दरभंगा एयरपोर्ट को लेकर अब मिथिला वासियों में गुस्सा देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि केंद्र से लेकर राज्य सरकार साजिश के तहत दरभंगा एयरपोर्ट को लटका रही है। यहीं कारण हैं कि आजतक उड़ान योजना में शामिल होने के बाद भी दरभंगा एयरपोर्ट से उड़ान शुरू नहीं हो सका है। इधर एमएसयू के आदित्य मोहन ने लाइव बिहार को बताया कि अब दरभंगा एयरपोर्ट को लेकर जबरदस्त आंदोलन शुरू किया जाएगा। अगर लोक सभा चुनाव से पहले मिथिला वासियों को एयरपोर्ट नहीं मिलता है तो चुनाव प्रचार के दौरान एक भी हेलीकॉप्टर मिथिला क्षेत्र में नहीं उतरने दिया जाएगा।

दरभंगा एयरपोर्ट इकोनॉमिक फिजिबिलिटी एंड अदर आस्पेक्ट्स : एमएसयू के आदित्य मोहन के अनुसार क्षेत्र के 12 जिलों के करीब 4 करोड़ कवरिंग जनसँख्या इससे प्रभावित होगा, जिसमे से करीब 30 लाख लोग मेट्रो सिटीज में प्रवासित हैं और हर साल अपने गाँव-घर जरूर आते हैं। इन तीस लाख में से एक लाख लोग भी अगर हवाई यात्रा करते हैं तो करीब 300 यात्री ‘पर डे’ अराइवल साल के हर दिन होगा ही होगा और लगभग उतना ही डिपार्चर भी होगा। यदि साल में दो बार यात्रा करते हैं एक व्यक्ति तो 600 अराइवल एंड डिपार्चर डेली। यहाँ के ट्रेनों में थर्ड ऐसी, सेकंड ऐसी और फर्स्ट ऐसी कभी आपको खाली नहीं मिलेगा, मतलब साफ़ है की अमूमन यात्रा पर 3-4 हजार खर्च करने वालों की संख्या बहुत बड़ी है। अब अगर उन्हें उतने या उससे हल्के ज्यादा वहन करके चौथाई से भी कम समय में घर पहुंचने का मौक़ा मिले तो वो जरूर करेंगे।

कवरिंग डिस्ट्रिक्स- मधुबनी, दरभंगा, सीतामढ़ी, शिवहर, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, चम्पारण, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, बेगूसराय, खगरिया। कुल पॉपुलेशन करीब (4 करोड़)। क्षेत्र के करीब 60 हजार से ज्यादा मुसलमान आबादी अरब देशों में रहते हैं। वो अगर साल में एकबार आते हैं तो लगभग पर डे 200 अराइवल एंड 200 डिपार्चर फिक्स है जो होगा ही होगा। ट्रेन के थ्रू दिल्ली से दरभंगा लगभग 20 घंटे (कुछ ट्रेनों को 24 से भी ऊपर), मुंबई से दरभंगा करीब 36 घंटे, बंगलोर से दरभंगा करीब 52 घंटे, हैदराबाद से दरभंगा करीब 39 घंटे लगते हैं। एक तो इतना समय ऊपर से ट्रेन में टिकट मिलने की दिक्कत, और यही कारण है की ज्यादातर इन शहरों में रहने वाले मैथिल अब साल में एक बार ही गाँव जा पाते हैं। यदि कुछ ज्यादा भाड़े में भी हवाई यात्रा शुरू हो जाए तो ज्यादातर लोग ख़ुशी-ख़ुशी तैयार होंगें और साल में 2-3 बार हो आएँगे गाँव। ऑटोमेटिकली फुटफॉल बढ़ेगा

ऊपर उल्लेखित नजदीकी 12 जिलों के अलावा अन्य करीब 12 जिले भी कवरिंग क्षेत्र में आएगा जिसके यात्री को पटना भी उतना ही नजदीक पड़ेगा जितना दरभंगा, तो इस हिसाब से इन जिलों के यात्री जो अभी पटना जाते हैं वो दरभंगा के साथ बंटेंगे और कम से कम 50% दरभंगा के हिस्से में आएगा। [ कवरिंग पॉपुलेशन- 3 करोड़, प्रवासी- 20 लाख, एक्स्पेक्टेड यात्री करीब 80 हजार-1 लाख, दरभंगा के हिस्से करीब 40-50 हजार, यदि यात्री साल में दो बार यात्रा करते हैं तो लगभग 300 अराइवल एंड 300 डिपार्चर डेली। कुल मिलाकर दरभंगा एयरपोर्ट पर हजारों के डेली अराइवल एंड डिपार्चर का फिजिबिलिटी है, जिसे सालों से सरकार इग्नोर कर रही है।

