नल के जल का इंतजार कर रहे हैं इस पंचायत के 72 घर, पीतल की जगह लगाई प्लास्टिक की टोटी; ये बोले बीडीओ

जानकारी

हर घर नल का जल योजना पर साल 2016 में काम शुरू हुआ और सरकारी आंकड़ों की माने तो प्रत्येक वार्ड में नल का जल पहुंचाया जा चुका है। लेकिन ग्रामीण स्तर पर इसकी तस्वीर कुछ अलग बयां कर रही है। रतनी प्रखंड की मुरहारा पंचायत इसकी पड़ताल की गयी तो कई वार्डों में इसका लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। इस पंचायत में 14 वार्ड हैं। लेकिन वार्ड चार की हालत सबसे खराब है। वार्ड चार के 72 घरों में अबतक नल का जल नहीं पहुंचाया जा सका है।

हमीनपुर गांव निवासी जेडीयू के प्रखंड अध्यक्ष रामप्रवेश कुशवाहा ने बताया कि उनके पंचायत के वार्ड नंबर 3, 9,10 एवं 12 में लोगों को नल का जल की सुविधा नहीं मिल रही है। वार्ड नंबर 4 के 72 घरों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। वहीं उतरा पट्टी गांव के कुछ लोगों के घरों तक नहीं पहुंचा है।

मुरहारा की महिलाओं ने बताया कि उनके गांव में नल का जल योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। काफी दिनों से जलापूर्ति योजना बंद है। पानी के लिए पाइप और नल बिछाए गए हैं। लेकिन नल से पानी अभी तक सुचारू ढंग से शुरू नहीं हो पाया है। जब व्यवस्था शुरू की गई थी तब कुछ दिन तक पानी आया उसके बाद से पानी की आस में वो बैठी हैं। नल के पानी के इंतजार में एक साल से उपर का वक्त बीत चुका है।

पीतल की जगह लगायी गयी प्लास्टिक की टोटी

योजना की शुरुआत के मौके पर बताया गया था कि जिस नल से पानी निकलेगा उसकी टोटी पीतल की होगी। ताकि नल जल्दी खराब न हो सके। लेकिन यहां हमें नल की टोटी प्लास्टिक की नजर आई वो भी इस्तेमाल हुए बगैर ही दम तोड़ चुकी है। जिन लोगों के घरों तक पानी के लिए नल की टोटी लग गई वो तो खुशकिस्मत निकले। क्योंकि हमें कई ऐसे लोग भी मिले जिनके घर तक नल के जल के लिए टोटी तक भी नहीं पहुंच पाई है।

कई लोगों के घरों तक पाइप बिछाकर ही छोड़ दिया गया है। कहीं पाइप लगी है तो टोंटी नहीं, कहीं टोंटी लगी तो पाइप नदारद, कहीं पानी की टंकी लगी है तो मोटर खराब, कहीं सब कुछ लगा है तो घटिया समाग्री योजना को मुंह चिढ़ाता नजर आ रहा है। गर्मी का मौसम है ऐसे में हैंडपंप का गंदा पानी ही इनके लिए एक मात्र जीने का साधन बना हुआ है।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इस योजना में गड़बड़ी के लिए जिम्मेवार कौन हैं। काम की गुणवत्ता को जांचने के लिए योजना के तहत बनी पानी की टंकी की हकीकत को जानने के लिए मुरहरा मुसहर टोली के पास पहुंचे। लेकिन वहां की तस्वीर और हैरान करने वाली थी। पानी की टंकियों को रखने एवं ऑपरेटर के रहने के लिए रूम नहीं बना था। जबकि सरकार की योजना लोहे की चादर से रूम बनाने की है। यहां पर सिर्फ लोहे के खंभे गड़े हुए थे। उसी लोहे के खंभे पर बिजली का मीटर भी लगा हुआ है जो किसी खतरे को दावत दे रहा है।

क्या कहते हैं बीडीओ

प्रखंड विकास पदाधिकारी गायत्री देवी ने बताया कि नल जल से बंद होने की सूचना नहीं है। पंचायत सचिव से इस संबंध में जानकारी प्राप्त की जाएगी। सभी लोगों तक नल का जल पहुंचाने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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