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उत्तर बिहार के बेताज बादशाह रहे मुन्ना शुक्ला को विरासत में मिला था अंडरवर्ल्ड डॉन का खिताब

एक बिहारी सब पर भारी
उत्तर बिहार की राजधानी कहे जाने वाले मुजफ्फरपुर में 1980-90 के दशक में छोटन शुक्ला और भुटकुन शुक्ला का राज चलता था.

छोटन शुक्ला और भुटकुन शुक्ला की हत्या के बाद शुक्ला एंड कंपनी की पूरी कमान छोटे भाई मुन्ना शुक्ला के हाथों में आई और मुन्ना बाहुबल के बल पर विधायक भी बन गए. एक बार फिर इस तरह से शुक्ला एंड कंपनी ने उत्तर बिहार में अपना वर्चस्व कायम करना शुरू कर दिया. मुन्ना शुक्ला को डॉन का खिताब अपने बड़े भाई छोटन शुक्ला से विरासत में मिला. मुन्‍ना शुक्‍ला का असली नाम है विजय कुमार शुक्‍ला. मुन्‍ना तीन बार विधायक रह चुके हैं.

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मुन्‍ना की प्रारंभिक पढ़ाई गांव में ही हुई. मुन्‍ना शुक्‍ला पहली बार 2000 में निर्दलीय विधायक बने. 2005 में लालगंज सीट से लोक जनशक्ति पार्टी के टिकट पर विधायक बने. उसी साल अक्‍टूबर में दोबारा हुए चुनावों में मुन्‍ना फिर विजयी रहे लेकिन इस पर जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर. शुक्‍ला ने बाद में वैशाली लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्‍मीदवार के रूप में लोकसभा चुनाव में भी किस्‍मत आजमाई लेकिन आरजेडी के रघुवंश प्रसाद सिंह से हार गए. बाद में ब्रिज बिहारी प्रसाद की हत्‍या के मामले में दोषी पाए जाने के बाद उनके चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी गई थी.

 

कोई बताता है कि मुन्ना जेल में डांस देखते थे, कोई कहता है कि 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश ने उन्हें टिकट दिया है क्योंकि डर था कि कहीं लालगंज से मुन्ना निर्दलीय उम्मीदवार ना खड़े हो जाएं. मुन्ना शुक्ला का कहना है, ‘मैं कभी किसी से टिकट मांगने नहीं गया, सब खुद दे देते हैं’. बता दें अपनी आपराधिक रसूख को बढ़ाने के लिए मुन्ना शुक्ला ने भी राजनीति की शरण ली और बन गए बाहुबली विधायक.

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गोपालगंज के जिलाधिकारी की हत्या समेत कई अन्य आपराधिक मामले इन पर चल रहे थे. वहीं, बिहार के पूर्व मंत्री बृजबिहारी प्रसाद की हत्या के मामले में अदालत ने मुन्ना शुक्ला को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. जेल के अंदर रहते हुए जहां नर्तकी के डांस का लुत्फ उठाते हुए मीडिया में उनके फोटोग्राफ आए, तो कभी पीएचडी की डिग्री हासिल करने की खबर.

मुन्ना शुक्ला पारिवारिक पृष्टभूमि के कारण अपराध जगत में कुख्यात होते चले गए. उत्तर बिहार के अंडरवर्ल्ड डॉन का खिताब उन्हें विरासत में मिला. दरअसल, मुन्ना शुक्ला के बड़े भाई छोटन शुक्ला अपराध जगत के बेताज बादशाह माने जाते थे. छोटन का आपराधिक सफर यूनिवर्सिटी से शुरु हुआ. बाद में वे ठेकेदारी से जुड़े. उत्तर बिहार के हर बड़े प्रोजेक्ट पर उन्होंने कब्जा जमाया. दूसरी ओर अंडरवर्ल्ड में वर्चस्व बनाए रखने की जंग में भी वे शामिल रहे. इसी कारण उनकी हत्या 1994 में हुई. मुन्ना शुक्ला के पिता रामदास शुक्ला मुजफ्फरपुर के वकील थे.

मुजफ्फरपुर में ही वे ही अपने परिवार के साथ रहते थे. चार भाइयों में तीसरे नंबर पर हैं मुन्ना शुक्ला. सबसे बड़े भाई कौशलेंद्र उर्फ छोटन शुक्ला थे. उनसे छोटे अवधेश उर्फ भुटकुन शुक्ला थे. तीसरे नंबर पर मुन्ना शुक्ला हैं. उनसे छोटे भाई का नाम ललन शुक्ला उर्फ मारू मर्दन शुक्ला है. राजनीतिक कद व अपने प्रभाव से तमाम छोटे-बड़े मामलों से वे अपना पिंड छुड़ा चुके थे. जी कृष्णैया व बृजबिहारी हत्याकांड, ये दो बड़े मामले उन पर चल रहे थे. निचली अदालत के फैसले के विरुद्ध उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दायर कर रखी थी. विधानसभा चुनाव बाद ही कोर्ट का फैसला उनके पक्ष में आया. दोनों बड़े मामलों में बरी कर दिए गए.

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