कहा जाता है ना सुकून से सोने के लिए बिस्तर का होना जरूरी नहीं। अगर झोपड़ी में सुकून मिले तो वो ही कहीं महल से ज्यादा अच्छा है। बात करते है बिहार के एक ऐसे ही सोच रखने वाले युवा मृणाल सिंह की।

जो कि समस्तीपुर जिले के सोंगर गांव से ताल्लुक रखते है। इनके बारे में आपको बताने से पहले  इनके बचपन के कुछ ऐसे पल के बारे में बताते है जिसे सुन कर बिहार के युवा उन्हें अपना आदर्श मानेंगे।

मृणाल से जब हमारी बात हुई तो हमने उनके शिक्षा के बारे में जानना चाहा । मृणाल ने बताया कि उनकी प्रारंभिक एवं हाई-स्कूल तक की शिक्षा समस्तीपुर से हुई है।

इसके  बाद जब ये इंजीनियरिंग की तैयारी करने के लिए  पटना आए तब उस समय इनके पास मात्र 1700 रुपए थी, इन्होंने अपनी स्टडी पूरी करने के लिए बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया और अपना पढ़ाई जारी रखा। आगे चल कर मृणाल ने निफ्ट के कॉम्पटिशन का एग्जाम  दिया जिसमें इनका सेलेक्शन हो गया।

पढ़ाई के साथ साथ इन्होंने सोसाइटी को बहुत ज्यादा करीब से महसूस किया। पढ़ाई खत्म करने के बाद इन्होंने प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान में सहयोग करने के लिए एक पर्सनल कॉल ऑन ड्यूटी नाम की मुहिम छेड़ी।

जिसके तहत पटना के विभिन्न इलाकों में सफाई और डस्टबिन रखवाना शुरू किया। ये मुहिम लगभग 3 साल से इन्होने शुरू की है, जब हमने पूछा कि इसके बारे में मीडिया में आज तक कोई खबर नही आया, क्या आपको  पब्लिसिटी की जरूरत  नहीं, तब इन्होंने बताया कि जरुरी नही की हर काम पब्लिसिटी के लिए किया जाए मुझे पब्लिसिटी की जरूरत नहीं , तब हमने माना कि ऐसी सोच अगर बिहार के सभी युवा की हो जाए तो बिहार बदल सकता है ।

इनके काम के बारे में आपको बता दें, तो सबसे बड़ी बात ये है कि एक समय इनके पास पढाई करने को पैसे नही होते थे और वो आज करोड़ो में खेल रहे है ,बिहार के इस लाल को सलाम ।

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