बिहार की राजधानी पटना में सुशोभित एक अदभुत ऐतिहासिक केंद्र है, पटना का जादू घर, “पटना संग्राहलय” बिहार की गौरव गाथा का साक्ष्य

जानकारी

पटना संग्राहलय, जिसे जादू घर के नाम से भी जाना जाता है| यह विशालकाय संग्राहलय बिहार की राजधानी पटना में सुशोभित एक अदभुत ऐतिहासिक केंद्र है| इसका निर्माण सन् 1917 में अंग्रेजी शासनकाल के दौरान करवाया गया था| बिहार का यह विशाल संग्राहलय, मुगल-राजपूत वास्तुशैली में निर्मित बिहार की बौद्धिक समृद्धि का प्रतीक माना जाता रहा है।

यह सबूत है बिहार के विविधता का, कि पाटलिपुत्र की धरती कितनी अहम् है इतिहास के दृष्टिकोण से| पटना जंक्शन से महज 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है| इसका निर्माण इस दृष्टिकोण से करवाया गया था, ताकि पटना और आसपास पाई गई ऐतिहासिक वस्तुओं को आसानी से सुरक्षित और संग्रहित किया जा सके। यहाँ भवन के केंद्र पर आकर्षक छतरी, चारों कोनों पर गुंबद और झरोखा शैली की खिड़कियां इसकी विशिष्टताएं हैं।

प्राचीन भारत युग से वर्ष 1764 तक कलाकृतियों को बिहार संग्रहालय में रखा गया है तथा वर्ष 1764 के बाद के अवयव पटना संग्रहालय में रखे गए हैं। पटना संग्रहालय व जादू घर में 2300 साल पुरानी दीदारगंज यक्षी मूर्तिकला को भी संरक्षित रखा गया है| विशेषगयों तथा जानकारों के अनुसार वर्ष 1912 में बंगाल से बिहार के विभाजन उपरांत एक संग्रहालय की आवश्यकता महसूस की गई थी।

तब तत्कालीन गवर्नर चार्ल्स एस बेली की अध्यक्षता में बिहार और उड़ीसा (Odisa) सोसाइटी की बैठक में बिहार के लिए एक प्रांतीय संग्रहालय स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया था जिसे सर्वसम्मति से पारित किया गया। तत्पश्चात तत्कालीन गवर्नमेंट हाउस जिसे आज का मुख्य न्यायाधीश(Chief Justice) के आवास में 20 जनवरी 1915 को संग्रहालय की स्थापना की गई थी।

जिस भवन में अभी संग्रहालय है उस भवन में संग्रहालय एक फरवरी 1929 में लाया गया था तथा 7 March को बिहार-उड़ीसा के तत्कालीन गवर्नर सर लैंसडाउन स्टीदेंसन ने संग्रहालय का उद्घाटन किया।

यहाँ बिहार के दुर्लभ संसाधनों को संग्रह करके रखा गया है। संग्रहालय नव पाषाणकालीन पुरावशेषों और चित्रों, पांडुलिपियों, पत्थर, खनिज, दुर्लभ सिक्कों, और तोप एवं शिशो की कलाकृतियों से समृद्ध है। वैशाली में लिच्छवियों द्वारा भगवान बुद्ध की मृत्यु के बाद बनवाए गए, प्राचीनतम मिट्टी के स्तूप से प्राप्त बुद्ध के दुर्लभ अस्थि अवशेष वाली कलश मंजूषा भी मौजूद है|

वृक्ष का जीवाश्म संग्रहालय में हजारों साल पुराने चीड़ के एक वृक्ष का जीवाश्म भी यहां रखा हुआ है, जिसे देखने के लिए विदेश से भी लोग प्रायः आते रहते हैं। यहाँ रात में फ़ैली बल्बों की रौशनी भवन को अति मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करती है| यहाँ आसानी से आप बहुत की कम खर्च में ज्यादा आनंद उठा सकते हैं|

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