परीक्षाओं में धांधली रोकने के लिए बीपीएससी का नया प्रयोग, एग्जाम सेंटर पर ही छपेगा पर्चा लेकिन…

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बिहार में परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक को रोकने की कवायद में BPSC नया पैटर्न अपनाने जा रहा है। आयोग आगामी प्रोजेक्ट मैनेजर परीक्षा में एक नया प्रयोग करेगा। परीक्षा के तत्काल पूर्व में एग्जाम सेंटर पर ही प्रश्न पत्र की प्रिंटिंग की जाएगी। यह परीक्षा 22 व 28 अक्टूबर को होनी है। इसमें करीब 38 पद हैं। दो परीक्षा केंद्र बनाए हैं। परीक्षा में कुल 880 अभ्यर्थी शामिल होंगे।

बीपीएससी के अध्यक्ष अतुल प्रसाद ने बड़ा एलान किया है। उन्होंने कहा है कि इस परीक्षा में प्रिंटर को भी नहीं पता होगा कि क्या प्रश्न आयेगा। मल्टीपल सेट का चयन परीक्षा के दिन ही किया जाएगा। परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों के समक्ष ही सील खोले खोले जाएंगे। अभ्यर्थियों के समक्ष ही प्रश्न पत्रों की प्रिंटिंग होगी। यह प्रयोग अगर सफल हुआ तो आगे की परीक्षा में भी इसी पद्धति का प्रयोग किया जाएगा। सभी सेंटर पर प्रिंटर मशीन से प्रश्न पत्र की छपाई की जाएगी।

68वीं बीपीएससी परीक्षा में बदल सकता है पैटर्न

बिहार लोक सेवा आयोग आगामी 68वीं BPSC सिविल सेवा परीक्षा में भी बदलाव करने जा रहा है। आयोग की ओर से मार्किंग स्कीम में बदलाव किया जाएगा। पीटी में डेढ़ सौ प्रश्न पूछे जाएंगे। इसमें 50 प्रश्न कठिन होंगे। इसके लिए अधिक अंकों का निर्धारण किया जाएगा। इसमें सेक्शन वाइज कठिन प्रश्न पूछे जाएंगे। इसकी अलग श्रेणी होगी। इसकी पहचान के लिए अलग से स्टार या कुछ पहचान चिन्ह दिया जाएगा। इसके लिए 2 अंक निर्धारित होंगे।

आयोग ने जो तय किया है उसमें कठिन प्रश्नों में निगेटिव मार्किंग होगी। शेष 100 प्रश्नों में निगेटिव मार्किंग नहीं होगी। इसे पीटी परीक्षा में लागू किया जाएगा। लिखित परीक्षा में भाषा के पेपर को छोड़कर बाकी में मीडियम बदलने का मौका मिलेगा। बीपीएससी की तमाम परीक्षाओं में कठिन प्रश्न पूछे जाएंगे।

नॉर्मलाइजेशन पर  ली जाएगी छात्रों की राय

बिहार लोक सेवा आयोग 68 वीं सिविल सेवा की परीक्षा के आवेदन के समय ही स्कोर स्केलिंग प्रक्रिया के बारे में जानकारी लेगा। आवेदन के समय छात्रों को ऑप्शन दिया जाएगा। रिजल्ट नॉर्मलाइजेशन स्कोर के आधार पर जारी किया जाए या पूर्व की तरह जारी किया जाए। आवेदन करते समय छात्रों को दिए गए ऑप्शन में छात्रों के मत पर तय किया जाएगा। आवेदन के समय छात्रों को भरना अनिवार्य होगा। आयोग इसी आधार पर तय करेगा कि आम छात्रों की क्या सहमति बनती है। इसके बाद ही आयोग निर्णय लेगा कि नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया अपनायी जाएगी या नहीं।

 

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