हरिवंश की जीत ने बढ़ा दिया नीतीश का मान, हिट हो गयी मोदी-नीतीश की जोड़ी

राजनीति

पटना: राज्यसभा के उपसभापति पद पर जेडीयू सांसद हरिवंश नारायण सिंह के काबिज होते ही बिहार के सीएम नीतीश कुमार का कद एनडीए में काफी उंचा हो गया है। पीएम मोदी और सीएम नीतीश कुमार के बीच की केमेस्ट्री भी साफ दिखने लगी है। जहां कल तक जेडीयू और बीजेपी की बीच संबंध टूटने की बात विपक्ष कर रहा था अब ये अटूट दिखने लगा है।

उपसभापति चुनाव में नीतीश कुमार की रणनाति कामयाब रही। हरिवंश का नाम सामने आने के बाद अपनी पार्टी के उम्मीदवार की जीत के लिए बिहार के सीएम और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार काफी सक्रिय हो गए थे। नीतीश कुमार ने उपसभापति पद के चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार के समर्थन के लिए कई दूसरे छोटे राजनीतिक दलों से संपर्क साधा जिनकी भूमिका काफी अहम थी। इनमें तेलंगाना के सीएम चंद्रशेखर राव और ओडिशा के सीएम बीजू पटनायक को साधना काफी अहम रहा।

जेडीयू को उपसभापति का पद देकर 2019 की चुनावी रणनीति को बड़े ही धमाकेदार अंदाज में अंजाम दिया गया है। इस चुनाव में नीतीश की तो खूब चली साथ ही साथ और भी कई समीकरण एक साथ साधे गए। केन्द्रीय मंत्रीमंडल में विस्तार के दौरान जेडीयू को जगह नहीं मिलने पर दोनों दलों के बीच खटास की बात भी सामने आय़ी थी लेकिन इस चुनाव ने पिछली सभी गलतियों को धो डाला।

वहीं हरिवंश के बहाने एनडीए ने झारखंड और यूपी को भी साधा है। हरिवंश बिहार से जेडीयू के राज्यसभा सांसद जरूर हैं पर उनका पता झारखंड का है। लंबे समय तक झारखंड उनका कर्मक्षेत्र रहा है। उनकी पत्नी चंपारण की हैं। उनका पैतृक गांव यूपी में है। पीएम मोदी ने राज्यसभा में अपने संबोधन के दौरान इस बात का खासतौर पर जिक्र भी किया। बनारस कनेक्शन की भी बात की।

एनडीए के सहयोगी दलों की तरफ से भी जेडीयू के नाम पर ऐतराज नहीं दिखा। अकाली दल और शिवसेना दोनों को लेकर पहले कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे। अकाली दल के राज्यसभा सांसद नरेश गुजराल का भी नाम उपसभापति पद के लिए चर्चा में था। लेकिन, दूसरी सहयोगी जेडीयू के उम्मीदवार के नाम के ऐलान के बाद अकाली दल में थोड़ी नाराजगी भी दिखी थी। लेकिन, आखिर में अकाली दल ने एनडीए उम्मीदवार के पक्ष में खड़ा होने का फैसला कर लिया था।

खैर जो भी हो कई मोर्चों पर जूझ रहे नीतीश कुमार के लिए ये जीत कई मायनो में महत्वपूर्ण है। इस जीत के सहारे नीतीश और बीजेपी का संबंध और भी मजबूत होगा। इसके साथ ही नीतीश 2019 के बहाने 2020 का रास्ता भी अपने लिए आसान कर लेंगे, जो बीजेपी के लिए फायदेमंद हो सकती क्योंकि बीजेपी भी नीतीश का फायदा उठाने में पीछे नहीं रहना चाहेगी।

Source: Live Bihar

Leave a Reply

Your email address will not be published.