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नीतीश ने किया साफ- BJP संग जारी रहेगा गठबंधन, JDU ने रखा 17-17 का फॉर्मूला

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पटना: लोकसभा चुनावों को अब एक साल से भी कम समय बचा है और ऐसे में सभी की निगाहें बिहार में गठबंधन की राजनीति पर टिकी हैं. इसबीच बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के अध्यक्ष नीतीश कुमार ने पार्टी नेताओं को ये साफ कर दिया कि बिहार में भाजपा के साथ गठबंधन जारी रहेगा. नीतीश कुमार ने कहा है कि उनकी पार्टी 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. हालांकि इस बारे में भाजपा के साथ उनकी कोई अंतिम सहमति अभी तक नहीं बन पाई है.

दिल्ली में जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के दौरान 87 सदस्य शामिल हुए हैं. लोकसभा चुनाव से पहले होने वाली इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिवों, सचिवों, प्रदेश अध्यक्षों और कुछ अन्य नेताओं की नेताओं की बैठक के दौरान जेडीयू की तरफ से गठबंधन के बारे में कोई भी फैसला करने के लिए नीतीश कुमार को अधिकृत किया गया है.

बैठक में ज्यादातर नेता इस बात से सहमत थे कि बीजेपी के साथ गठबंधन जारी रहना चाहिए. हालांकि ये भी साफ किया गया कि ये गठबंधन सिर्फ बिहार तक सीमित रहेगा और पार्टी दूसरे राज्यों में अपना विस्तार करती रहेगी.

गठबंधन की सहमति बन जाने के बावजूद सबसे मुश्किल काम सीटों के बंटवारे का है और जब तक इस पर अंतिम सहमति न बन जाए बीजेपी जेडीयू गठबंधन के बारे में अंतिम रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता. बैठक में मौजूद एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि यदि गठबंधन को कायम रखना है तो जेडीयू को काम से कम 17 सीट पर तो लड़ना ही चाहिए.

जेडीयू ने 2009 में बीजेपी के साथ गठबंधन किया था और उसे 25 सीटें मिली थीं. दूसरी ओर 2014 का चुनाव भाजपा ने रामविलास पासवान एलजेपी और उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी के साथ मिलकर लड़ा था. इसमें भाजपा को 22 सीट, एलजेपी को 6 सीट और आरएलएसपी को 3 सीट पर जीत मिली. जीती हुए सीटों को छोड़ने के बाद केवल 9 सीट बचती हैं. ऐसे में जेडीयू के लिए 17 सीट छोड़ना मुश्किल हो सकता है.

जेडीयू के एक नेता ने बताया, ‘सबसे अच्छी स्थिति ये होगी की भाजपा और जेडीयू 17 सीटों पर चुनाव लड़ें और 6 सीट एलजेपी और आरएलएसपी के लिए छोड़ दी जाएं.’ इस बारे में नीतीश कुमार की भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ पटना में 12 जुलाई को बैठक होनी है। उम्मीद है कि इस बैठक में सीटों के बंटवारे को लेकर कोई अंतिम निर्णय हो जाएगा.

जेडीयू नेता मान रहे हैं कि भाजपा के साथ गठबंधन करके राज्य में सरकार चलना ज्यादा सुविधाजनक है और वो दोबारा आरजेडी के साथ नहीं जाना चाहते हैं. बिहार में बीजेपी और जेडीयू लंबे समय तक साझेदार रह चुके हैं और इसलिए उनके बीच तालमेल बनाने में ज्यादा दिक्कत नहीं होती है. इसलिए जेडीयू नेता नहीं चाहते हैं कि बीजेपी के साथ गठबंधन टूटे.

Source: Zee News

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