पटना का ये Palace है 100 साल से भी ज्यादा पुराना, अंग्रेज भी थे दीवाने

इतिहास

पटना के डाकबंगला पर शान से खड़ा किलानुमा इमारत रिजवान कैसल 100 साल से भी अधिक पुरानी है। ब्रिटिश-स्कॉटिश शैली में बनी इस palace ने 1912 में ऐतिहासिक कांग्रेस अधिवेशन के मेहमानों की मेजबानी की थी।

इस palace का निर्माण सैयद हसन इमाम ने कराया था जो नामी वकील थे। उन्होंने यह जमीन मशहूर स्वतंत्रता सेनानी मजहरूल हक से खरीदी थी।
सन् 1912 ई0 में पटना में हुए ऐतिहासिक कांग्रेस अधिवेशन में इस किले ने कई महत्वपूर्ण मेहमानों की मेजबानी भी की थी।

इस किले के मालिक सैयद हसन इमाम अपने वक्त के मशहूर अधिवक्ता और स्वतंत्रता सेनानी थे। इंगलैंड में पढ़ाई पूरी करने के बाद वे कलकत्ता हाईकोर्ट में 1916 तक जज रहे।

1916 में जब पटना हाईकोर्ट का गठन हुआ तो उन्होंने अपना तबादला पटना करवाना चाहा। किन्तु ब्रिटिश सरकार ने उनका तबादला नहीं किया। नाराज हो उन्होंने नौकरी छोड़ दी थी।

पिछली सदी के दूसरे दशक में इन्डो-ब्रिटिश आर्किटेक्चर के मशहूर विशेषज्ञ फिलिप डेविस अपने शोध के क्रम में पटना आये थे। उन्होंने अपनी पुस्तक ‘ब्रिटिश आर्किटेक्चर इन इंडिया, 1660-1947’ में रिजवान कैसल के बारे में लिखा है-पटना के बाहर बांकीपुर में गोथिक शैली में बनी एक शानदार इमारत (किला) है।

इस palace में मुंडेर, बाहर की ओर निकले टावर, उसमें बनी सीढ़ियां और बाहर से ढ़की धुनषाकार खिड़कियां है। प्रवेश द्वार पर बना खूबसूरत पोर्टिको की संरचना न तो पूरी तरह यूरोपियन है और न ही हिन्दुस्तानी।

ये कला का एक अद्भुत नमूना है। हालांकि आज ये कैसल अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।

लेकिन कभी इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आते थे।

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