6 महीने तक कोई ग्राहक नहीं आया, फिर किस्मत ऐसी बदली कि आज इनकी आलूपूरी के लिए लगती है लाइन

जिंदगी

पटना: पूरियां तो आपने कई तरह की खाई होंगी, लेकिन क्या कभी ‘आलूपूरी’ टेस्ट किया है? अदाजन की महालक्ष्मी मंदिर के पास मिलने वाली भरत भाई की आलूपूरी पूरे शहर में फेमस है। दरअसल, इनकेसीक्रेट मसाले की रेसिपी यहां की आलूपूरी को शहर के बाकी जगहों पर मिलने वाली आलूपूरी से अलग बनाती है। 8 साल से भरत भाई आलूपूरी बेच रहे हैं। एक समय ऐसा था, जब छह महीने तक इनकी दुकान पर एक भी कस्टमर नहीं पहुंचा था। आज उनके इसी आलूपूरी के लिए कस्टमर की लाइन लगती है।

रोज बर्बाद होती थी मेहनत, फिर भी नहीं मानी हार…

– कभी हीरे की फैक्टरी में काम करने वाले भरत बताते हैं, ‘जितनी भी मेहनत करो पर इस काम में मजा नहीं आता था। एक दिन मैंने कंपनी से कह दिया- कल से काम पर नहीं आऊंगा।’

– ‘उसके बाद मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या किया जाए? फिर लगा अगर कुछ भी नहीं किया, तो जीना मुश्किल हो जाएगा।’

– ‘फिर विचार आया कि आलूपूरी बेची जाए। मैंने आलूपूरी का ठेला लगाना शुरू कर दिया। पहले दिन कोई नहीं आया। सारा सामान बेकार हो गया। दूसरे दिन फिर आलूपूरी बनाकर ठेला लगाया।

– ‘दूसरे दिन भी कोई नहीं आया। लेकिन मैंने हार नहीं मानी, क्योंकि मेंरे पास अब करने के लिए कुछ भी नहीं था।’

– भरत भाई के मुताबिक, छह महीने इसी तरह निकल गए। हर रात मायूसी के साथ घर लौटता था।

फिर ठेले से दुकान शुरू की

– भरत भाई ने कहा, ‘धीरे-धीरे मेहनत रंग लाने लगी। कस्टमर बढ़ने लगे। आज इसी आलूपूरी के लिए लोगों की लाइन लगती है। ठेला लगाते-लगाते दुकान खोल ली।’

– ‘लोगों को मेरी आलूपूरी का टेस्ट इस कदर भाया कि छह महीने में जो घाटा हुआ था, वह पूरा हो गया।

– ‘अब हालत यह है कि दुकान एक दिन भी बंद रहती है, तो लोग फोन करने लगते हैं। सोचता हूं कि अगर उन 6 महीनों के दौरान मैं हारकर घर बैठ गया होता, तो आज यहां तक नहीं पहुंच पाता।’

खुद तैयार करते हैं गरम मसाला

– इस कमाल की आलूपूरी की रेसिपी के बारे में हर कोई जानना चाहता है। हालांकि, भरत भाई कहते हैं कुछ चीजें सीक्रेट ही रहनी चाहिए।

– वैसे उन्होंने हमें बताया कि जायके के लिए वे गरम मसाला घर पर ही बनाते हैं। उसमें तेज पत्ता, लौंग, काली मिर्च और काला नमक डालते हैं।

– वे इसका इस्तेमाल मसाला तैयार करने के लिए करते हैं। इससे उनकी आलूपूरी का स्वाद औरों से कुछ अलग होता है।

Source: Dainik Bhaskar

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