सवर्णों को बंधुआ ‘मजदूर’ समझते हैं सीएम नीतीश, कहा- हमें छोड़ वोटर जाएंगे किधर, नेता मुंह बंद रखें

राजनीति

एससी एसटी एक्ट पर सवर्ण समाज द्वारा हो रहे बवाल के बावजूद सीएम नीतीश को पूर्ण विश्वास है कि बिहार की जनता उनको छोड़कर कहीं नहीं जाने वाली है। सूत्रों से प्राप्त खबर के अनुसार बताया जा रहा है कि जदयू कार्यकारिणी की बैठक के दौरान सीएम नीतीश ने कहा कि हमारे नेता सिर्फ अपने मुंह पर कंट्रोल बनाएं रखें। बवाल अपने आप शांत हो जाएगा। सवर्ण समाज हमें छोड़कर महागठबंधन की तरफ कदापि नहीं जाने वाले हैं।

सवर्ण समाज को CM नीतीश का झटका, JDU ने कहा- आर्थिक आधार पर गरीबों को नहीं मिल सकता आरक्षण : एक तरफ जहां एससी एसटी पर पूरे देश में बवाल मचा हुआ है वहीं जदयू ने आज साफ कर दिया है कि आर्थिक आधार पर गरीबों को आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता है। जदयू के इस बायान से साफ हो गया है कि कुछ साल पहले नीतीश सरकार द्वारा गठति सवर्ण आयोग मात्र एक जुमला था। बताया जा रहा है कि जदयू कार्यसमिति की बैठक में जब पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह मांग की कि आर्थिक आधार पर सवर्णो को भी आरक्षण मिलना चाहिए। अगर पार्टी इस समय सवर्णों का साथ देती है तो हमें लाभ होगा। हालांकि जदयू नेता ने साफ कह दिया कि आर्थिक आधार पर सवर्णों को आरक्षण नहीं दिया जा सकता है।

SC-ST पर बिहार के सभी सवर्ण नेताओं ने साधी चुप्पी, MP-MLA ने किया अध्यादेश का मौन समर्थन : एससी एसटी एक्ट पर एक तरफ राजधानी पटना सहित पूरे राज्य भर में जहां हाय तौबा मचा हुआ है। वहीं दूसरी ओर इस मामले पर बिहार के सभी सवर्ण नेताओं ने चुप्पी साध ली है। एक तरह से कहा जाए तो वे लोग एससी एससी एसटी एक्ट का समर्थन कर रहे हैं।

ताजा अपडेट के अनुसार ब्राह्मण महासभा सहित अन्य सवर्ण संगठनों ने बार बारी से सवर्ण नेताओं के घर पर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इन लोगों का कहना है कि जो नेता वोट लेने के समय जनेउ-टीक दिखाते हैं वे आज इस मामले में कुछ भी बोलने से इंकार कर रहे हैं। या तो इन लोगों को हमारा साथ देना होगा या चुनाव में हारने के लिए तैयार रहना होगा। उधर दूसरी ओर अपने घर हो रहे विरोध प्रदर्शन पर बिहार सरकार के उद्योग मंत्री जय कुमार सिंह ने कहा कि आश्चर्य की बात है कि एससी एसटी कानून का विरोध सिर्फ सवर्ण समाज के लोग ही कर रहे हैं। यह सही नहीं है। हालांकि वे इसको लेकर पार्टी आलाकमान के सामने बात करेंगे।

इसके बावजूद 2011 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वर्ण आयोग का गठन हुआ। वह आयोग 2015-16 तक कार्यरत रहा। एक जानकारी के मुताबिक़ आयोग पर सरकार ने लगभग बारह करोड़ रू। ख़र्च किया। लेकिन ग़रीब स्वर्णों के कल्याण के लिए आयोग ने क्या अनुशंसा किया, उन अनुशंसाओं पर सरकार ने क्या कार्रवाई की और कितने स्वर्णों का उससे भला हुआ, इसकी जानकारी बिहार की जनता को आजतक नहीं मिली है। हम मुख्यमंत्री जी से माँग करते हैं कि बिहार की जनता को इस संदर्भ में अवगत कराने की ‘कृपा’ करें।

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