नेपाली सुप्रीम कोर्ट ने दिया शेर बहादुर को पीएम बनाने का आदेश, केपी ओली को बड़ा झटका

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नेपाल के अंतरिम प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को वहां की सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने राष्‍ट्रपति व‍िद्यादेवी भंडारी के फैसले को पलटते हुए शेर बहादुर देउबा को प्रधानमंत्री बनाने का आदेश दिया है। इस फैसले से अंतरिम पीएम केपी शर्मा ओली को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस के अध्‍यक्ष शेर बहादुर देउबा को दो दिन के अंदर प्रधानमंत्री बनाने का आदेश दिया है। इससे पहले विपक्षी दलों के बहुमत नहीं जुटा पाने पर राष्‍ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने दोबारा ओली को कार्यवाहक पीएम बना दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने राष्‍ट्रपति के संसद को भंग करने के फैसले को पलट दिया है।

राष्ट्रपति ने 22 मई को संसद भंग करने का निर्णय़ करने के साथ 12 और 19 नवंबर को दो चरणों में चुनाव कराने का निर्णय किया था.सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अगले सात दिनों में संसद की बैठक बुलाई जा सकती है. देउबा के प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें संसद में अपना बहुमत साबित करना होगा. ऐसे में देखना होगा कि प्रचंड की अगुवाई कम्युनिस्ट पार्टी का धड़ा किस ओर रुख करता है.

सुप्रीक कोर्ट ने संसद को भंग करने के लिए दायर की गई याचिकाओं पर दिए अपने अंतिम फैसले में कहा कि राष्‍ट्रपति दो दिन के अंदर शेर बहादुर देउबा को पीएम पद की शपथ दिलाएं। इससे पहले ओली के वकीलों ने दलील दी थी कि सुप्रीम कोर्ट शेर बहादुर देउबा को पीएम बनाने के लिए आदेश जारी नहीं कर सकता है। कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए नई सरकार का रास्‍ता साफ कर दिया।

नेपाली सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ प्रतिनिधि सभा को भंग करने के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी. जस्टिस चोलेंद्र शमशेर राणा की अगुवाई वाली पांच सदस्य संविधान पीठ ने कहा कि राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी का पीएम केपी शर्मा ओली की सिफारिश पर संसद भंग करने का फैसला करना असंवैधानिक था. नेपाली कांग्रेस शेर बहादुर देउबा ने इस फैसले को चुनौती दी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने 18 जुलाई को संसद की बैठक बुलाने का भी आदेश दिया है। सदन में मतदान के दौरान पार्टी का व्हिप भी लागू नहीं होगा। इससे पहले संसद में हुए विश्‍वासमत प्रस्‍ताव पर वोटिंग के दौरान तमाम खींचतान के बाद भी विपक्षी दल नई सरकार बनाने के लिए सदन में बहुमत जुटाने में असफल रहे थे। ओली के विश्वास मत खोने के बाद राष्ट्रपति ने सरकार गठन की समयसीमा तय की थी, लेकिन नेपाल के राजनीतिक दल अपने धड़ों के बीच गुटबाजी के चलते अभी तक इस मामले पर कोई सहमति कायम नहीं कर पाए और ओली फिर से पीएम बनाए गए थे।

विश्वास प्रस्ताव के दौरान कुल 232 सदस्यों ने मतदान किया था जिनमें से 15 सदस्य तटस्थ रहे। ओली को 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में विश्वासमत जीतने के लिए 136 मतों की जरूरत थी क्योंकि चार सदस्य इस समय निलंबित हैं। हालांकि, उन्हें सिर्फ 93 वोट मिले थे और वह बहुमत साबित नहीं कर सके थे। इसके बाद संविधान के आधार पर उनका PM पद चला गया था।

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