घर से छठ घाट तक दंडवत कर पहुंचती हैं एवरेस्ट फतह करने वाली पद्मश्री संतोष यादव

आस्था

पटना:  पद्मश्री सम्मान से सम्मानित महिला पर्वतारोही संतोष यादव लगातार तीसरे साल छठ व्रत करने मुंगेर पहुंचीं हैं। मुंगेर के बबुआ घाट में दो वर्षों से पूरी आस्था और विश्वास के साथ आमव्रतियों की तरह छठ कर रही संतोष यादव के मुताबिक छठ व्रत से आध्यात्मिक ऊर्जा प्राप्त होती है। एवरेस्ट विजेता संतोष यादव का मुंगेर के गुलजार पोखर मोहल्ला में ससुराल है।

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हरियाणा के रेवाड़ी जिले के जोनियावास गांव में पैदा हुई संतोष यादव ने 1992 में एवरेस्ट फतह किया। उन्होंने बताया कि आंतरिक ऊर्जा के कारण ही वे एवरेस्ट फतह करने में कामयाब हो पायीं। मुंगेर के गुलजार पोखर निवासी उत्तम कुमार को जीवन साथी बनाने के बाद मुंगेर और बिहार से उनका अटूट रिश्ता बन गया। इसके बाद छठ पर्व को उन्हें करीब से जानने-समझने का मौका मिला। छठ पर्व की पवित्रता और लोगों में निष्ठा को देख कर वे काफी प्रभावित हुईं। उनके मन में भी छठ पर्व करने की प्रेरणा आई।

दो साल से वे पूरी नियम और निष्ठा के साथ मुंगेर में छठ पर्व कर रही हैं। तीसरी बार छठ पर्व करने के लिए मुंगेर पहुंची संतोष यादव अधिकतर बिहार से बाहर ही रहती हैं। संतोष यादव बिल्कुल आम व्रतियों की तरह ही बबुआ घाट पर भगवान भाष्कर की उपासना करती हैं। घर से छठ घाट तक वे दंड देती हुई पहुंचती हैं। किसी को यह पता नहीं चल पाता कि उनके सामने से एवरेस्ट विजेता संतोष यादव जा रही हैं। घर पर पूजन सामग्री तैयार करने में भी पद्मश्री विजेता पूरा हाथ बंटाती हैं।

 

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