मोदी कैबिनेट के ये नये मंत्री प्रशासनिक दक्षता में बेमिसाल है, कभी थे सिख दंगा के वक्त पटना के डीएम

राजनीति

केंद्रीय गृह सचिव के पद से रिटायरमेंट के बाद लोकसभा सांसद और अब नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री। प्रशासनिक दक्षता में राजकुमार सिंह (आरके सिंह) बेमिसाल है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1975 बैच के अधिकारी आरके सिंह पटना के डीएम भी रह चुके हैं।

उन्होंने तीन मई 1983 से 5 मई 1985 तक पटना के जिलाधिकारी के पद पर अपनी सेवा दी थीं। उसी समय सिख दंगे भी हुए थे। आरके सिंह ने इस दौरान पटना में शांति-व्यवस्था बनाए रखने में बड़ी भूमिका निभाई थी।

31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या की खबर आते ही पटना में सिख विरोधी दंगों की नौबत बन आई थी। दुकानें जलाई जाने लगी थीं। शहर में समुदाय विशेष के प्रति आक्रोश को देखते हुए आरके सिंह ने तत्काल कफ्र्यू लागू कर दिया। 48 घंटे के बाद थोड़ी देर के लिए कफ्र्यू में ढील देते हुए शांति-व्यवस्था बनाए रखने में कामयाबी मिली।
आरके सिंह के साथ भारतीय पुलिस सेवा के सख्त अधिकारी किशोर कुणाल 12 जुलाई 1984 तक एसएसपी के रूप में कार्यरत थे। डीएम और एसएसपी के बीच का वह तालमेल शहर के लिए बेहतर प्रशासन के लिए याद किया जाता है।

1990 में रथ यात्रा के दौरान बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी को इन्होंने गिरफ्तार करने वाले आरके सिंह पूर्व गृह सचिव रह चुके हैं।

आरके सिंह ने बिहार चुनाव में टिकट बंटवारे पर नाराजगी जताते हुए अपनी ही पार्टी पर निशाना साध चुके हैं। आरके सिंह ने पार्टी नेतृत्व पर पैसे लेकर टिकट देने का आरोप लगाया था। हालांकि, पार्टी ने उन्हें राजनीति में नया बताकर उनके आरोपों को खारिज कर दिया था।

बेबाकी के लिए हैं मशहूर
अपनी बेबाक राय के लिए पहचाने जाने वाले आरके सिंह ने कहा था गृह सचिव रहते जिनके खिलाफ मुझे कार्रवाई के आदेश मिलते थे उन्हें अब टिकट दिया जा रहा है। पार्टी के मौजूदा विधायकों का टिकट काटकर पैसे लेकर अपराधियों और बाहुबलियों को टिकट दिया जा रहा है।

टिकट बंटवारे का कई बार किया विरोध
आरा से भाजपा सांसद ने इसके लिए सीधे प्रदेश के नेतृत्व को जिम्मेदार ठहराया था। सिंह ने कहा था कि बिना कारण कई लोगों का टिकट काटा गया इसलिए टिकट वितरण पर फिर से विचार होना चाहिए।

सिंह ने कहा कि साफ-सुथरी सरकार देने का वायदा कर रही भाजपा ने योग्य और कर्मठ कार्यकर्ताओं को दरकिनार करते हुए बिहार में कई जगह अपराधियों को भी टिकट दे दिए हैं। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में बहुत नाराजगी है। सिंह ने पार्टी के फाउंडर मेंबर रहे कैलाशपति मिश्रा की बहू का टिकट काटने को लेकर भी सवाल उठाए थे।
उन्होंने पूछा था कि हारने वालों का टिकट क्यों नहीं काटा गया? ऐसे में आप में और लालू में क्या अंतर है? वहीं खबर है कि चुनाव से पहले इस तरह मीडिया में अपनी नाराजगी जताने पर पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें संयम बरतने को कहा है।

जिलाधिकारी रहते आडवाणी को किया था गिरफ्तार
बिहार की आरा सीट से लोकसभा सीट से सांसद आरके सिंह वही ऑफिस हैं जिन्होंने जिन्होंने साल 1990 में सोमनाथ से अयोध्या की यात्रा पर निकले लालकृष्ण आडवाणी का रथ बिहार के समस्तीपुर में रोक लिया था।

आर के सिंह उस समय समस्तीपुर के जिलाधिकारी थे। 1975 बैच के बिहार कैडर के आईएएस अधिकारी आर के सिंह जून 2011 में केंद्रीय गृह सचिव बने थे और दो साल बाद जून 2013 रिटायर हुए।

साल 1990 में रथयात्रा के दौरान लालकृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी पूर्व केन्द्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने, क्योंकि वह बिहार में तैनात थे।

इस घटना के बाद बीजेपी ने तत्कालीन वीपी सिंह सरकार से समर्थन वापस ले लिया था जिससे सरकार गिर गई थी। बता दें कि बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद ने 23 अक्तूबर 1990 को समस्तीपुर में आडवाणी को गिरफ्तार करने का आदेश दिया था।

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