहलूओं को समझाया गया है।

11. महावीर मन्दिर
संकटमोचन रामभक्त हनुमान मन्दिर पटना जंक्शन के ठीक बाहर बना है। लगभग 60 वर्ष पूर्व देश विभाजन के समय पंजाब से आए हिंदू शरणार्थियों द्वारा बनाए गए मन्दिर को 1987 में भव्य रूप दिया गया।

न्यू मार्किट में बने मस्जिद के साथ खड़ा यह मन्दिर हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है।

12. तारामण्डल

संग्रहालय के पास बना इन्दिरा गाँधी विज्ञान परिसर में बना तारामण्डल देश में वृहत्तम है।

यहाँ हिंदी तथा अंग्रेजी में अंतरिक्ष पर आधारित कार्यक्रम नियमित रूप से दिखाए जाते हैं।

13. संजय गांधी जैविक उद्यान

राज्यपाल के सरकारी निवास राजभवन के पीछे स्थित जैविक उद्यान शहर का फेफड़ा है।

विज्ञानप्रेमियों के लिए ‌यह जन्तु तथा वानस्पतिक गवेषणा का केंद्र है। व्यायाम करनेवालों तथा पिकनिक के लिए यह् पसंदीदा स्थल है।

 

14. पटन देवी मंदिर

पटना सिटी में स्थित पटन देवी मंदिर शक्ति उपासना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। देवी भागवत और तंत्र चूड़ामणि के अनुसार, सती की दाहिनी जांघ यहीं गिरी थी। नवरात्र के दौरान यहां काफी भीड़ उमड़ती है।

सती के 51 शक्तिपीठों में प्रमुख इस उपासना स्थल में माता की तीन स्वरूपों वाली प्रतिमाएं विराजित हैं। वैसे तो यहां मां के भक्तों की प्रतिदिन भारी भीड़ लगी रहती है, लेकिन नवरात्र के प्रारंभ होते ही इस मंदिर में भक्तों का तांता लग जाता है।

मान्यता है कि जो भक्त सच्चे दिल से यहां आकर मां की अराधना करते हैं, उनकी मनोकामना जरूर पूरी होती है।

 

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