नदी नाले पुल पुलिया कहीं भी लगाया हो तंबू, जाति आधारित जनगणना में सब होंगे शामिल

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बिहार में जाति आधारित गणना के दायरे में हर नागरिक को शामिल करने की तैयारी हो गयी है। पक्के और कच्चे मकानों के अलावा अवैध, अस्थायी व कब्जा की गयी जमीन पर रहने वाले भी जातीय जनगणना में शामिल होंगे। जातीय जनगणना में पुल-पुलिया या नदी-नालों के किनारे अस्थायी त्रिपाल या प्लासटिक की छत बनाकर या झोपड़ी में रहने वालों की गिनती की भी व्यवस्था की गई है।

राज्य सरकार ने जाति आधारित गणना को लेकर पूरी प्रक्रिया निर्धारित कर दी है। जानकारी के मुताबिक गणना दो चरणों में संपन्न कराई जाएगी। पहले चरण में भवन व मकानों के साथ अस्थायी आवासों को सूचीबद्ध करते हुए उन्हें नंबर दिया जाएगा। इसके लिए वार्ड को ब्लॉक और उप-ब्लॉक में बांटा जाएगा। दूसरे चरण में वास्तविक गणना का काम होगा। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। सभी जिलाधिकारियों को विस्तृत जानकारी भेज दी गई है। गणना से जुड़े सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को जारी की गयी सूचना को पूर्ण रूप से  पालन करने को कहा गया है।

घर के उपयोग की ली जाएगी जानकारी

पुल-पुलिया के नीचे, रेलवे ट्रैक के आस पास, नहर, नदी,नाले के अलग अलग किनारों पर रहनेवालों की भी गिनती की जाएगी। यहां तक कि सब्जी मंडी और बाजार भी नंबरिंग के दायरे में आएंगे। कुछ स्थान जहां छत हो और कोई दीवार न हो लेकिन खम्भों के सहारे फूस, त्रिपाल, प्लास्टिक की छत बनी हो या सिमेंटेड छत हो तथा फर्श तीन फीट ऊंचा हो और वहां लोग रात में सोते या रहते हैं तो ऐसे स्थान की भी नंबरिंग कर गणना की जाएगी। मकान नंबरिंग के बाद उसके उपयोग के उद्देश्य को भी दर्ज किया जाएगा। मकान, व्यावसायिक या फिर आवासीय है। मकान के अधीन परिवारों की कुल संख्या व परिवारों का क्रम भी अंकित किया जाएगा।

 

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