MP-MLA को सम्मान दें अधिकारी, CM ने दिया आदेश, नहीं देने वाले नपेंगे

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Patna: बिहार में जनप्रतिनिधियों का सम्मान नहीं करने वाले अधिकारी नपेंगे. सरकार ने इसको लेकर पत्र जारी कर दिया है. पत्र की प्रतिलिपि बिहार के मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी समेत सभी विभाग के सचिव को भेज दी गयी है. जिसमें साफ निर्देश दिया गया है कि एमएलए-एमपी को “सचिव” से ऊपर स्थान होना चाहिए. अगर कोई एमएलए-एमपी किसी अधिकारी से मिलने जाएंगे तो उन्हें सचिव स्तर के अधिकारी खड़े होकर उनका सम्मान करेंगे, इतना ही नहीं शिष्टाचार दर्शाते हुए उऩ्हें बाहर गेट तक आकर छोड़ना होगा.

सामान्य प्रशासन विभाग के प्रधान सचिव चंचल कुमार ने इस संबंध में पत्र लिखा है. पत्र में सभी अधिकारियों को सांसद एवं विधायकों के साथ कार्य व्यवहार में मूल सिद्धांतों को पालन करने की सलाह दी है. पत्र में कहा गया है कि सभी सरकारी सेवक सांसदों एवं विधायकों के साथ विनम्रता तथा शिष्टाचार का बर्ताव करें. सांसदों एवं विधायकों की बातों को धैर्य पूर्वक सुनें एवं उनपर ध्यान पूर्वक विचार करें. प्रत्येक सरकारी सेवक को सांसदों एवं विधायकों को उनके संवैधानिक कार्यों के संपादन में यथासंभव सहायता करनी चाहिए. यदि किसी सदस्य के अनुरोध अथवा सुझाव को मानने में असमर्थता है तो उसे विनम्रता पूर्वक स्पष्ट करें.

पत्र में आगे कहा गया है कि यदि कोई सांसद या विधायक उनसे मिलने के लिए आते हैं तो उन्हें प्राथमिकता दें. बिना समय लिए मिलने आए संसद सदस्य या विधायक को अपरिहार्य कारणों से तुरंत मिलना संभव न हो तो विनम्रता पूर्वक स्थिति से अवगत कराएं. इसके साथ ही उनके परामर्श से मिलने का समय शीघ्र निर्धारित करें. प्रतिक्षा अवधि में सदस्यों की सुविधाजनक ढंग से बैठने की व्यवस्था की जानी चाहिए. संसद सदस्य तथा राज्य विधान मंडल के सदस्य (सांसद-विधायक) के मिलने आने पर पदाधिकारियों को अपने स्थान से उठकर उनका स्वागत करना चाहिए. इसके साथ ही जाते समय भी उनके प्रति सम्मान प्रदर्शित करते हुए विदा करना चाहिए.

सामान्य प्रशासन विभाग ने कहा है कि सांसदों के लिए वारंट ऑफ़ प्रेसिडेंट में स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया है. उन्हें ‘सचिव’ से ऊपर रखा गया है. ऐसे में राज्य में आयोजित राजकीय समारोह या बैठकों में संसद सदस्य अगर आमंत्रित किए जाते हैं तो उनके बैठने का स्थान राज्यपाल, मुख्य न्यायाधीश के तुरंत बाद करना होगा. साथ ही सचिव से आगे रखना होगा. जहां सांसद एवं विधायक दोनों आमंत्रित हो, वहां राज्य विधान मंडल के सदस्यों का स्थान संसद सदस्यों के तुरंत बाद रखा जाना चाहिए. यदि सांसद देर से आते हैं तो ऐसी स्थिति में आरक्षित सीटों को अंत तक खाली रखें.

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