नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से फाउंडेशन कोर्स में ग्रेजुएशन करने वाली पूजा पुष्प कहती हैं, जब मैं सातवीं कक्षा में थी, तभी मैंने सोच लिया था कि मुझे फैशन इंडस्ट्री में ही जाना है और उसी में अपना कैरियर बनाना है.

 देवघर से निफ्ट पटना आना सपने जैसा था. घर की माली हालत सही नहीं थी. पापा सिक्याेरिटी कंपनी में सुपरवाइजर का काम करते थे. घर में हर वक्त दिक्कत रहती थी, क्योंकि आर्थिक हालात निम्नवर्गीय स्तर के थे. मेरी स्टडी को पूरा कराना, उनके लिए संभव नहीं था.  उसके अलावा मेरे दो छोटे भाई भी थे.
उनकी पढ़ाई को लेकर भी पापा को टेंशन रहता था. इसके अलावा  घर के दूसरे रिश्तेदारों का तरह-तरह का कटाक्ष. पेरेंट्स का मनोबल बढ़ाने के लिए उन्होंने कभी भी काम नहीं किया. वह मुझसे तो कुछ नहीं कहते थे, लेकिन मेरे पेरेंट्स को हमेशा कहते थे कि लड़की को पढ़ने के लिए पटना भेज दिये. जब ऑस्ट्रेलिया गयी तो भी उनकी अलग कहानी थी. तब वह कहते थे, पहले पटना भेजा अब अकेली लड़की ऑस्ट्रेलिया जा रही है. इस इंडस्ट्री में आने वाली अपने परिवार की मैं पहली लड़की थी. निफ्ट पटना के निदेशक प्रो संजय श्रीवास्तव कहते हैं कि पूजा की पहचान शुरू से ही एक मेधावी छात्रा की रही थी.
हर सेमेस्टर की टॉपर में उसका नाम शामिल होता था. ऑस्ट्रेलियन सरकार द्वारा दी जाने वाली स्कॉलरशिप के लिए वह पूरे देश से चुने जाने वाली एकमात्र निफ्ट की छात्रा थी. इसमें 11 हजार डॉलर के साथ ही क्विंसलैंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी में स्टडी का मौका था, वहां पर भी उसने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और डिस्टिंक्शन हासिल किया. वह निफ्ट पटना की गोल्ड मेडलिस्ट भी रह चुकी है.
पूजा कहती हैं कि ऑस्ट्रेलिया में स्टडी के दौरान मैंने मेहंदी लगाने का भी काम किया, जिससे मुझे अतिरिक्त आय हुई. स्टडी को जारी रखने के लिए बहुत मेहनत किया. रुपये का महत्व जानती थी तो स्कॉलरशिप में जो पैसे मिले, उसमें से भी कुछ पैसों को बचा के लेकर चली आयी.
पटना में रहने के दौरान कई एनजीओ के लिए शो भी किया. उससे भी कुछ आय होती रही. जारा, एस्प्रिट, सुपर ड्राइ, टॉरी बर्च, गेस, गैप जैसी बड़ी कंपनियों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के बाद पूजा अभी बेंगलुरु की फेमस एक्सपोर्ट कंपनी के मोहन एक्सपोर्ट्स में काम कर रही हैं.

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