आपने खाये हैं मगध के मूंग के लड्डू?

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1775 के आसपास नजीर अकबराबादी अपनी कविता हमें अदाएं दिवाली की ज़ोर भाती हैं, में लिखते हैं कि मगध के मूंग के लड्डू से बन रहा संजोग, दुकां-दुकां पे तमाशे यह देखते हैं लोग. खिलौने नाचें हैं तस्वीरें गत बजाती हैं, बताशे हंसते हैं और खीलें खिलखिलाती हैं. जो बालूशाही भी तकिया लगाये बैठे हैं, तो लौंज खजले यही मसनद लगाते बैठे हैं. उठाते थाल में गर्दन हैं बैठे मोहन भोग. यह लेने वाले को देते हैं दम में सौ-सौ भोग.

यह मगध के मिष्ठान्न की उस परंपरा का एक ऐतिहासिक आख्यान है जो यह बताता है कि मगध साम्राज्य में मिठाईयों का कितना महत्व रहा होगा. आज भले दुकानों से मूंग के लड्डू गायब हो गये हैं लेकिन मगध के घरों में इसे बनाने का क्रम अभी भी जारी है. खेतों से खड़ी मूंग घर पर आते ही इसकी तैयारी शुरू हो जाती है. इसके लड्डू दो प्रकार से बनाये जाते हैं. पहला तरीका यह होता है कि खड़े मूंग को भिगों कर मिक्सी में पीस लिया जाता है और उसके बाद मूंग को देसी घी में भूना जाता है. उसके बाद शक्कर चूर्ण मिलाकर लड्डू का शक्ल दे दिया जाता है.

मूंग दाल का लड्डू ऐसे बनाया जाता है:
मूंग की दाल को धो कर 3-4 घंटे के लिये पानी में भिगो दीजिये. दाल को धो कर पानी से निकाल लें और मिक्सी में पीस लीजिए. बादाम को भी मिक्सी में पीस कर पाउडर बना लीजिए, काजू को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लीजिए. पिस्ता को लंबाई में पतला-पतला काट लीजिए और इलायची को छील कर पाउडर बनाइए. कढ़ाई में घी डाल कर हल्का गरम कर लीजिये और इसमें दाल डाल दीजिए.

दाल के अच्छे से भून जाने पर दाल का कलर चेंज होने लगता है, दाल से घी अलग होता दिखता है और अच्छी महक भी आने लगती है. दाल भून कर तैयार है. दाल को प्याले में निकाल कर थोड़ा ठंडा होने दीजिए. दाल के हल्का ठंडा होने पर इसमें बादाम का पाउडर, कटे हुए काजू, इलायची पाउडर और बूरा डाल कर सभी चीजों को अच्छे से मिलने तक मिक्स करने के बाद हाथों में थोड़ा-थोड़ा मिश्रण लेकर इस मिश्रण को दबा-दबाकर इसके लड्डू बनाये जाते हैं.

– Ravishankar Upadhyay

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