बेटी होना क्या मेरी गलती थी जो पैदा होते ही झाड़ियों में फेंक दिया मां ने मुझे

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मेरा क्या कसूर था मां! जब फेंक ही देना था तो जन्म ही क्यों दिया! ये सवाल उस अबोध नवजात बच्ची की खामोशी से उठते रहे, जो कि मंगलवार की दोपहर झाड़ी में फेंकी पड़ी मिली। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ के जागरूकता वाले इस दौर में हुई घटना के बारे में जो भी सुना, अवाक रह गया।

जन्म के कुछ दिन बाद ही बच्ची को उसके बेरहम मां-बाप ने कपड़े में लपेटकर झाड़ी में फेंक दिया था। मुहल्ले के लोगों ने झाड़ी से जब बच्ची के रोने की आवाज सुनी तो कबैया थाना पुलिस को सूचना दी गई।

पुलिस ने नवजात को सदर अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में इलाज के लिए भर्ती कराया। कबैया थानाध्यक्ष ने बताया कि कवैया रोड जोड़ा मंदिर के पीछे ईंट भट्टा के पास झाड़ी में बच्ची के फेंके जाने की सूचना पर एएसआई को भेजकर बच्ची को इलाज के लिए भिजवाया गया।

मां की ममता इतनी ही बची थी कि कपड़े में लपेट दिया था। बच्ची को देखने से ऐसा लगता था कि उसका जन्म कम से कम एक सप्ताह पहले हुआ होगा। नवजात का नाभि सुखी हुई थी। गर्मी एवं धूप के कारण बच्ची को रो रोकर बुरा हाल हो गया था।

गनीमत था कि बच्ची को झाड़ी में फेंकने से पहले उसके मां ने कपड़ा में लपेट दिया था। अन्यथा बच्ची जिंदा नहीं रहती और एक नवजात मां की ममता के अभाव में दम तोड़ देती।

सदर अस्पताल प्रबंधक नंद किशोर भारती ने कहा कि नवजात बच्ची की स्थिति सामान्य बनी हुई है। बच्ची का इलाज कर रहे चिकत्सिक डा. विभीषण कुमार के मुताबिक 24 घंटे के बाद ही बच्ची के स्वास्थ्य के बारे में कुछ कहा जा सकेगा।

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