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पटना के इन सरकारी school में आकर भूल जाएंगे LOYOLA, NOTRE DAME और DPS को

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बिहार के शिक्षा व्यवस्था की बात होती है तो सामने आती हैं बदहाल स्कूलों की तस्वीर। लेकिन ऐसे आलम में भी कुछ ऐसे सरकारी शिक्षण संस्थान मौजूद है जिनके आगे पटना के लोयला हाई स्कूल, नोट्रे डेम और दिल्ली पब्लिक् स्कूल जैसे निजी school की पढ़ाई की चमक भी फीकी पड़ जाएगी।

मास्टर साहब समझा रहे हैं। थोड़ा गुस्से में भी हैं। कह रहे हैं, ऐसे काम नहीं चलेगा। आप सबको बहुत मेहनत करनी होगी। सुनाई दे रहा है न। रॉल नंबर 2, 4, 5, 7, 8, 10, 11…कहां हैं आप लोग। आप लोग लगातार अनुपस्थित रहती हैं, जिसका असर रिजल्ट पर हुआ है। रॉल नंबर 9, 31, 34, 36 से सीखीए आप लोग। इनलोगों ने बढ़िया किया है। 60 प्रतिशत से ऊपर अंक लायी हैं। कुल 59 छात्राएं 45 से 59अंक गणित में लाई हैं। 23 छात्राएं औसत हैं और 21 छात्राएं 30 से कम अंक लायी हैं।

कुछ इसी अंदाज में गणित के शिक्षक रजनीश आर्य 10वीं कक्षा की छात्राओं के बीच रिजल्ट की समीक्षा कर रहे थे। दोपहर 12:30 बजे पटना सिटी के नारायणी कन्या उच्चतर विद्यालय का यह दृश्य तो एक उदाहरण भर है। कई और ऐसे सरकारी school हैं जहां छात्र-छात्राओं के गुणात्मक विकास को लेकर शिक्षक सचेत हैं और school का रिजल्ट बेहतर हो रहा है। ये सरकारी school कई मामलों में प्राइवेट स्कूलों को टक्कर दे रहे हैं।



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School के 86 प्रतिशत छात्र पास हुए

डॉ. जाकिर हुसैन हाई स्कूल सुल्तानगंज पटना सिटी में है। यह अल्पसंख्यक सरकारी विद्यालय है। मगर स्कूल की व्यवस्थाएं और पढ़ाई ऐसी है कि हर कोई तारीफ करता है।

इस वर्ष जब पूरे बिहार का रिजल्ट 52.32 फीसदी रहा, तब इस school का रिजल्ट 86.05 फीसदी रहा। स्कूल के कुल 380 छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए थे जिसमें 327 पास हो गए।




गणित-विज्ञान में 100 अंक

School के 10 छात्र-छात्राएं ऐसे हैं जो गणित में 100 अंक प्राप्त किए हैं। दूसरी तरफ 9 छात्र-छात्राएं ऐसे हैं जो विज्ञान में 100 अंक प्राप्त किए हैं। यहीं का एक छात्र अतहर इमाम इस बार जिला टॉपर की सूची में भी था। जिसने कुल 442 अंक प्राप्त किया था।

स्कूल के प्रिंसिपल नकी इमाम कहते हैं कि यह सब कुछ पढ़ाई के बेहतर माहौल के कारण हो रहा है। हमारे शिक्षक एक-एक बच्चों पर नजर रखते हैं। जो बच्चे कमजोर हैं, उनकी पहचान करके हमलोग अलग से उन्हें पढ़ाते हैं। छुट्टी के दिनों में भी वैसे बच्चों को बुलाकर पढ़ाया जाता है।




डॉ जाकिर हुसैन स्कूल में घुसते ही एक अलग माहौल दिखने लगता है। साफ-सफाई और अनुशासित कक्षाएं सबका ध्यान खींचती हैं। School में कुल 24 कमरें हैं । शौचालय और पीने की पानी की व्यवस्था भी बेहतर है। लेकिन इस हाई स्कूल में सिर्फ पांच सरकारी शिक्षक हैं जबकि करीब 1200 छात्र-छात्राएं हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए स्कूल की प्रबंध कमेटी की ओर से 20 प्राइवेट शिक्षक रखे गए हैं।

प्रिंसिपल कहते हैं कि किसी भी हाल में कक्षाएं बाधित न हो, इस पर हमलोग बहुत ध्यान देते हैं। सारे प्राइवेट शिक्षक भी बीएड हैं और कुछ एमएड भी। इनका वेतन अभिभावकों के आर्थिक सहयोग से दिया जाता है। मोहल्ले के जमालुद्दीन अहमद कहते हैं कि मेरी दो बेटियां यहां पढ़ती हैं। बेटियों की पढ़ाई से हमलोग खुश हैं। Schoolकी व्यवस्था बहुत अच्छी है। भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान की अलग-अलग प्रयोगशालाएं हैं।




प्रयोगशालाओं में लगभग सारे समान हैं। रूटीन के अनुसार बच्चों से प्रयोग कराए जाते हैं। मोहल्ले के मो.असरफ कहते हैं कि मेरा बेटा भी पढ़ता है। उसे कम्प्यूटर में बहुत मन लगता है और स्कूल में कम्प्यूटर लैब रोज खुलता है। असली बात है कि स्कूल के प्रिंसिपल अभिभावकों से लगातार मिलते रहते हैं और पढ़ाई कराने के लिए दवाब बनाए रखते हैं।




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School में गुणात्मक शिक्षा पर ज्यादा जोर

