बैंड बाजा बारात .. शादी में ना हो तो शादी शादी जैसी लगती ही नहीं! और जब बिहार की बात आए तब तो बिना बाराती डांस के भैया कैसी शादी? लेकिन जब भी हम बैंड बाजा की बात करते हैं तब याद आता रंग बिरंगे कपड़ों में पुरुषों को टोली. लेकिन कभी आपने सोचा है साड़ी पहने औरतों की टोली जो बैंड बजाती हो. अरे चौंकिए मत .. ऐसा अनोखा बैंड है हमारे बिहारी की राजधानी पटना में ही. बैंड का नाम सरगम बैंड.

बैंड में सभी महिलाओं की उम्र तीस वर्ष की है. बैंड में दस महिलाओं का समूह है. ये राजधानी से हटकर बसे छोटे से गांव धीबरा की दलित महिलाएं हैं. इनका यह प्रयास ना सिर्फ सराहनीय है बल्कि समाज में एक मिसाल भी है. अक्सर ही ये महिलाएं गांव से दूर जाकर रात भर बैंड बजाती हैं. समुदाय की ज्यादातर महिलाएं पेशे से खेतों में काम या मजदूरी करती हैं.

नारी गूंज नाम की एनजीओ की संचालक सुधा वर्गीस ही इस बैंड की अगुवाई भी करती हैं. उनके लिए आसान नहीं मजदूर महिलाओं को बैंड से जोड़ पाना. मगर उनके निरंतर प्रयास से महिलाएं इससे जुड़ती चली गई और इस तरह से पटना की इन महिलाओं का बैंड काफी मशहूर हो चला.

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