संसद में गुस्सा दिखाना पड़ा महंगा, सुपौल की सांसद समेत छह सस्पेंड

राजनीति

लोकसभा में सोमवार को बोफोर्स मुद्दे पर जमकर हंगामा। हालात ये बन गए कि कांग्रेस सांसदों ने सदन में कागज उछाले।सत्ता के पक्ष के सांसदों ने इसका विरोध किया। बाद में स्पीकर सुमित्रा महाजन ने छह सांसद को सस्पेंड कर दिया। जिसमें सुपौल से सांसद रंजीता रंजन भी शामिल हैं। इसके अलावा गौरव गोगोई, के सुरेश, अधीरंजन चौधरी, सुष्मिता देव और एमके राघवन को पांच दिन के लिए सस्पेंड किया गया है।

बता दें कि बोफोर्स घोटाले में 31 साल बाद रिपब्लिक टीवी की इन्वेस्टिगेटिव स्टोरी में स्वीडन के पूर्व चीफ इन्वेस्टिगेटर ने तीन दावे किए हैं। पहला- ”राजीव गांधी बोफोर्स डील में गैरकानूनी तरीके से हो रहे पेमेंट्स के बारे में जानते थे।” दूसरा- ”राजीव गांधी ने स्वीडिश पीएम से एक फ्लाइट में पेमेंट्स के बारे में चर्चा की थी।” तीसरा- ”राजीव चाहते थे कि बोफार्स डील के बदले स्वीडिश पीएम भी फंड्स रिसीव करें।” ये हंगामा तब शुरु हुआ जब सदन में बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने इस मुद्दे को उठाया।
बोफोर्स तोप घोटाले को आजाद भारत के बाद सबसे बड़ा मल्टीनेशनल स्कैम माना जाता है। 1986 में हथियार बनाने वाली स्वीडन की कंपनी बोफोर्स ने भारतीय सेना को 155mm की 400 तोपें सप्लाई करने का सौदा किया था। यह डील 1.3 अरब डाॅलर (डॉलर के मौजूदा रेट से करीब 8380 करोड़ रुपए) की थी। 1987 में यह बात सामने आई थी कि यह डील हासिल करने के लिए भारत में 64 करोड़ रुपए दलाली दी गई। उस समय केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी। राजीव गांधी प्रधानमंत्री थे। स्वीडिश रेडियो ने सबसे पहले 16 अप्रैल 1987 में दलाली का खुलासा किया। इसे ही बोफोर्स घोटाला या बोफोर्स कांड के नाम से जाना जाता है। इसी घोटाले के चलते 1989 में राजीव गांधी की सरकार गिर गई थी।
– आेलाफ पाल्मे की बाद में हत्या हो गई थी।

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