पटना पर छायी धूल व धुएं की धुंध, प्रदूषण से हुआ दिल्ली जैसा हाल

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पटना: दिल्ली के बाद पटना पर भी धूल और धुएं का धुंध (स्मॉग) छाया हुआ है। आसमान में अहले सुबह से धुंध छा रही है और धूल आसमान में नहीं बिखर रहा है। इस कारण लगातार बढ़ रहा प्रदूषण हमें बीमार बना रहा है। धुंध सुबह में हल्की रह रही है और दिन शुरू होते ही वह पूरी तरह साफ हो जा रही है।

हालांकि बुधवार को स्थिति इससे उलट रही। बुधवार को यह स्मॉग दिन भर छाया रहा। अहले सुबह ही तफरीह और स्वच्छ हवा के लिए निकलने वाले लोगों को स्वच्छ हवा नहीं मयस्सर हो रही है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के नवंबर के पांच दिनों के हीआंकड़े पर भरोसा करें, तो पता चलता है कि यहां की भी आबोहवा खराब है। दो से छह नवंबर का आंकड़ा कह रहा है कि एयर क्वालिटी इंडेक्स 234 से लेकर 282 तक दर्ज किया गया है। यह क्वालिटी बदतर कैटेगरी का है जो सांस लेने की हवाओं के पैमाने पर कहीं खड़ा नहीं होता है।

जनवरी से ज्यादा प्रदूषित नवंबर के शुरुआती दिन : एयर क्वालिटी के मानकों के मुताबिक हवा में पार्टिकुलेटेड मैटर 2।5 की मात्रा 60 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर होनी चाहिए, ट्रांसपोर्ट 20% लकड़ी जलावन 20% ईंट भट्ठे 20% ठोस कचरा 14% इंडस्ट्री 9% जेनरेटर व रोड डस्ट 7% कंस्ट्रक्शन एक्टीविटिज व अन्य 10% एयर क्वालिटी इंडेक्स दो नवंबर 234 तीन नवंबर 230 चार नवंबर 282 पांच नवंबर 247 छह नवंबर 249 आने वाले दिनों में स्थिति और खराब होगी जनवरी के बाद प्रदूषण का लेवल सर्वाधिक बढ़ा हुआ है। आप देखिये कि एयर क्वालिटी इंडेक्स नवंबर के शुरूआती हफ्ते में ही 280 तक चला गया है जबकि अभी तापमान भी बहुत ज्यादा कम नहीं है। तापमान जैसे ही और कम होगा धूल आसमान में फैल नहीं पायेगा और आने वाले दिनों में स्थिति और खराब होगी। अंकिता ज्योति, सीनियर प्रोग्राम अफसर, सेंटर फॉर इन्वॉयरमेंट  एंड एनर्जी डेवलपमेंट

गा़ड़ियों का प्रदूषण सबसे बड़ा कारण बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का अध्ययन कहता है कि पटना की हवा में पर्टिकुलेट मैटर (पीएम 2।5 और पीएम 10) की मात्रा तय मानक से ज्यादा है। इसका कारण गाड़ियों से निकलने वाला धुंआ, धुल और ईंट भट्टा है। इस प्रदूषण के कारण दमा, कैंसर और सांस की बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ये धूलकण आसानी ने सांस के साथ शरीर के अंदर जाकर गले में खरास, फेफड़ों को नुकसान, जकड़न पैदा करते हैं।

स्मॉग से होने वाली स्वास्थ्य हानि डॉक्टरों के मुताबिक स्मॉग का बच्चों और सांस की बीमारी के मरीजों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। स्मॉग में छिपे केमिकल के कण अस्थमा के अटैक की आशंका को और ज्यादा बढ़ा देंगे। इसके अलावा कई लोगों को आंखों में जलन और सांस लेने में तकलीफ भी हाेती है। ब्रोंकाइटिस यानी फेफड़े से संबंधित बीमारी के मामले बढ़ जाते हैं। स्मॉग के चलते फेफड़ों की क्षमता भी कम हो सकती है। दिल के मरीजों को भी स्मॉग से खतरा है। आमतौर पर स्मॉग का असर दोपहर बाद या फिर शाम में देखा जाता है जब सूरज की गर्मी मौजूद हो लेकिन जाड़े के दिनों में अगर वातावरण में हवा की कमी हो जाए तो स्मॉग सुबह से लेकर शाम तक भी रह सकता है।

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