पटना में बन रहा है देश का दूसरा सबसे बड़ा रिवर फ्रंट

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नमामि गंगे परियोजना के तहत कलेक्ट्रेट से गायघाट के बीच बन रहे रिवर फ्रंट के 12 घाट तैयार हो गए हैं।

सिर्फ चार घाट के निर्माण के बाद शहर के लोग कलेक्ट्रेट से राजाघाट तक पैदल जा सकेंगे। गंगा की सैर के लिए देश का दूसरा सबसे बड़ा रिवर फ्रंट पटना में बनाया जा रहा है।

गुजरात के अहमदाबाद में बने साबरमती रिवर फ्रंट के बाद पटना में गंगा नदी के किनारे बन रहा रिवर फ्रंट दूसरा सबसे बड़ा पाथवे होगा। जून, 2017 तक इसे तैयार करना था। लेकिन, पिछले वर्ष आई बाढ़ के कारण प्रोजेक्ट छह महीने तक बंद हो गया।

कई इलाकों में दलदल हो जाने के कारण काम शुरू होने में वक्त लग गया। अब प्रोजेक्ट को जून, 2018 तक पूरा करने का लक्ष्य है। 16 घाटों पर रिवर फ्रंट तैयार कर रही एलएनटी की मानें तो गांधी घाट से रानी घाट को कनेक्ट किया जा चुका है।

लगभग दो किलोमीटर तक लोग अभी घूम भी सकते हैं। अब तक 12 घाटों को कनेक्ट भी किया जा चुका है। इसी तरह घघा घाट सहित आसपास के कई घाटों पर लाइट भी लगा दी गई है।

बुडको के पीआरओ चंद्रभूषण कुमार ने बताया कि राजधानीवासियों की सैर और पर्यटन के तौर पर इसे विकसित किया जा रहा है। यहां लोगों को 24 घंटे पैदल सैर करने की छूट मिलेगी।

 

मुख्य तौर पर छठ के दौरान अर्घ्य देने के लिए कृत्रिम तालाब के लिए भी स्पॉट बनाया जा रहा है। नदी में दलदल होने पर यहां पानी भरकर व्रती अर्घ्य दे सकेंगे। अब तक 12 घाटों को कनेक्ट किया जा चुका है, घघा घाट सहित आसपास के कई घाटों पर लाइट भी लगा दी गई है।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत कलेक्ट्रेट से बायीं ओर बांस घाट तक नदी किनारे रिवर फ्रंट बनाना है। डेढ़ किलोमीटर के इस प्रोजेक्ट को कलेक्ट्रेट पर बने रिवर फ्रंट में जोड़ दिया जाएगा।

इस तरह पटना में गंगा किनारे सैर और पार्टी के लिए छह किलोमीटर लंबा रिवर फ्रंट तैयार होगा। स्मार्ट सिटी का वेट लैंड भी इसी से जुड़ा होगा।

गांधी मैदान से गायघाट तक जाने के लिए यात्रियों के लिए अभी अशोक राजपथ ही रूट है। लेकिन, पैदल यात्रियों को आने-जाने के लिए इस पाथवे से बड़ी राहत मिलेगी।

हालांकि नदी दर्शन के लिए लोगों को काली घाट से गायघाट तक ही जाना होगा। इस पाथवे के ठीक बायीं ओर गंगा पथ के एलिवेटेड पुल का हिस्सा दिखेगा।

अदालतगंज, पीएन बनर्जी, कृष्णा घाट और रौशन घाट का काम अभी बाकी है। गंगा में पानी का स्तर बढ़ता जा रहा है। बारिश के बाद तेजी से काम किया जाएगा।

अक्टूबर से जून, 2018 तक इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है। कुछ घाटों पर पायलिंग भी की जा चुकी है। फाउंडेशन तैयार हो जाने के बाद इसके निर्माण में बेहद कम समय लगेगा।

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