नीतीश ने बढ़ाया टेंशन, तेजस्वी और मांझी में हुई लंबी बात

राजनीति

पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब राजनीतिक रूप से फैसले लेने लगे हैं। नीतीश कुमार पूरी तरह से चुनावी मोड में आ गए हैं। सरकार की तरफ से जो फैसले लिए जा रहे हैं, साफ दिखता है कि आने वाले चुनाव को ध्यान में रखकर दलित वर्ग और अल्पसंख्यक को लुभाने के लिए फैसले हो रहे हैं।

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नीतीश कुमार ने सरकार का खजाना दलित वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए खोल दिया है। नीतीश कुमार ने कैबिनेट की बैठक में छात्रावास में रहने वाले एसी/एसटी के छात्र-छात्राओं को 1000 रुपए आवासीय भत्ते और बीपीएससी पीटी कम्प्लीट करने वाले छात्र-छात्राओं को 50000 और यूपीएससी पीटी कंप्लीट करने वाले को 100000 की राशि देने का फैसला लिया है।

नीतीश कुमार ने एससी/एसटी के साथ पिछड़ा और अति पिछड़ा और अल्पसंख्यक छात्र छात्राओं को लुभाने की कोशिश भी है। इन वर्ग के छात्रावास में रहने वाले सभी छात्र-छात्राओं को सरकार हर महीने 15 किलो अनाज देगी।

जिस तरीके से नीतीश कुमार फैसले ले रहे हैं साफ है कि बिहार विधानसभा का चुनाव भी लोकसभा चुनाव के साथ हो सकता है और उसकी तैयारी शुरू है। जीतन राम मांझी के महागठबंधन में जाने के बाद नीतीश कुमार ने यह बड़ा फैसला लिया है।

नीतीश कुमार दलित वर्ग के साथ पिछड़ा और अति पिछड़ा और अल्पसंख्यक के नवयुवकों को भी अपने साथ पूरी तरह से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

नीतीश कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसले के बाद विरोधी दल के नेता तेजस्वी यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी से फोन पर बात की। दोनों के बीच फोन पर लंबी बातचीत हुई है। साफ है नीतीश कुमार के फैसले के बाद इन्हीं मुद्दों पर बातचीत हुई होगी।

मतलब नीतीश कुमार के फैसले का राजनीतिक असर होना शुरू हो गया है। अब इन फैसलों के बाद राजद और हम जैसी पार्टियां जो दलित पिछड़ों और अति पिछड़ों के साथ अल्पसंख्यक के बल पर राजनीति करती है कौन सा कदम उठाती है देखना होगा।

साथ ही भाजपा के लिए भी नीतीश कुमार को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। भाजपा सरकार के साथ में है लेकिन जो फैसले लिए गए हैं उसका क्रेडिट नीतीश कुमार खुद लेना चाहेंगे।

Source: etv bihar

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