पिछले साल पटना में हुए जलजमाव ने  सरकार और प्रशासन की कितनी फजीहत करवाई थी वो सभी को पता है. इस साल फिर पटना में कही जलजमाव ना हो जाये इसे लेकर सरकार और विभाग की सांसें फूली हुई है. हर दिन नई बैठकें और तैयारियों को लेकर नये दावे किये जा रहे हैं. लेकिन, तारीख बीत जा रही है पर तैयारी पूरी नहीं हो पा रही है.  पटना को जलजमाव से बचाने को हो रहे दावे पर नौ दिन में चले ढाई कोस वाली कहावत सिद्ध हो रही है.


दरअसल पटना नगर निगम ने पहले तय किया कि 3 मई तक नाला सफाई के काम खत्म हो जाएगा, पर काम खत्म नहीं होने पर फिर से 10 मई तक बड़े नाले और 15 मई तक छोटे नाले सफाई का टारगेट रखा गया था. पर वो भी फेल हो गए. शुक्रवार को डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने बैठक कर 31 मई तक सभी नालों और मेनहोल की सफाई खत्म करने का निर्देश जारी किया है.

नगर विकास मंत्री से नहीं बनी बात तो डिप्टी सीएम ने संभाली कमान
नाला उड़ाही और सफाई का काम मानसून से पहले खत्म करने को लेकर नगर निगम और नगर विकास मंत्री के समीक्षा के बावजूद काम पूरा नहीं होने पर डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने बैठक कर कई बड़े फैसले लिए.सुशील मोदी ने 167 करोड़ से उच्चक्षमता के समर्सिबल पम्प खरीदने के निर्देश दिए. साथ ही 39 डीपीएस की रखरखाव की जिम्मेवारी एजेंसी को सौपने का निर्णय लिया.

पटना में बैठक करते हुए डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी

यह एजेंसी अगले 3 साल तक की जिम्मेवारी संभालेगी. 27 अस्थायी नए पम्पिंग स्टेशनों के निर्माण का भी फैसला डिप्टी सीएम ने लिया. डिप्टी सीएम ने निर्देश जारी करते हुए कहा कि सभी सामानों की खरीद और लगाने का काम 31 जुलाई तक खत्म हो जाना चाहिए.

मानसून आने से पहले तक नहीं हुआ काम खत्म तो पटना का डूबना तय
नगर निगम और नगर विकास विभाग के कामो की रफ्तार बताती है कि मानसून शुरू होने से पहले बड़े छोटे नालों की सफाई और उड़ाही के काम बड़ी चुनौती है. हालांकि नगर निगम के नये आयुक्त हिमांशु शर्मा का दावा है कि मानसून से पहले जलजमाव को रोकने की सभी तैयारी पूरी ली जाएगी. इसके लिए मजदूरों की संख्या दोगुनी कर और रातदिन काम कराया जा रहा है. मानसून आने में मुश्किल से 15 से 20 दिन बचे हैं. अगर 15 से 20 दिनों में कम पूरा नही हुआ तो इस साल फिर पटना के डूबना तय है.

Sources:-News18

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