नीतीश सरकार के 15 साल, 15 बड़े फैसले, हर कार्यकाल के कई फैसले देश के लिए नजीर बने

प्रेरणादायक

नीतीश सरकार ने 15 सालों में कई बड़े और साहसिक फैसले किये। पहले कार्यकाल में महिला सशक्तीकरण और अतिपिछड़ा सशक्तीकरण के लिए इन्हें ग्राम पंचायतों में एकल पदों पर क्रमश: 50 प्रतिशत और 20 प्रतिशत का आरक्षण दिया। वहीं कृषि रोड मैप लागू कर कृषि व्यवस्था को सुदृढ़ करने और किसान सशक्तीकरण की बड़ी पहल हुई।

दूसरे कार्यकाल में लोक सेवाओं का अधिकार कानून बनाया, जिससे लोगों को प्रमाणपत्र हासिल करने में सुविधा हुई। तीसरे कार्यकाल में लोक शिकायत निवारण कानून के तहत शिकायतों के निष्पादन का लोगों का कानूनी आधिकार दिया और घर-घर बिजली भी पहुंचाई। साथ ही हर घर नल-जल पर काम शुरू हुए।  चौथे कार्यकाल में हर जिला मुख्यालय में बाइपास का फैसला लिया। तीसरे कार्यकाल में सात निश्चय किये और उसे आगे बढ़ाते हुए सात निश्चय पार्ट टू पर चौथे कार्यकाल में काम शुरू हुए। इस तरह उनके हर कार्यकाल के कई फैसले देश के लिए नजीर बने। इनमें 15 प्रमुख फैसले निम्न हैं :

1- ग्राम पंचायतों और नगर निकायों में एकल पदों पर भी महिलाओं को 50 प्रतिशत और अतिपिछड़ों को 20 प्रतिशत का आरक्षण दिया। 

2- कृषि रोड मैप को लागू किया, जिससे कृषि व्यवस्था मजबूत हुई। एक तरह अनाज का उत्पादन और उत्पादकता बढ़ी तो दूसरी ओर किसानों की आमदनी भी बढ़ी। 

3- बालक-बालिकाओं के लिए साइकिल योजना शुरू की, जिससे खास कर माध्यमिक और उच्च शिक्षा ग्रहण करने वाली लड़कियों की संख्या काफी बढ़ी। 

4- राज्य के सुदूर इलाके से भी छह घंटे में राजधानी पटना पहुंचने के लक्ष्य के अनुरूप सड़कों और पुल-पुलियों पर काम हुए और यह लक्ष्य हासिल भी हुआ।

दूसरा कार्यकाल

5- लोक सेवाओं का अधिकार कानून लागू किया। इससे लोगों को जाति, आय, आवासीय आदि सभी तरह के प्रमाणपत्र सुविधापूर्वक तय समय में प्राप्त होने लगे। 

 

तीसरा कार्यकाल

6- हर घर बिजली का कनेक्शन देने की घोषणा हुई और इसे वर्ष 2018 में पूरा भी कर दिया गया। 

7- हर घर नल का जल और सभी गली-नाली पक्कीकरण योजना शुरू हुई। 

8- अप्रैल 2016 में पूर्ण शराबबंदी लागू हुई। इसे सफल बनाने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान चले। बड़े पैमाने पर कार्रवाई हुई और गड़बड़ करने वाले सरकारी सेवकों को बर्खास्त भी किया गया।

9- उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए विद्यार्थियों को राज्य सरकार अपना अलग कोष बना कर चार लाख रुपए तक के लोन की व्यवस्था की। 

10- इंटरमीडिएट उत्तीर्ण अविवाहित लड़कियों को 15 हजार और स्नातक उत्तीर्ण सभी लड़कियों को 25 हजार रुपए दिये जाने लगे। बाद में इस राशि को बढ़ाकर क्रमश: 25 और 50 हजार किये गये। 

11- पीएमसीएच को विश्वस्तरीय अस्पताल बनाने पर कार्य शुरू हुआ।  

12- जल-जीवन-हरियाली अभियान की शुरुआत हुई। पर्यावरण प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए इसकी शुरुआत हुई, जिसकी सराहना संयुक्त राष्ट्र संघ के स्तर पर भी हुई। 

13- राज्य सरकार की नौकरियों में महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण दिये गए।

 

चौथा कार्यकाल

14- हर जिले में बाइपास की सुविधा बहाल करने पर काम शुरू हुआ। 120 बाइपास बनेंगे। 

15- हर गांव की गलियों को रोशन करने के लिए सोलर स्ट्रीट लाइट योजना को हरी झंडी दी गई। पंचायत चुनाव बाद इस पर काम शुरू होंगे। 

 

कई मुद्दों पर आलोचना भी झेलनी पड़ी

राज्य सरकार को कुछ मुद्दों पर आलोचना भी झेलनी पड़ी है। इनमें एक है भ्रष्टाचार का मुद्दा। भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति के बावजूद यह राज्य में एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। इस मुद्दे को लेकर विपक्ष सरकार को घेरता रहा है। मामलों के सामने आने पर बड़ी कार्रवाइयां भी हुई हैं, पर यह चुनौती अब भी बनी हुई है। वहीं, पूर्ण शराबबंदी के बाद राज्य में शराब का उपलब्धता की बात को भी विपक्ष उठाता रहा है। शराबबंदी को प्रभावी बनाने के लिए राज्य सरकार ने फिर से एक बड़ा अभियान चलाने का फैसला किया है। वहीं राज्य सरकार की योजनाओं का धरातल पर उस अनुरूप नहीं उतरना, जैसा निर्णय हुआ था। इसको लेकर भी सरकार को आलोचना झेलनी पड़ती है।

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