बिहार में अब जमीन के साथ ही अब नक्शे का भी होगा दाखिल-खारिज

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Patna: बिहार में जमीन से जुड़े मामले को लेकर बिहार सरकार एक्शन में हैं. ऐसे में अब बिहार सरकार राज्य के रैयतों को तोहफा देने जा रही है. बता दें कि अब जमीन की बिक्री होने पर न सिर्फ रैयत के नाम में बदलाव होगा बल्कि बिक्री के मुताबिक जमीन का नक्शा भी बदल जाएगा. इसीलिए यह भी कहा गया है कि जमीन के साथ ही नक्शा भी बदल जाएगा. इस काम के लिए अब दाखिल खारिज के पहले खाका रेखाचित्र, राजस्व मानचित्र जरूरी से दिखाना होगा.

बता दें कि विधानसभा के शीतकालीन सत्र में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री राम सुरत कुमार द्वारा बिहार भूमि दाखिल खारिज संशोशन विधेयक 2021 पेश किया गया. नए प्रावधान लागू होने के बाद बिहार अब दाखिल खारिज के साथ नक्शा देने वाला देश का पहला राज्य हो जाएगा. बता दें कि इस अधिनियम को राज्यपाल से स्वीकृति मिलने के बाद प्रदेश में लागू हो जाएगा. इस विधेयक को लेकर बोलते हुए मंत्री राम सूरत कुमार ने कहा कि भूमि विवादों को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा. इस विधेयक में संशोधन को लेकर कांग्रेस के अजीत शर्मा, राजद के ललित यादव व संयुक्त प्रवर समिति के अजय कुमार सिंह ने प्रस्ताव दिया जिसे अस्वीकृत कर दिया गया.

इस विधेयक को लेकर बोलते हुए भूमि सुधार मंत्री राम सुरत कुमार ने कहा कि ऑनलाइन म्यूटेशन (दाखिल खारिज) का प्रावधान भी एक दिसंबर, 2017 को लागू हुआ था, आज भी एक दिसंबर है, यह महत्वपूर्ण है. दाखिल खारिज में पहले नक्शे का म्यूटेशन नहीं होता था, अब नक्शा का भी म्यूटेशन होगा. किसी जमीन की बिक्री की जाएगी तो उसे डिजिटल मैप पर देखा जा सकेगा कि कौन किसी जमीन का कौन सा भूखंड बिक चुका है.

इस दौरान उन्होंने यह भी कहा है कि पुश्तैनी संपत्ति का बंटवारा कर जब जमाबंदी कायम करेंगे तो उसका नक्शा भी बन जाएगा.इससे आने वाले समय में विवाद कम होगा और फर्जी विक्रेताओं पर नकेल कसेगी. उन्होंने यह भी कहा है कि इससे यह लाभ होगा कि खरिदार पहले ही यह देख सकेंगे कि यह जमीन किसके नाम से बिका हुआ है. इस अधिनियम के पारित हो जाने के बाद विभाग के अपर मुख्य सचिव विवकेश कुमार सिंह ने कहा है कि स्पेशियल म्युटेशन पूर्णतः तकनीक आधारित है. कानून बन जाने से दलालों की मनमानी रोकने में काफी हद तक मदद मिलेगी. राज्य सरकार ने IIT रुड़की की मदद से इस तकनीक को विकसित किया है.

आइए अब जान लेते हैं इसका क्या लाभ होगा…

  • जमीन के दस्तावेज में नाम परिवर्तन के साथ प्लॉट का नक्शा (स्पेटियल मैप) फोटो के साथ ही, खाता, खेसरा और रकबा भी फोटो में होगा़.
  • इससे छोटे- से- छोटे जमीन के टुकड़े का क्रय- विक्रय कितनी भी बार हो चौहद्दी का विवाद नहीं होगा़.
  • अभी दाखिल- खारिज में जमीन के खरीद होने पर केवल नये खरीदार का नाम, खाता, खेसरा और रकबा ही दर्ज रहता है़. चौहद्दी का जिक्र न होने से विवाद की संभावना बनी रहती है़. नये सर्वे के बाद म्यूटेशन की पूरी प्रक्रिया टेक्सटुअल एंड स्पेटियल डाटा इंट्रीग्रेशन आफ लैंड रिकॉर्ड’ आधारित हो जायेगी़. रजिस्ट्री के साथ ही ऑनलाइन दाखिल- खारिज के साथ ही नक्शा भी अपडेट हो जायेगा.
  • इससे उनलोगों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जो जमीन खरीदने और दाखिल खारिज कराने के बावजूद खरीदी गई जमीन पर दखल कब्जा के लिए भटकते रहते हैं.

इसको लेकर विभाग की तरफ से यह भी कहा गया है कि इस काम के लिए रैयतों को शुल्क का भुगतान भी करना होगा. जिसका निर्धारण भी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा किया जायेगा. निबंधन कार्यालयों में जमीन के पंजीकरण के समय प्री.म्युटेशन स्केच रैयत द्वारा निबंधन कार्यालय को उपलब्ध कराया जायेगा. इसे पंजीकृत दस्तावेज के साथ संगलग्न कर ऑनलाइन दाखिल खारिज हेतु संबंधित अंचल कार्यालय को उपलब्ध कराया जायेगा. यह भी बताया गया है कि अंचलाधिकारी द्वारा म्युटेशन के बाद विहित प्रपत्र में शुद्धि पत्र के अलावा अनुमोदित दाखिल खारिज प्री. म्युटेशन स्केच की प्रति भी आवेदक को दी जायेगी.

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