पटना में बदलने वाला है पंड‍ित जवाहर लाल नेहरू का पता, बिहार सरकार ने कर ली है पूरी तैयारी

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देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल का पटना में ठिकाना बदलने की तैयारी है। करीब 36 वर्षों से पटना जंक्शन के निकट गोलंबर पर स्थापित नेहरू की प्रतिमा यहां ओवरब्रिज बनने और आटो के साथ दुकानदारों के अतिक्रमण की शिकार हो गई है। इसकी सुंदरता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। जयंती और पुण्यतिथि के आयोजन भी यहां ठीक से नहीं हो सकते हैं। भविष्य में यहां से मेट्रो रेल को भी गुजरना है। लिहाजा तमाम तथ्यों का आकलन करने के बाद इस प्रतिमा को यहां से हटाकर नए स्थान पर स्थापित करने की योजना बनी है।

जून-जुलाई में मिल जाएगा नया ठिकाना

मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति ने तथ्यों के आकलन के बाद पंडित नेहरू की प्रतिमा को स्टेशन गोलंबर से हटाकर किसी नए स्थान पर स्थापित करने के निर्देश दिए थे। आदेश के बाद भवन निर्माण विभाग ने नए ठिकाने की तलाश प्रारंभ की। नया ठिकाना खोज लिया गया है। भवन निर्माण से मिली जानकारी के अनुसार, पंडित नेहरू की प्रतिमा जून-जुलाई के बीच स्टेशन से उठाकर बेली रोड में विश्वेश्वरैया भवन और पुनाईचक मोड के बीच स्थापित की जाएगी।

  • सन् 1986 में पंडित नेहरू की पुण्यतिथि पर किया गया था प्रतिमा अनावरण
  • बिंदेश्वरी दुबे की सरकार में राज्यपाल पी. वेंकटसुब्बैया ने किया था अनावरण

 

प्रतिमा दिखे सुंदर इसके लिए किए जाएंगे इंतजाम

भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि ने बताया कि बेली रोड में नेहरू की प्रतिमा की स्थापना के क्रम में चयनित स्थान की सुंदरता कायम करने के लिए कई काम किए जाएंगे। विभाग इसकी कार्ययोजना बना रहा है। बेली रोड में प्रतिमा की स्थापना का एक मकसद यह भी है कि बेली रोड का आधिकारिक नाम जवाहर लाल नेहरू पथ है। यहां नेहरू की प्रतिमा स्थापित होने से पथ के नाम की सार्थकता भी स्पष्ट होगी।

राज्यपाल वेंकटसुब्बैया ने किया था प्रतिमा का उद्घाटन

बता दें कि आज से करीब 36 वर्ष पहले प्रदेश के मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दुबे की सरकार थी। तत्कालीन राज्यपाल पी. वेंकटसुब्बैया ने इस प्रतिमा का अनावरण किया था। प्रतिमा अनावरण के लिए जो दिन निर्धारित था वह था 27 मई 1986। इसी दिन नेहरू जी पुण्यतिथि मनाई जाती है। प्रतिमा स्थापना के करीब 30 वर्ष बाद जब मीठापुर-चिरैयाटांड ब्रिज बनाने की प्रक्रिया 2016-17 में शुरू हुई, उस दौरान प्रतिमा के निकट बने गोलंबर का आकार कम किया गया था। अब इस प्रतिमा को स्थायी रूप से वहां से हटाया जाएगा।

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