Jagmeet Singh

Jagmeet Singh | आखिर कौन हैं ये सिख जो बन सकता हैं कनाडा का अगला प्रधानमंत्री

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बचपन में Jagmeet Singh को कनाडा में रंगभेद का सामना करना पड़ा जिसकी वजह से वे ऐक्टिविज्म में उतरे। ऑन्टैरियो में प्रंतीय लेजिस्लेचर में पहुंचने वाले वह पहले पगड़ीधारी सिख थे।

इसी के साथ जगमीत सिंह कनाडा के इतिहास में पहली बार देश की किसी बड़ी राजनीतिक पार्टी का नेतृत्व करने वाले पहले अश्वेत नेता बन गए हैं।

जगमीत सिंह ने भारत में 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के खिलाफ अपनी आवाज उठाई थी। शायद यही वजह थी कि 2013 में उन्हें भारत का वीजा भी नहीं मिला था।

Jagmeet Singh कनाडा के प्रमुख राजनीतिक दल न्यू डेमॉक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष बन गए हैं। वह पहले ऐसे सिख हैं जो कनाडा की किसी भी पार्टी का नेतृत्व करेंगे। 2019 में कनाडा में प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव होंगे जिसमें जगमीत सिंह लिबरल पार्टी के पीएम ट्रूडो के खिलाफ ताल ठोकेंगे। पेशे से वकील जगमीत कनाडा की तीसरी सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी एनडीपी के पहले अश्वेत नेता बने हैं।

इसी के साथ जगमीत सिंह कनाडा के इतिहास में पहली बार देश की किसी बड़ी राजनीतिक पार्टी का नेतृत्व करने वाले पहले अश्वेत नेता बन गए हैं। वह ऑन्टेरियो प्रोविंस से सांसद भी हैं। पार्टी का अध्यक्ष बनने के लिए हुए चुनाव में सिंह ने 53.6 प्रतिशत वोट हासिल हुए।

इस जीत के बाद उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट करते हुए कहा, ‘धन्यवाद न्यू डेमोक्रैट्स। प्रधानमंत्री की दौड़ अब शुरू हो गई। इसलिए मैंने कनाडा का अगला प्रधानमंत्री बनने के लिए आज से अपना आधिकारिक तौर पर अभियान शुरू कर दिया है।’ इस वक्त कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो हैं।

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उन्होंने भी जगमीत सिंह को नेता चुने जाने पर उन्हें मुबारकबाद दी और कहा कि वह उनके साथ बातचीत करने साथ मिलकर कनाडा के लोगों के हित में काम करना चाहते हैं। उन्होंने पार्टी के अध्यक्ष पद के लिए सांसद चार्ली एंगस, निकी एश्टन और गाई कैरन को हराया। इस चुनाव में चार्ली को 65,782 में से 12,705 और निकी एश्टन को 11,374 वोट मिले। वहीं जगमीत को 35,266 वोट हासिल हुए।

जगमीत सिंह अपने काम के अलावा पहनावे के लिए भी जाने जाते हैं। टाइट सूट बूट, रंग बिरंगी पगड़ी में रहने वाले जगमीत को साइकिल चलाने का भी शौक है। जगमीत सिंह का परिवार काफी पहले ही भारत के पंजाब के बरनाला जिले से कनाडा जाकर बस गया था। बचपन में जगमीत को कनाडा में रंगभेद का सामना करना पड़ा जिसकी वजह से वे ऐक्टिविज्म में उतरे।

ऑन्टैरियो में प्रंतीय लेजिस्लेचर में पहुंचने वाले वह पहले पगड़ीधारी सिख थे। जगमीत ने वेस्टर्न ओन्टेरियो यूनिवर्सिटी से साइंस में ग्रेजुएशन किया है। उन्होंने ऑसगुडे हॉल लॉ स्कूल से लॉ की भी पढ़ाई की है।

