OMG! आबादी से ज्यादा लोगों को कोरोना टीका की दूसरी खुराक, फर्स्ट डोज 100 प्रतिशत तो सेकेंड डोज 101 प्रतिशत

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बिहार के मुजफ्फरपुर में स्वास्थ्य विभाग का अजीबोगरीब कारनामा उजागर हुआ है। जिले में  हवा-हवाई कोरोना टीकाकरण का खुलासा हआ है। संख्या बढ़ाने के लिए आबादी से अधिक लोगों को दूसरी डोज दे दी गई है। सरैया, कटरा, मोतीपुर और मुरौल में यह मामला सामने आया है। इन प्रखंडों में कोरोना टीके की दूसरी डोज देने की संख्या 100 प्रतिशत से अधिक है। सरैया में 15 से 18 वर्ष के 101 प्रतिशत किशोरों को कोरोना टीके की दूसरी डोज लगा दी गई। सरैया प्रखंड में 12 हजार 597 लोगों को दूसरी डोज देने का समय पूरा हुआ था, लेकिन प्रखंड से 12 हजार 805 लोगों को कोरोना टीके की दूसरी डोज देने की रिपोर्ट तैयार कर भेजी गई। इसी तरह मुरौल में 12 से 14 वर्ष के 110 प्रतिशत बच्चों को दूसरी डोज की रिपोर्ट तैयार की गई है। मुरौल में 4949 बच्चों को टीके की दूसरी डोज दी जानी थी, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार 5469 बच्चों को दूसरी डोज लगा दी गई। कटरा में भी 4451 की जगह 4580 बच्चों को टीके की दूसरी डोज देने की रिपोर्ट दी गई। मोतीपुर में 30 अगस्त तक कोरेाना टीके की दूसरी डोज दो लाख 27 हजार 259 लोगों को देनी थी, लेकिन टीकाकरण रिपोर्ट के अनुसार दूसरी डोज दो लाख 37 हजार 684 लोगों को दी गई।

हेल्थ वर्कर 479, टीका लगा 538 को

हेल्थ वर्करों को टीका देने की रिपोर्ट में भी गड़बड़ी सामाने आई है। मुरौल में 479 हेल्थ वर्करों ने कोरेना टीके की दूसरी डोज ली थी, इन्हीं वर्करों को प्रिकॉशन डोज दी जानी थी, लेकिन मुरौल में 538 हेल्थ वर्करों को टीका दे दिया गया। मुरौल के अलावा मोतीपुर में 1198 हेल्थ वर्करों की जगह 1326 हेल्थ वर्करों को कोरेाना टीके की तीसरी डोज लगाने की रिपोर्ट बनाई गई।

क्या कहते हैं अधिकारी

टीकाकरण में अगर गड़बड़ी आई है तो उसे दिखवाया जायेगा। जांच कराई जाएगी और  जिसने भी ऐसी गलती की होगी, उस पर सख्त कार्रवाई की जायेगी। सभी पीएचसी से इसका पता लगाया जायेगा। -डॉ. उमेश चंद्र शर्मा, सिविल सर्जन

लक्ष्य पूरा करने के लिए कर रहे गलत इंट्री

स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों ने बताया कि डाटा ऑपरेटरों को टीकाकरण पूरा करने के लिए एक लक्ष्य दिया जाता है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए ऑपरेटर पोर्टल पर गलत रिपोर्ट डाल देते हैं। इससे जिन लोगों को टीका नहीं लगा होता है, उनका नाम भी चढ़ जाता है। ऑपरेटर पहले पहली डोज से लोगों के नाम मिलाते हैं, इसके बाद जिन लोगों को टीका लेने की तारीख नजदीक होती है, उनके नाम को पोर्टल पर चढ़ा देते हैं।

पहले भी पकड़ में आ चुकी है गड़बड़ी

कोरोना की तीसरी लहर में टीकाकरण के दौरान फर्जी लोगों के नाम पर इंट्री करने का मामला सामने आ चुका है। जनवरी में जिन लोगों को टीका नहीं लगा था, उनके नाम पर भी टीकाकरण कर दिया गया था। इसका खुलासा तब हुआ, जब लोगों को मोबाइल पर मैसेज आये। इसके बाद तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. विनय कुमार शर्मा ने कार्रवाई करते हुए टीकाकरण में काम करने वाले ऑपरेटरों को हटा दिया था। मुशहरी के अलावा बोचहां और कांटी से भी ऐसे मामले सामने आये थे।

 

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