21 साल की उम्र में 21 बार रक्तदान कर चुके हैं नीरज, राष्ट्रपति करेंगे सम्मानित

प्रेरणादायक

अस्पताल में भर्ती बीमार बहन को खून नहीं मिला था। रिश्तेदार भी रक्तदान से पीछे हट गए थे। फलस्वरूप खून के अभाव में उसकी मौत हो गई। ऐसा शेरघाटी के दखिनखाप गांव के रहनेवाले नीरज कुमार के साथ हुआ था। इस वाकए के बाद नीरज ने मन ही मन में शपथ ली कि अब खून की कमी से किसी भाई की कलाई सूनी नहीं होगी।

  इसके बाद उन्होंने रक्तदान का जो सिलसिला शुरू किया, वह अब तक जारी है। उन्होंने 21 साल की उम्र में 21 बार रक्तदान किया। देहदान भी कर दिया। कई सामाजिक कार्यों में बढ़ कर हिस्सा लेते रहे। कई अवार्ड भी अपने नाम किए। उनकी मुहिम की लोकप्रियता का आलम यह है कि उन्हें इंदिरा गांधी नेशनल सर्विस स्कीम अवार्ड के लिए चयन कर लिया गया। इसी माह राष्ट्रपति भवन में महामहिम रामनाथ कोविंद के हाथों अवार्ड मिलेगा। भारत सरकार के सचिव आईबी लेंका द्वारा इस संबंध में पत्र भेजा है।
काॅलेज में एनएसएस से जुड़ने के बाद स्वच्छता, पोलियो, पर्यावरण, पौधारोपण आदि कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने के कारण यूथ कैटेगरी में पटना की संस्था मां वैष्णोदेवी द्वारा दो बार अवार्ड दिया जा चुका है।
समिति को शरीर भी कर चुके हैं दान
दखिनखाप गांव के रहनेवाले किसान रामस्वरूप यादव के पुत्र नीरज पटना के एएन काॅलेज में पढ़ाई कर रहे हैं। काॅलेज में चलनेवाले राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) द्वारा आयोजित कार्यक्रम से वे इतना ज्यादा प्रभावित हुए कि सामाजिक कार्यों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेना शुरू कर दिया।
इस दौरान इकलौती  बहन की मौत दिमाग में घूमती रहती थी। कार्यक्रम के दौरान ही एनएसएस से प्रेरणा मिली और रक्तदान शुरू किया। इसी साल दधीचि देहदान समिति, पटना को अपना शरीर भी दान कर दिया। मौत के बाद भी मानव शरीर सात लोगों को जीवन दान दे सकता है, आंखों की रोशनी दे सकता है।
180 बार रक्तदान का लिया है संकल्प
2012 से लेकर 2017 तक 21 बार रक्तदान किए हैं। वे एक साल में चार बार रक्तदान करते हैं। पूरी जिंदगी में 180 बार रक्तदान करने का संकल्प लिया है। वे कहते हैं कि तीन माह में नया खून बनता है। इसलिए युवाओं को रक्तदान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। एक बार रक्तदान करने से तीन लोगों का जीवन बचाया जा सकता है।

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