जगमीत सिंह ने भारत में 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के खिलाफ अपनी आवाज उठाई थी। शायद यही वजह थी कि 2013 में उन्हें भारत का वीजा भी नहीं मिला था। कनाडा की राजनीति में सिखों की अच्छी खासी तादाद है।

1993 में जब पहली बार गुरबख्श सिंह मल्ली टोरंटो से कनाडा की पार्लियामेंट के लिए सदस्य चुने गए तो उस समय सिर पर पगड़ी बांध कर पार्लियामेंट में शामिल होने की अनुमति नहीं थी। मल्ली इस नस्ली भेदभाव के विरूद्ध डटे रहे तथा उनके पार्लियामेंट में दाखिल होने के लिए कनाडा की सरकार ने यह कानून ही बदल दिया।

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Jagmeet Singh उस वक्त चर्चा में आए थे जब कैंपेन करते वक्त एक महिला ने उन पर इस्‍लामिक कानून शरिया का समर्थन करने का आरोप लगाया था। उस दौरान जगमीत ने उसके किसी सवालों का जवाब नहीं दिया था। सिर्फ लोगों से इतना कहा था कि आओ दिखाएं कैसे प्‍यार से लोगों के साथ पेश आया जाता है।

इसके बाद उन्‍होंने उस महिला को क‍हा, हम आपका स्‍वागत करते हैं, आपका समर्थन करते हैं और आपसे प्‍यार करते हैं। Jagmeet Singh के एनडीपी के अध्यक्ष बनने के बाद उनकी पार्टी के लोगों में खुशी की लहर है। जगमीत भी अब पूरी जोर-शोर से पीएम पद के लिए प्रचार अभियान में लग गए हैं। भारत में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने भी जगमीत के चुने जाने पर खुशी जाबिर की है।

यूट्यूब पर सिखा चुके हैं पगड़ी बांधना

वह एक समय यूट्यूब पर लोगों को पगड़ी बांधना सिखा चुके हैं. इस दौरान उन्होंने कहा था कि पगड़ी सिख समुदाय के पहचान के लिए बहुत जरूरी है.

रंगीन पगड़ियों के शौकीन

वह इस देश के एक प्रमुख संघीय राजनीतिक दल का नेतृत्व करने वाले अल्पसंख्यक समुदाय के पहले सदस्य हैं. साल 1979 में ओंटेरियो के स्कारबोरो में जन्मे सिंह के माता-पिता पंजाब से यहां आए थे. साल 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों के खिलाफ कनाडा में आवाज उठाई थी.

साल 2013 में वह बरनाला के पैतृक गांव ठीकरीवाला आना चाहते थे. लेकिन यूपीए सरकार ने उन्हें वीजा नहीं दिया था. इसके बाद उन्होंने कहा था, क्या मैंने सिखों पर हुए अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई, इसलिए वीजा नहीं दिया गया?

Jagmeet Singh के सामने उस पार्टी को फिर से खड़ा करने की गंभीर चुनौती है जो साल 2015 के चुनाव में 59 सीटों पर हार गई थी. वहां साल 2015 में रिकॉर्ड 20 भारतीय मूल के लोग सांसद बने थे. इनमें 18 पंजाबी मूल के थे.

सिंह ने कहा, इस अभियान से हमारी पार्टी में नए उत्साह का संचार हुआ है. न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी (एनडीपी) वर्तमान में कुल 338 में से 44 सीटों के साथ कनाडा की संसद में तीसरे स्थान पर है. यह पार्टी कभी भी सत्ता में नहीं आई है.

उन्होंने 2001 में यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ओंटारियो से जीवविज्ञान में स्नातक किया और 2005 में यॉर्क यूनिवर्सिटी के ओस्गुड हॉल लॉ स्कूल से कानून की डिग्री भी हासिल किया है. राजनीति में आने से पहले वह ग्रेटर टोरंटो में वकील के तौर पर काम करते थे. कनाडा की जनसंख्या में सिखों की हिस्सेदारी लगभग 1.4 प्रतिशत है. देश के रक्षा मंत्री भी इसी समुदाय से आते हैं.

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