पटना के फुलवारीशरीफ में छापे से लिखी गई पीएफआई बैन की पटकथा, पढ़ें इनसाइड स्टोरी

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बिहार की राजधानी पटना के फुलवारीशरीफ में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की देश विरोधी साजिश और मिशन-2047 के खुलासे ने उसे बैन तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। 12 जुलाई 2022 को पटना पुलिस की कार्रवाई के बाद पीएफआई के मंसूबे को लेकर जो चौंकाने वाले खुलासे हुए उसने देशभर में इसके नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त किया। एनआईए द्वारा केस अपने हाथ में लेने और बिहार में पीएफआई के सक्रिय सदस्यों के खिलाफ छापेमारी में जो तथ्य हाथ लगे उससे जांच का दायरा देश के कई राज्यों तक फैल गया। देशव्यापी कार्रवाई के दौरान पीएफआई की आतंकी संगठनों से साठगांठ व फंडिंग के पूरे नेटवर्क को खंगाला गया।

बिहार में पीएफआई भले ही 12 जुलाई को हुई कार्रवाई के बाद चर्चा में आया पर उसकी गतिविधियां लंबे समय से जारी थी। फुलवारीशरीफ थाने में पीएफआई की साजिश के मामले में 26 व्यक्तियों को नामजद किया गया है, उसमें एक को छोड़ बाकी बिहार के रहने वाले हैं। पीएफआई की गतिविधियां पटना तक सीमित नहीं थी। पूर्णिया, नालंदा, पूर्वी चंपारण, कटिहार, अररिया, मधुबनी, दरभंगा, मुजफ्फरपुर समेत कुछ अन्य जिलों तक इसका नेटवर्क फैला है। दूसरे राज्यों से जुड़े पीएफआई के बड़े नेता भी लगातार बिहार का दौरा कर रहे थे।

बिहार हेड है महबूब आलम नदवी

पीएफआई का राज्य मुख्यालय बिहार के पूर्णिया में है। कटिहार के हसनगंज थाना के रामपुर बंशीबारी का रहनेवाला महबूब आलम नदवी पीएफआई का बिहार प्रमुख है। बीते 22 सितम्बर को एनआईए की छापेमारी में वह टारगेट पर था पर बच निकला।

सिमी से भी जुड़े हैं तार

पीएफआई और उसकी सहयोगी संस्थाओं के तार प्रतिबंधित सिमी से जुड़े हैं। पीएफआई के शीर्ष नेतृत्व में भले ही केरल और कर्नाटक के ज्यादा लोग हैं पर नापाक मंसूबे को पूरा करने के लिए उसने सिमी से पूर्व सदस्यों को अपने साथ जोड़ रखा है। पटना पुलिस द्वारा गिरफ्तार अतहर परवेज ने पूछताछ में खुलासा किया था कि वह सिमी का सक्रिय सदस्य रहा है।

बिहार से अब तक 4 गिरफ्तार

पीएफआई मामले में बिहार से अब तक चार संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई है। फुलवारी के रहने वाले जलालुद्दीन, अतहर परवेज और अरमान मलिक के अलावा दरभंगा निवासी नुरूद्दीन जंगी को गिरफ्तार किया जा चुका है।

 

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