आज खुलेगा मां का पट, माता के दर्शन करेंगे भक्त

आस्था

पटना : नवरात्र के सातवें दिन आज कालरात्रि की पूजा होगी। वैदिक मंत्रोच्चार विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ सभी पूजा पंडालों के पट खुल जाएंगे। इसके साथ ही दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। महासप्तमी की प्रात: सूर्योदय काल से 9 बजे तक स्थापना का महामुहूर्त है।

ज्योर्तिवेद विज्ञान संस्थान के निदेशक ज्योतिषाचार्य डॉ. राजनाथ झा के अनुसार, सूर्योदय से सुबह 9 बजे तक माता की प्राण प्रतिष्ठा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। इसके बाद अर्द्ध प्रहरा हो जाएगा। शास्त्रों में वर्णित है कि प्रात:काल में माता भगवती का आह्वान और विसर्जन करना सर्वाधिक उत्तम है। वैसे सुबह 10.30 बजे से 1 बजे दिन तक भी पंडालों के पट खोलने का शुभ मुहूर्त है। नवयुवक संघ श्रीदुर्गा पूजा समिति ट्रस्ट के अध्यक्ष पूर्व मंत्री संजीव प्रसाद टोनी ने बताया कि डाकबंगला चौराहे पर दोपहर 12 बजे पट खुलेगा। रात 8 बजे से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार दर्शन-पूजन करने आएंगे।

उधर जीएम रोड में श्रीदुर्गा पूजा संगीत समिति के पंडित चंद्रमोहन भट्ट ने बताया कि दोपहर 12 से 1 बजे तक पट खुलेगा और माता की प्राण प्रतिष्ठा होगी। मंगलवार को षष्ठी पूजा के साथ महासप्तमी के दिन माता कालरात्रि की पूजा-अर्चना को लेकर पूरा शहर तैयारी में लीन नजर आया। साथ ही जगह-जगह षष्ठी पूजा के दौरान नवरात्र में आराधना कर रहे श्रद्धालुओं ने बेल के पेड़ में जोड़ा बेल की विधिवत पूजा की। मां सिद्धेश्वरी काली मंदिर बांस घाट के मुख्य पुजारी पंडित संजय कुमार तिवारी उर्फ शशि बाबा के अनुसार उदया तिथि में माता की आराधना का फल सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

इसीलिए मां दुर्गा प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा बुधवार की सुबह से शुरू हो जाएगी। महासप्तमी की रात्रि में 11.30 बजे के बाद निशा पूजा होगी, जो प्रात: काल तक चलेगी। इस दौरान श्री सिद्धेश्वरी काली मंदिर में विशेष पूजा होगी। निशा पूजा के दौरान तांत्रिक श्मशान जगाएंगे और कालरात्री की पूजा करेंगे। मां दुर्गा का सप्तम रूप कालरात्रि हैं। ये काल का नाश करने वाली हैं। नवरात्र के सातवें दिन इनकी पूजा होती है। इस दिन साधक को अपना चित्त भानु चक्र (मध्य ललाट) में स्थिर कर साधना करनी चाहिए।

भक्तों द्वारा मां कालरात्रि की पूजा के बाद उसके सभी दु:ख, संताप भगवती हर लेती हैं। दुश्मनों का नाश करती है और मनोवांछित फल प्रदान कर उपासक को संतुष्ट करती हैं। मां कालरात्रि अपने भक्तों को सदैव शुभ फल प्रदान करने वाली हैं, इस कारण इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है।

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