माउंटेनमैन मांझी के परिवार से मिले नीतीश, दशरथ मांझी को बताया बिहार की पहचान

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गया के पर्वत पुरूष दशरथ मांझी के परिजनों की हसरत शनिवार को पूरी हो गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सम्मान प्राप्त होने के बाद उनके दिन बहुरने की आस भी जग गई है। परिजनों को इस बात का अहसास है कि दशरथ बाबा को अपनी कुर्सी पर बिठाने और उनके इलाज से लेकर मौत के बाद इस हद तक माउंटेन मैन की कीर्ति को ऊंचाई पर ले जाने में उनकी कितनी देन है।

नीतीश कुमार के पहल पर ही दशरथ मांझी कौशल विकास योजना की शुरुआत की गई थी। 17 अगस्त 2007 को सीएम का गेहलौर कार्यक्रम रद्द हो गया था और दो दफा यहां कार्यक्रम बनते-बनते रह गया। सीएम के गेहलौर आने पर गांव का माहौल किसी उत्सव से कम नहीं था।

महोत्सव स्थल पर सीएम को स्मृति चिह्न ‘छेनी-हथौड़ी’ व गेहलौर घाटी की तस्वीर आदि भेंट की गई। सीएम, डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी व पूर्व सीएम जीतन राम मांझी आदि ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर महोत्सव का शुभारंभ किया। सीएम ने समाधि स्थल के समीप पीपल का वृक्ष भी लगाया। सीएम ने रिमोट से पंचायत भवन, किसान भवन व ओपी का उद्घाटन किया।

पूर्व सीएम जीतनराम मांझी ने महोत्सव के मंच से दशरथ मांझी को भारत रत्न देने, गेहलौर, हड़ाही स्थान व तपोवन आदि जगहों को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि देश-विदेश के लोग इस अमर कृति को देखने आते हैं। घाटी के आसपास रहने वाले गरीब लोगों के लिए 600 आधुनिक मकान बनाया जाय। पूर्व सीएम ने यहां मोहड़ा का प्रखंड मुख्यालय बनाने और गेहलौर घाटी को और गहरा करने की मांग सीएम से की।

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