बाढ़-सूखा-बीमारियों से मरने पर अब मछलीपालकों को मिलेगा बीमा का लाभ, बिहार में नया नियम लागू

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Patna: बाढ़, सुखाड़, बीमारी सहित प्राकृतिक आपदा में मछली के मरने या उत्पादन कम होने पर मछलीपालकों को क्षतिपूर्ति मिलेगी। लंबे इंतजार के बाद राज्य में वित्तीय वर्ष 2020-21 से मछली बीमा योजना लागू की जा रही है। बीमा कंपनी का चयन कर करार हो चुका है। मछली बीज और तैयार मछली दोनों में ही 80 प्रतिशत से अधिक नुकसान होने पर मछलीपालकों को क्षतिपूर्ति मिलेगी।

इससे राज्य के 5 लाख से अधिक मछलीपालकों को लाभ मिलेगा। मछली बीमा योजना से बिहार में मछली उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगा। नेशनल इंश्योरेंस कंपनी के माध्यम से बीमा होगा। प्रीमियम राशि की 50 प्रतिशत मछलीपालकों को देना होगा। शेष 50 प्रतिशत राशि सरकार देगी। क्षति का आकलन कर बीमा राशि मछलीपालक लाभुक किसान के बैंक खाते में दी जाएगी। उत्तर बिहार में हर साल बाढ़ से 5 हजार करोड़ तक मछली बहने से क्षति होती है। बीमा योजना लागू होने पर बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के मछलीपालकों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

बीमा तीन कैटेगरी में होना है। नर्सरी, तालाब में मछली और हैचरी। नर्सरी के लिए प्रीमियम दर 36 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर है। इसमें 18 प्रतिशत जोड़ने के बाद यह राशि 42,480 रुपए होगी। इसमें 50 प्रतिशत यानी 21,240 रुपए प्रीमियम मछलीपालक को और इतनी ही राशि सरकार देगी। इसी तरह तालाब में सामान्य मछली के लिए प्रीमियम दर 48 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर होगा। इसमें 18 प्रतिशत जीएसटी जोड़ने के बाद यह राशि 56,640 रुपए होगी। यानी 50 प्रतिशत प्रीमियम 28,320 रुपए मछलीपालक और इतनी ही राशि सरकारी प्रीमियम के रूप में देगी।

हैचरी के लिए प्रति हेक्टेयर 52 हजार रुपए है। इसमें 18 प्रतिशत जीएसटी जोड़ने के बाद राशि 61,360 रुपए होगी। इसमें 50 प्रतिशत प्रीमियम राशि यानी 30,680 रुपए मछली पालक और इतनी ही राशि सरकार देगी। कितने सप्ताह की मछली या मछली बीज का नुकसान है, इसका आकलन कर क्षतिपूर्ति भुगतान का प्रावधान किया गया है। यह राशि एक लाख से चार लाख रुपए तक होगी। इसके पहले वर्ष 2011-12 में मछली का बीमा किया गया था। तब बीमा प्रीमियम दर 3600 रुपए प्रति हेक्टेयर था। क्षतिपूर्ति 60 हजार से डेढ़ लाख रुपए तक का प्रावधान था। इसके बाद पिछले 7 साल से मछलियों का बीमा नहीं हो सका था। 1 से 4 लाख रुपए तक मिलेगी

Source: Daily Bihar

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