मीरा या रामनाथ- राष्ट्रपति चुनाव को लेकर जदयू बदलेगा अपना निर्णय, चर्चा तेज

राजनीति

राजद सुप्रीमो लालू यादव हमेशा एक भोजपुरी कहावत बोलते रहते हैं. हड़बड़िए बियाह, कनपटिए सेनूर. एंटी एनडीए फ्रंट की तरफ से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मीरा कुमार को बनाये जाने के बाद बिहार की सियासत में जदयू के फैसले को इसी कहावत के संदर्भ में देखते ह

राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह चर्चा विपक्ष की दिल्ली में हुई बैठक के बाद लालू यादव के उस बयान से शुरू हुई है, जिसमें उन्होंने मीडिया से कहा कि जदयू का एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद के समर्थन का फैसला एक ऐतिहासिक भूल है. उन्होंने इसे सुधारने की अपील की.

कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ने जैसे ही राष्ट्रपति पद के लिए मीरा कुमार के नाम की घोषणा की सियासत में सरगरमी बढ़ सी गयी. मीरा कुमार का नाम सामने आने के बाद अब बिहार की राजनीति को समझने वाले जदयू के फैसले को जल्दबाजी के नजरिये से देख रहे हैं.

जानकार जदयू के फैसले को नोटबंदी के समर्थन के फैसले से जोड़कर उसका तुलनात्मक परिणाम देखते हैं. उनका कहना है कि नोटबंदी को शुरू में जदयू ने समर्थन किया, लेकिन जैसे ही दिक्कतें बढ़ने लगी, तो पार्टी की तरफ से यह बयान आने लगा कि यह ठीक नहीं हो रहा है. ठीक उसी तरह, मीरा कुमार दलित हैं. बिहार से हैं. बड़े राजनेता स्व. जगजीवन राम की बेटी हैं. साफ-सुथरी छवि है.

जानकार बताते हैं-विपक्ष की ओर से मीरा कुमार को उम्मीदवार बनाये जाने के बाद जदयू का कोविंद को समर्थन करना, कहीं बिहार के दलित समुदाय को जदयू से नाराज ना कर दे. हालांकि, जानें-मानें राजनीतिक मामलों के जानकर प्रो. अजय कुमार झा, ऐसा नहीं मानते. उनका कहना है कि जदयू इश्यू दर इश्यू एनडीए का समर्थन करने में विश्वास रखता है.

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