नौकरी पर टूट रहा सब्र का बांध, नई सरकार के 20 दिन में बेरोजगारों के दो बड़े प्रदर्शन

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बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में महागठबंधन की नई सरकार बनने के बाद बेरोजगार युवाओं के सब्र का बांध टूट रहा है। सरकार बनने के 20 दिन के भीतर ही अभ्यर्थियों ने दो बड़े प्रदर्शन किए, जिससे नीतीश सरकार सवालों के घेरे में आ गई। डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने शपथ लेते ही वादा किया था कि बिहार में जल्द ही बंपर नौकरियां निकलेंगी। इसके बाद सीएम नीतीश कुमार ने भी 20 लाख लोगों को रोजगार देने का वादा कर दिया। लेकिन अभी तक सरकार की ओर से नई नौकरियों को लेकर कोई घोषणा नहीं हुई। ऐसे में राज्य के युवा बेचैन हैं कि कब सरकार नई भर्तियां निकालेगी और कब उन्हें नौकरी मिलेगी।

पटना में कई दिनों से सीटीईटी और बीटीईटी पास अभ्यर्थी सरकार के खिलाफ धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया, तो पुलिस-प्रशासन ने लाठीचार्ज कर दिया। इसमें कई छात्र घायल हुए और नीतीश सरकार की किरकिरी भी हुई। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी सातवें चरण की शिक्षक बहाली की प्रक्रिया को जल्द शुरू करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि तेजस्वी यादव ने उनसे वादा किया था कि सरकार बनते ही सातवें चरण की शिक्षक भर्ती शुरू हो जाएगी। लेकिन अभी तक नोटिफिकेशन नहीं निकला है। अब छात्रों ने सरकार को 5 सितंबर तक का अल्टीमेटम दिया है। अगर तब तक उनकी मांगें पूरी नहीं हुई तो लाखों छात्र पूरे बिहार में आंदोलन करेंगे।

बीपीएससी अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, बैकफुट पर सरकार

हाल ही में पटना में बीपीएससी संयुक्त परीक्षा के अभ्यर्थी सड़कों पर उतर गए। वे परीक्षा के शेड्यूल और नई पर्सेंटाइल प्रणाली का विरोध कर रहे थे। उनपर भी पुलिस ने लाठीचार्ज किया। हालांकि, बवाल बढ़ने के बाद सीएम नीतीश कुमार ने गुरुवार को उच्चस्तरीय बैठक बुलाई और बीपीएससी के फैसले को पलट दिया। नीतीश सरकार को छात्रों की मांगों के आगे झुकना पड़ा। अब बीपीएससी 67वीं प्री एग्जाम 21 सितंबर को एक ही पाली में आयोजित किया जाएगा।

युवाओं को नई सरकार से उम्मीद

बिहार में 2020 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान तेजस्वी यादव ने वादा किया था कि वे सत्ता में आएंगे तो 10 लाख नौकरियां देंगे। हालांकि, उस समय महागठबंधन को जीत नहीं मिली थी। पिछले महीने नीतीश कुमार के एनडीए से नाता तोड़कर महागठबंधन के साथ आने से तेजस्वी यादव डिप्टी सीएम बन गए। उसके बाद राज्य के लाखों बेरोजगार युवाओं की उम्मीदें बढ़ गईं। नीतीश कुमार ने एक कदम आगे जाकर 20 लाख लोगों को रोजगार देने का वादा कर दिया।

हालांकि, सरकार की ओर से ये साफ नहीं किया गया है कि इतनी नौकरियां कैसे पैदा की जाएंगी। क्योंकि बिहार की अर्थव्यवस्था ज्यादातर कृषि पर आधारित है और इंडस्ट्री ग्रोथ बहुत कम है। ऐसे में सरकार के पास लाखों नौकरियों देने के लिए बजट जुटाना भी बड़ी चुनौती है। फिर भी राज्य के बेरोजगार छात्र एवं युवा नई सरकार की ओर टकटकी लगाकर बैठे हुए हैं।

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