बिहार में मनरेगा के तहत 6 लाख से अधिक मजदूरों को काम मिला

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बिहार के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत कामकाज की गति अब तेज हो रही है। पिछले एक सप्ताह में सूबे की 7,971 पंचायतों में मनरेगा के तहत काम शुरू कर दिया गया। इस अवधि में 6 लाख से अधिक मजदूरों को काम मिला।

ग्रामीण विकास विभाग ने यह ध्यान रखा कि जल संरक्षण, सुक्ष्म सिंचाई तथा पारंपरिक जल स्रोतों का जीर्णोद्धार से संबद्ध योजनाओं पर काम अधिक हो। इन योजनाओं से संबद्ध 5,912 योजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें 1,54,340 मजदूर काम कर रहे हैं। खास बात है कि बारिश होने के बाद विभिन्न जिलों में वृक्षारोपण के कार्य भी शुरू कर दिए गए हैं। पौधरोपण के 14,414 योजनाएं चल रही हैं। इनमें 27,439 मजदूर काम कर रहे हैं। 

इसी प्रकार जल-जीवन- हरियाली से संबंधित 21 हजार योजनाएं चल रही हैं। इनमें दो लाख मजदूर लगाए गए हैं। काम देने के दौरान देखा गया कि करीब दो लाख मजदूरों के पास या तो आधार कार्ड नहीं थे या उनमें संशोधन की आवश्यकता है। सभी मजदूरों की आधार सीडिंग का काम चल रहा है। विभिन्न जिलों के कैंपों में रहने वाले प्रवासी मजदूर के जॉब कार्ड बनाने का काम भी चल रहा है। मनरेगा पंचायत रोजगार सेवक और मुखियों की सहायता से काम मांगने वाले 10,876 मजदूरों के जॉब कार्ड बना दिए गए हैं। इन मजदूरों को विभिन्न स्थानों पर काम पर लगाया गया है।

लॉकडाउन की अवधि में किसी भी मजदूर के भुगतान में विलंब नहीं हो, इसकी जिम्मेदारी सभी जगह उप विकास आयुक्त को सौंपी गई है। मनरेगा की अन्य 2,513 योजनाओं में 76,704 मजदूर लगाए गए हैं। मनरेगा के तहत निजी भूमि एवं व्यक्तिगत लाभ के तीन  लाख 33 हजार 332 योजनाओं में काम शुरू किया गया है। इनमें तीन लाख 77 हजार 545 मजदूर काम कर रहे हैं। इनमें प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत अपना आवास खुद बनाने वाले लाभुक भी शामिल हैं। 

इस वित्तीय वर्ष में मनरेगा कार्यों से विभिन्न मदों में 100 करोड़ रुपए का भुगतान हो चुका है।  लॉक डाउन के बाद 19,431 नए जॉब कार्ड बनाए गए हैं। काम मांगने वाले कुल 33,661 मजदूरों को जॉब कार्ड दिया जा चुका है।
– श्रवण कुमार, मंत्री, ग्रामीण विकास विभाग

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Sources:-Hindustan

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