शिंगणापुर गांव के किसी घर में नहीं है दरवाजे..शनि देव खुद करते हैं यहां हर घर की रक्षा

जानकारी

महाराष्ट्र के अहमद नगर से लगभग 35 किमी की दूरी पर हैं शिंगणापुर शनि धाम। काले रंग की शिला को यहां शनि भगवान का प्रतीक स्वरूप मानकर पूजा करते है। इस मंदिर की महिमा ऐसी है कि हर शनिवार के दिन यहां भारी तादाद में भक्तों का जमावड़ा होता है। मान्यता है कि यहां आनेवाले भक्तों की शनि महाराज हर इच्छा पूरी करते हैं। यहां अधिकांशतया शनि के साढ़े साती अथवा अढैया से ग्रस्त व्यक्ति आते हैं और शनि जी का अनुष्ठान करके अपने ऊपर छाये ग्रहों के संकट को दूर करने की मन्नत मांगते हैं।

यह दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां प्रतिमा के ऊपर न किसी तरह की छत है और ना ही दीवारें। यही नहीं यह दुनिया का एकमात्र गांव है, जहां घरों, बैंक शाखाओं, दफ्तरों आदि में दरवाजे नहीं होते। जानवरों आदि से सुरक्षा के लिए अगर दरवाजे दिखते भी हैं तो उन पर ताला नहीं होता। स्थानियों का विश्वास है कि उनके गांव की रक्षा स्वयं शनि भगवान करते हैं। स्वयंभु शनि भगवान की प्रतिमा के बारे में तमाम तरह की कहानियां प्रचलित हैं। आइये जानें दुनिया के इस अनोखे मंदिर की कहानी।।।

स्थानीयों के अनुसार कई साल पूर्व महाराष्ट्र के इस गांव में भयंकर बाढ़ आई थी। घरों में पानी भर जाने से अधिकांश लोग पेड़ों पर चढ़कर रातें गुजारते थे। इसी दरम्यान एक काले रंग का विशाल शिला बहता हुआ आया और एक पेड़ के नीचे जाकर रुक गया। बाढ़ से बचने के लिए उसी पेड़ पर बैठे एक युवक ने शिला को देखकर सोचा कि इससे अच्छी कमाई हो सकती है। बाढ का पानी थमने के बाद युवक ने शिला को तोड़ने की कोशिश की तो यह देखकर हैरान रह गया कि शिला पर जहां उसने आघात किया था, वहां से रक्त जैसा लाल द्रव निकल रहा है। यह देख वह भयभीत होकर गांव की ओर भागा। थोड़ी देर में वहां पूरा गांव इकट्ठा हो गया। कुछ लोगों ने राय मशविरा किया कि इस शिला का क्या करना है?

उसी रात एक ग्रामीण को सपने में शनि देव ने दर्शन देते हुए कहा कि गांव में जो शिला बहकर आयी है, वह मेरा ही प्रतीक है, उसे गांव में किसी पवित्र जगह स्थापित कर दोगे तो तुम्हारे गांव में हमेशा खुशहाली रहेगी।

अगले दिन जब उसकी नींद टूटी तो उसने गांव वालों से अपने सपने की बात कहीं। गांव वाले उस शिला के पास गये, सब ने मिलकर शिला को उठाने की कोशिश की तो टस से मस नहीं हुई। थकहार कर सभी घर चले गये। रात फिर उसी युवक ने शनि भगवान का सपना देखा। शनि भगवान ने उसे शिला उठाने की तरकीब बताई। अगली सुबह उस युवक ने गांव वालों की मदद से शिला को गांव में ही एक साफ सुथरी जगह पर रखवा दिया। इसके पश्चात उस शिला को शनि भगवान का प्रतीक मानकर उसकी पूजा करने लगे।

कहा जाता है कि नियमित पूजा करने के साथ ही गांव की सारी समस्याएं खत्म होने लगी। खेतों की अच्छी फसल से किसानों की आमदनी बढ़ने लगी। लोग दूर-दराज से अपनी मन्नतें लेकर यहां आने लगे। देखते ही देखते वह शिला शिंगणापुर के शनि देवता के नाम से मशहूर हो गया।

Sources:-Live News

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