आजादी के बाद दूसरी बार 15 अगस्त के दिन नागपंचमी

आस्था

पटना: इस बार नागपंचमी का पर्व विशेष है। दरअसल आजादी के बाद दूसरी बार 15 अगस्त के दिन नागपंचमी आ रही है। ज्योतिष के अनुसार भारत देश की कुंडली में पूर्ण कालसर्प योग है। इसलिए इस बार यह पर्व खास बन रहा है। इस दिन देश में सुख-समृद्धि और शांति के लिए उपाय किए जा सकते हैं। इसके साथ ही इस दिन कई विशेष योग भी बन रहे हैं।

ज्योतिषाचार्य पं.अमर डब्बावाला के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी के दिन नागपंचमी मनाई जाती है। इस बार पंचमी 15 अगस्त को आ रही है। इसलिए यह अवसर विशेष बन पड़ा है, क्योंकि भारत की कुंडली में सर्पयोग है।

इससे पूर्व 38 साल पहले 15 अगस्त 1980 पर यह संयोग बना था। इस बार की नागपंचमी इसलिए भी खास है कि इस दिन सुबह 6.07 बजे से शाम 4.16 बजे तक सर्वार्थसिद्धि योग रहेगा। इसके बाद रवियोग आरंभ होगा। विशेष दर्शन-पूजन व काम्य अनुष्ठान के लिए यह दिन शुभ है।

देश इसलिए समस्याओं से घिरा… क्योंकि कालसर्प योग

ज्योतिषाचार्य का कहना है कि 14-15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि के समय पुष्य नक्षत्र तथा चंद्रमा व चार अन्य ग्रह सूर्य, बुध, शुक्र, शनि की साक्षी में पंचग्रही योग था। साथ ही पूर्ण कालसर्प योग था। इस कारण देश की कुंडली में ही कालसर्प योग है। इसलिए निरंतर आतंकवाद, प्राकृतिक आपदा, जातिवाद, पड़ोसी देशों से विवाद सहित अन्य समस्याएं सामने आती हैं। इस बार नागपंचमी का अवसर इस दोष के निवारण के लिए सर्वाधिक उचित है।

सालभर बाद खुलेंगे नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट

ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के शीर्ष पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी के दिन ही खुलते हैं। 14 अगस्त की मध्यरात्रि 12 बजे महानिर्वाणी अखाड़े के महंत मंदिर के पट खोलेंगे। देशभर से आस्थावान दर्शन के लिए उमड़ेंगे। 15 अगस्त की रात्रि 12 बजे मंदिर के पट एक साल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

Source: Dainik Jagran

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