दरभंगा एयरपोर्ट के फायदे : एयरपोर्ट शुरू होने से क्षेत्र में हजारों लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। एकबार बेहतर कनेक्टिविटी स्थापित होने के बाद क्षेत्र में निवेशकों के आने का चांस बढ़ेगा, नए इंडस्ट्री लग सकते हैं और रोजगार बढ़ेगा। आज अगर कोई मैथिल भी अपने क्षेत्र में इन्वेस्ट करना चाहे तो कैसे करेगा ? मान लीजिये की वो शहर में है और उसके पास पूंजी है लगाने के लिए, लेकिन क्या कोई ऐसी जगह अपनी पूंजी लगाना चाहेगा जहाँ जाने-आने में ही उसे 3-4 दिन लग जाए ? एकबार क्षेत्र में यदि एयरपोर्ट होगा तो सर्विस इंडस्ट्री, सॉफ्टवेयर एंड टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री, एजुकेशन इंडस्ट्री को वहां पहुँचने में दिक्कत नहीं होगी चूँकि आवागमन सुगमता से होगी। यदि निवेशकों को आने-जाने की सुगमता हो तो क्षेत्र में चीनी मिल, मुजफ्फरपुर में लीची प्रसंस्करण, डेयरी-मत्स्य और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग आसानी से लगाए जा सकते हैं और निवेश बढ़ेगा। मिथिला के कला-संस्कृति-इतिहास-धरोहर आदि को कभी ब्रांड करके इंडस्ट्री बनाया ही नहीं गया और न ही देश-विदेश से पर्यटन बढ़ाने पे ध्यान दिया गया। यदि एयरपोर्ट होगा तो पर्यटक भी आएँगे, और कला-संस्कृति-मैथिली सिनेमा को भी इंडस्ट्री के रूप में विकशित किया जा सकता है। इससे क्षेत्र के आम-लोगों को रोजगार मिलेगा।

दरभंगा एयरपोर्ट के खुलते ही क्षेत्र के राजनितिक-सामाजिक-आर्थिक आदि सभी पहलूवो में आमूल-चूल परिवर्तन होगा। दरभंगा एयरपोर्ट अपने भौगौलिक स्थिति के कारण शानदार इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने की स्थिति रखता है। दुनिया भर से नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार, चीन आने वाले फ्लाइट्स और यूरोप एंड साउथ-ईस्ट एशिया से नार्थ-वेस्ट एशिया (इंडोनेशिया, हिंदेशिया, वियतनाम, कम्बोडिया, थाईलैंड आदि) जाने वाली अधिकाँश फ्लाइट्स के लिए ये एक स्टे पॉइंट बन सकता है। (वर्ल्ड मैप देखिए, बेहतर समझ आएगा)। देश के सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से भी दरभंगा एयरपोर्ट एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आसपास इतने पड़ोसी देशों के होने के कारण दरभंगा एयरपोर्ट के बनने से आपात-काल में देश के सेनाओं के आसान आवागमन का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

साल 1935 में हमारे यहां हवाई सेवा थी और आज 83 साल बाद आपने हमें तरसा के रक्खा है। क्षेत्र और इसके 7 करोड़ जनसंख्या के आर्थिक-सामजिक-राजनितिक पुनरुत्थान में दरभंगा और पूर्णिया एयरपोर्ट का खुलना एक मील का पत्थर होगा पर सालों से सरकारों ने इसे इग्नोर किया है। न केवल इग्नोर किया है बल्कि इसे एक मजाक बना दिया है। लोग टकटकी लगाकर सम्बंधित खबरों का इन्तजार करते हैं, नेता लोग ज्ञापन-भेंट-भाँट-चिट्ठी से खबर-क्रेडिट ले लेते हैं और स्थिति ये है की टर्मिनल बिल्डिंग बनने का टेंडर अबतक चार बार कैंसल हो गया है। मुख्यमंत्री दिल्ली के हजारों की भीड़ के सामने जाकर बोल आए थे की जनवरी में चालू हो जाएगा, नहीं हुआ। फिर उपमुख्यमंत्री मीडिया में बोले की जून में हो जाएगा, नहीं हुआ। अभी सितम्बर आने वाला है लेकिन भूमि अधिग्रहण समेत सभी मामले लंबित है, डीएम से पूछो तो कहेगा की स्टेट अटका के बैठी है। टर्मिनल बिडिंग के ५ करोड़ आवंटित बिडिंग बनाने तक के लिए कोई नहीं मिला है और टेंडर 4 बार कैंसल हो चुका है। कवरिंग क्षेत्र के बारहों सांसद, पच्हत्तरों विधायक में किसी को कोई मतलब नहीं है। आगे आएगा लोकसभा चुनाव, सब लग जाएंगे उसमें और सब बिसरा जाएगा, एयरपोर्ट न बना और न बनेगा।

लेकिन एक-मिनट, लोकसभा तक पेंडिंग रखना चाहते हैं न ? यही प्लान है न ? त इतनी आसानी से होने देंगे ? महंगा पड़ेगा इस बार, पसीना छोड़ा देंगे सबको। और इसलिए आज लगभग 9 महीना पहले लिख रहे हैं, इसे चेतावनी ही समझिए। हमारा एयरपोर्ट नहीं बना त किसी नेता का हैलीकॉप्टर दरभंगा में नहीं उतरेगा। कोई भी दल हो, कोई भी नेता।उताड़ के दिखा दीजिए इसबार लोकसभा चुनाव के टाइम हेलीकाप्टर दरभंगा में।एक-एक हैलीपैड कुदाल से ताम दिया जाएगा। आगे चाहे जो हो।

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