पटना PFI टेरर ट्रेनिंग कैंपः गजवा-ए-हिंद के व्हाट्सएप ग्रुप पर पाक के फैजान से जुड़ा था गिरफ्तार मरगूब, आतंकी वारदात की थी तैयारी

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गजवा-ए-हिंद के मायने भारत के खिलाफ जेहादी मंच है। युद्ध के जरिए देश पर कब्जा करना ही गजवा-ए-हिंद से जुड़े लोगों की सोच है और इसके लिए वह किसी भी हद तक जा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक मरगूब अहमद दानिश उर्फ ताहिर और उसके साथ गजवा ए-हिद वाट्सएप ग्रुप में जुड़े लोग देश में हिंसा फैलाने की फिराक में थे। यदि मरगूब की गिरफ्तारी नहीं होती तो आनेवाले दिनों में बड़े आतंकी वारदात हो सकते थे। चूंकि इनका मिशन ही देश के खिलाफ युद्ध छेड़ना था, ऐसे में इसकी संभावना बहुत ज्यादा थी। गजवा-ए-हिंद का दूसरा वाट्सएप ग्रुप जिसे मरगूब ने बनाया और संचालित कर रहा था उससे भले ही पाकिस्तानी और बांग्लादेशी भी जुड़े थे पर कई सदस्य भारत के ही हैं। वे लोग कौन हैं और कहां रहते हैं इसकी छानबीन की जा रही है। पाकिस्तानी के आतंकी नेटवर्क से जुड़ना फुलवारी के मरगूब अहमद दानिश उर्फ ताहिर के लिए महज संयोग नहीं था। शुरू से ही वह कट्टरपंथी विचारधारा से प्रभावित था। यही वजह थी कि जब उसके हाथ एन्ड्रॉयड फोन लगा तो उसके संपर्क भी देश विरोधी तत्वों के साथ बनते चले गए। पाकिस्तानी नागरिक फैजान और जैन से जुड़ने के बाद वह न सिर्फ गजवा-ए-हिंद की मुहिम में शामिल हुआ बल्कि दूसरों को भी इसके लिए तैयार करने लगा।

2015 में  इस्लामिक ग्रुप के संपर्क में आया मरगूब

मरगूब ने साल 2015 में पहली बार एन्ड्रॉयड मोबाइल फोन लिया और फेसबुक से जुड़ा। इसके साथ ही इस्लामिक ग्रुप के संपर्क में आया। कइयों से उसकी दोस्ती हुई और वहीं से गजवा-ए-हिंद की तरफ मरगूब ने कदम बढ़ाया। फेसबुक पर जिनसे दोस्ती हुई, उनके साथ एक वाट्सएप ग्रुप बनाया। मरगूब पर जब उसके दोस्तों को विश्वास हो गया तो उन्हें गजवा-ए-हिंद ग्रुप में शामिल होने के लिए लिंक भेजा गया।

फैजान के बाद जैन से हुई दोस्ती

वाट्सएप ग्रुप गजवा-ए-हिंद जिसमें मरगूब शामिल हुआ, उसका एडमिन पाकिस्तान का फैजान था। इसी ग्रुप में जैन नाम का एक और पाकिस्तानी था। इस ग्रुप में भारत विरोधी चैट होते थे और गजवा-ए-हिंद के मकसद को पूरा करने के लिए लोगों को भड़काने की रणनीति बनती थी।

मरगूब ने बनाया अपना गजवा-ए-हिंद ग्रुप

मरगूब ने भारत में हिंसा फैलाने और अपने मकसद को पूरा करने के लिए गजवा-ए-हिंद के नाम से इसी साल एक नया ग्रुप बनाया। इस ग्रुप में ताहिर अपने स्तर से पाकिस्तानी और बांग्लादेशी समेत अबतक 181 सदस्यों को जोड़ चुका था।

वाट्सएप ग्रुप में सिर्फ देश विरोधी बातें होती थीं

गजवा-ए-हिंद वाट्सएप ग्रुप में सिर्फ देश में हिंसा फैलाने और अपने मकसद में कामयाब होने की बातें करने का सीधा आदेश दिया जाता था। सभी सदस्यों को इसको लेकर हिदायत दी गई थी। दोनों ही ग्रुप में लोगों को भड़काने के लिए मारे जानेवाले आतंकियों और धर्म विशेष के लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई का वीडियो या संदेश डाला जाता था। जम्मू-कश्मीर में मारे जानेवाले आतंकियों का गुणगान करने और भारत से बदला लेने पर बात होती थी।

घरवालों को शक हुआ तो बना ली थी दूरी

मरगूब के घरवालों को उसकी गतिविधियां संदिग्ध लगी तो सच्चाई जानने के लिए घरवाले उस पर निगरानी रखने लगे। मरगूब ने बड़ी ही चालाकी से घरवालों को भरमाने का काम किया। परिवार को शक न हो, लिहाजा उसने कुछ दिनों के लिए अपनी गतिविधियां बंद कर दी थीं।

दुबई से लौटने के बाद इशानगर से नेटवर्क चला रहा था मरगूब

फुलवारी के इशानगर का मरगूब अहमद दानिश उर्फ तारिक की गजवा-ए-हिंद से जुड़े होने के साक्ष्य मिलने के बाद पुलिसिया कार्रवाई से पूरे इलाके में शुक्रवार को भय का माहौल दिखा। हर किसी की जुबां पर यही चर्चा थी कि आगे इस मामले में अब किसकी गिरफ्तारी होगी। चाय की दुकान से लेकर चौक- चौराहों पर शुक्रवार को मरगूब की कारस्तानी की ही चर्चाएं होती रहीं। कल तक जो अपने को मरगूब के दोस्त बताते थे या साथ उठते- बैठते थे, वह आज अंजान बने हुए थे। फुलवारी के इशानगर में मरगूब गुमनाम की तरह रहता था।

मरगूब के घर में भी सन्नाटा पसरा हुआ था। मोहल्ले वाले हों या दोस्त मरगूब का नाम लेने से भी परहेज कर रहे हैं। मोहल्ले के लोग व उसको जानने वालों ने बताया कि मरगूब कहीं भी बैठता-उठता था तो ज्यादातर पाकिस्तानी और विदेश चैनल ही देखता था। अक्सर पाकिस्तान-हिन्दुस्तान की बातें करते रहता था। देखने में वह मंद बुद्धि प्रतीत होता था। किसी को इसकी भनक भी नहीं थी कि वह गजवा-ए-हिंद और पाकिस्तान के कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक से वह जुड़ा है और पाकिस्तान के लोगों के संपर्क है।

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