-नारायणी कन्या उच्चतर म.वि. विद्यालय के शिक्षकों की मेहनत रंग ला रही है

आजादी से पहले का स्कूल है नारायणी कन्या उच्चतर मा.वि.। लेकिन 1899 में स्थापित यह स्कूल अपनी पढ़ाई और व्यवस्था के कारण पूरे पटना सिटी में चर्चित है।

हाल के वर्षों में यहां के शिक्षक गुणात्मक शिक्षा पर जोर दे रहे हैं और स्कूल का रिजल्ट बढ़िया हो रहा है। पिछले तीन साल से रिजल्ट लगातार बढ़िया हो रहा है। इस वर्ष 19 लड़कियां मैट्रिक की परीक्षा में गणित विषय में 100 अंक लायी हैं।




पिछले साल भी टॉपर लिस्ट में

2015 में यह इस स्कूल का रिजल्ट सिर्फ 54 फीसदी था लेकिन 2017 में 59 फीसदी रहा। स्कूल की प्रिंसिपल कुमारी माया कहती हैं कि इस साल पूरे बिहार का रिजल्ट बहुत अच्छा नहीं रहा। बावजूद मेरे स्कूल का रिजल्ट पिछले साल की तुलना में अच्छा रहा। 2016 में भी जिला टॉपर लिस्ट में मेरी school की बेटी तीसरी टॉपर थी।

हमलोग लगातार आगे बढ़ रहे हैं। मेरी बच्चियां अनुशासित हैं और शिक्षक बहुत मेहनती। शिक्षक रजनीश आर्य कहते हैं कि हमलोग एससीईआरटी से जुड़े हुए हैं। हमलोग ट्रेनिंग में रेगुलर रहते हैं और जो कुछ वहां गुणात्मक शिक्षा के लिए बताया जाता है, हमलोग स्कूल में आकर उतारते हैं।




मुमताज आलम कहते हैं कि प्रत्येक शिक्षक लगातार अपनी बच्चियों की पढ़ाई की समीक्षा करते हैं। जो ज्यादा कमजोर दिखती हैं, उन पर ज्यादा मेहनत करते हैं।

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शिक्षक कम मगर बाधा नहीं

School में कुल 28 शिक्षकों का पद है, लेकिन फिलहाल सिर्फ 16 शिक्षक ही हैं। जबकि एक कक्षा में आठ-आठ सेक्शन हैं। लेकिन प्रिंसपल कहती हैं कि कमी तो हर जगह है, लेकिन रोना रोने से क्या फायदा। जितना है उसी में हम बेहतर करने की कोशिश कर रहे हैं। कम शिक्षकों के कारण परेशानी जरूर है, लेकिन हमारे यहां के शिक्षक बहुत मेहनती हैं। जैसे गणित के शिक्षक एक साथ तीन-तीन सेक्शन की बच्चियों को बैठाकर पढ़ाते हैं।




एक हॉल में 100-150 बच्चियां बैठती हैं। एक कक्षा खत्म करने के बाद दूसरी कक्षा में जाकर भी इसी तरह पढ़ाते हैं। हमारे शिक्षक लगातार चार-चार घंटियां पढ़ाते हैं। कचौड़ी गली की रहनेवाली और स्कूल की छात्रा सुनिता कुमारी कहती है कि हमारे स्कूल में भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान की अलग-अलग प्रयोगशालाएं हैं और सप्ताह में तीन दिन प्रैक्टिल होता है। लाइब्रेरी भी है और लाइब्रेरियन भी हैं। हमलोगों के लिए जिम भी है।

स्कूल सरकारी है, लेकिन उसमें अपनी बेटियों के नामांकन के लिए अभिभावक परेशान रहते हैं। बात जिले के धनरुआ प्रोजेक्ट श्यामता देवी कन्या उ.म.वि. की हो रही है। यहां नौवीं कक्षा में नामांकन के लिए खूब भीड़ होती है। इस इलाके का एकमात्र कन्या विद्यालय है, जो अपने अनुशासन के लिए जाना जाता है। रिजल्ट भी ठीक-ठाक रहता है।




School की प्रिंसिपल हैं मधु कुमारी। ये कहती हैं कि हमारे शिक्षक बहुत मेहनत करते हैं। लेकिन ग्रामीण इलाका होने के कारण छात्राओं की उपस्थिति थोड़ी कम रहती है। पिछले साल तो मेरे स्कूल का रिजल्ट बहुत खराब रहा। जो छात्राएं पढ़ने में थोड़ी ठीक थीं, वे भी कोचिंग चली जाती थी। रिजल्ट खराब होने के बाद मैंने एक मीटिंग की।

इसके बाद यह निर्णय लिया गया कि कोचिंग संस्थानों को चेतावनी देना जरूरी है। हमने कम उपस्थिति वाली छात्राओं को घर पर नोटिस भेजा। साथ-साथ इलाके सभी कोचिंग संस्थानों को भी नोटिस दिया कि school समय में कोचिंग न चलाएं। अगर नहीं मानेंगे तो एफआईआर तक कराएंगे। तब जाकर कोचिंग वाले अपना टाइम टेबल बदले। और इस साल पिछले की तुलना में अच्छा रिजल्ट हुआ। हमारी छात्रा नीतू तो 440 नंबर लायी। नेहा गणित में 100 अंक लायी।




धनरुआ पंचायत की मुखिया संगीता देवी कहती हैं कि स्कूल का भवन छोटा है, लेकिन स्कूल का अनुशासन बहुत बढ़िया है। शिक्षक भी मेहनती हैं। इसीलिए अभिभावक इस स्कूल में नाम लिखवाने के लिए परेशान रहते हैं। पूरे पंचायत में यही एक school है जहां बेटियों के नाम लिखवाने के बाद अभिभावक बहुत खुश होते हैं।



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