अपनी शादी में नीतीश ने किया था दहेज का विरोध, पिता को लौटाने पड़े थे 22 हजार रुपये

कही-सुनी

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार छात्र जीवन से ही सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं। वे शादी में दहेज लेने के बिल्कुल खिलाफ थे। इस मामले में उन्होंने अपने पिता तक का विरोध कर दिया था। नीतीश कुमार की जिद के आगे उनके परिवार और संबंधियों को झुकना पड़ा था। नीतीश कुमार की शादी बिल्कुल सादगी के साथ बिना दहेज की हुई थी।

ये 1973 की बात है। नीतीश कुमार उस समय पटना के बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष के छात्र थे। कुछ महीने बाद वे इंजीनियर बनने वाले थे। तब तक नीतीश कुमार छात्र राजनीति में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने लगे थे। इस दौरान उनके पिता राम लखन सिंह कई बार उनसे मिलने पटना आये। उनके पिता हॉस्टल और कॉलेज में खोजते, लेकिन नीतीश कुमार कभी नहीं मिलते।

नीतीश अक्सर कहीं भाषण दे रहे होते या मीटिंग में व्यस्त रहते। तब उनके पिता ने तय किया अब नीतीश की शादी कर देनी चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार संकर्षण ठाकुर ने एक किताब लिखी है- अकेला आदमी : कहानी नीतीश कुमार की। इस किताब में नीतीश कुमार की शादी का तफसील से जिक्र है।

बख्तियारपुर के पास ही सियोदा गांव के रहने वाले शिक्षक कृष्णनंदन सिन्हा की पुत्री मंजू सिन्हा के साथ नीतीश का विवाह तय हुआ। कृष्णनंदन सिन्हा हाईस्कूल के हेडमास्टर थे और इलाके में बहुत प्रतिष्ठा थी। उनकी पुत्री मंजू सिन्हा पटना विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित मगध महिला कॉलेज में पढ़ती थीं। नीतीश अभी शादी नहीं करना चाहते थे। लेकिन पिता के समझाने के बाद वे राजी हो गये। इसी बीच नीतीश कुमार को कहीं से पता चला कि उनके पिता ने शादी के लिए लड़की वालों से 22 हजार रुपये लिये हैं। इस बात को जानकर नीतीश बेहद नाराज हो गये। उन्होंने इंजीनियिंग कॉलेज के हॉस्टल में अपने मित्रों अरुण सिन्हा और नरेन्द्र सिंह (चकाई वाले पूर्व मंत्री नरेन्द्र सिंह नहीं) को ये बात बतायी।

नीतीश गुस्से में बोलने लगे कि ये शादी कभी नहीं हो सकती। चलो अभी बख्तियारपुर, पिताजी से साफ साफ बात करनी है। सोच विचार करते करते रात हो गयी। बख्तियारपुर जाने की आखिरी रेल गाड़ी निकल चुकी थी। अंत में नीतीश कुमार और नरेन्द्र सिंह तिनपहिया से ही बख्तियारपुर के लिए निकल पड़े। किराया देने के लिए नीतीश के पास पैसे कम थे। वे जब घर पहुंचे तो पिता से पैसे लेकर भाड़ा चुकाया। नीतीश कुमार ने पिता से कोई बात नहीं की और ऊपर के कमरे में चले गये। नीतीश ने बातचीत की जिम्मेवारी अपने दोस्त नरेन्द्र सिंह को दे रखी थी। नरेन्द्र सिंह, नीतीश कुमार के पिता वैद्य रामलखन सिंह के सामने थे।

नरेन्द्र सिंह ने उनसे नतीश कुमार की शर्तें बतायीं… कोई दहेज नहीं, एक पैसा भी नहीं, इस तरफ से या उस तरफ से कोई उपहार नहीं, शादी में कोई रीति-रिवाज नहीं, कोई जश्न या समारोह नहीं, शादी होगी पटना के रजिस्ट्रार ऑफिस में । अगर ऐसा नहीं होता है तो विवाह को रद्द समझा जाए। नीतीश के पिता ने उनके दूत को समझाया, अगर कोई अपनी लड़की की शादी में खुशी से खर्च करना चाहे तो इसमें क्या आपत्ति है ? फिर दहेज के रूप में ली गयी रकम भी कोई अधिक नहीं है। अगर ये पैसा लौटाएंगे तो उन्हें कितनी परेशानी होगी ?

फिर नरेन्द्र सिंह ऊपर के कमरे में नीतीश कुमार के पास पहुंचे। नीतीश को उनके पिता की राय बतायी। इतना सुनना था कि नीतीश और गुस्से में आ गये। पैसा लौटाने का मतलब क्या है ? क्या पैसा ले लिया गया है ? अब तो ये विवाह नहीं हो सकता। जाइए मेरे पिताजी को और लड़की पक्ष को ये बता दीजिए की लेन-देन की बात बिल्कुल मंजूर नहीं। नीतीश कुमार के इस विरोध की सब जगह चर्चा होने लगी।

इसी बीच ‘धर्मयुग’ पत्रिका के लिए जुगनू शारदेय ने नीतीश कुमार का इंटरव्यू किया। नीतीश ने महिलाओं की स्थिति और विवाह पर अपनी बेबाक राय रखी। उस वक्त मशहूर साहित्यकार फणीश्वर नाथ रेणु ने जब इस साक्षात्कार को पढ़ा तो उन्होंने कहा था कि ऐसे ही युवक को वे अपने दामाद के रूप में देखना चाहते हैं।

नतीश के दोस्त किसी तरह इस शादी को बचाना चाहते थे। अगर ये शादी टूट जाती तो दोनों परिवारों के लिए दुखद स्थिति होती। कुछ कदम नीतीश ने वापस खीचें तो कुछ कदम उनके पिता ने। नीतीश ने कोर्ट मैरेज की जिद छोड़ दी। पिताजी नीतीश के कहे मुताबिक शादी के लिए तैयार हो गये। पटना के गांधी मैदान के पास लाला लाजपत राय भवन में विवाह सम्पन्न हुआ। किसी रीति रिवाज का पलन नहीं हुआ।

नीतीश कुमार और मंजू सिन्हा ने एक दूसरे को माला पहनायी और शादी हो गयी। दोनों परिवारों के अलावा पटना इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्र इस शादी में शरीक हुए। शादी के बाद नीतीश कुमार और मंजू सिन्हा बख्तियारपुर चले गये।

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