मोदी की कैबिनेट का बहुप्रतीक्षित विस्तार सम्पन्न, चिराग की नाराजगी के बीच पशुपति पारस मंत्रिमंडल में शामिल

राजनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट का बहुप्रतीक्षित विस्तार बुधवार को सम्पन्न हो गया. केंद्र सरकार में 43 मंत्रिपद के लिए फेरबदल किया गया है. नए चेहरों, विभिन्न जातियों, क्षेत्रों से लोगों को शामिल किया गया है. कई मंत्रियों के इस्तीफे लिए गए हैं. प्रधानमंत्री मोदी के इस मंत्रिमंडल में हुए फेरबदल में चुनावी रणनीति भी दिखाई दे रही है. पीएम मोदी के 2019 में अपने दूसरे कार्यकाल के लिए पदभार ग्रहण करने के बाद यह उनके मंत्रिमंडल का पहला फेरबदल है. कैबिनेट के इस बदलाव से कई बड़े और पुराने मंत्रियों ने इस्तीफा दिया वहीं कई नए चेहरों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया. कैबिनेट के इस विस्तार से पहले 12 नेताओं ने मंत्री परिषद से इस्तीफा भी दे दिया.

स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद, सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल “निशंक” और रसायन और उर्वरक मंत्री डीवी सदानंद गौड़ा समेत कई केंद्रीय मंत्रियों ने बुधवार शाम को कैबिनेट फेरबदल से पहले इस्तीफा दे दिया. कोविड संकट से निपटने और कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच लोगों को ऑक्सीजन और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए संघर्ष करने जैसी परिस्थितियों को लेकर विपक्ष ने डॉ हर्षवर्धन की काफी आलोचना की थी. हर्षवर्धन खुद एक डॉक्टर हैं और वह स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ-साथ विज्ञान के प्रभारी थे. कोविड महामारी की शुरुआत और भारत के टीके विकसित करने के लिए काम शुरू करने के समय से ही विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री के तौर पर काम कर रहे थे.

रविशंकर प्रसाद सरकार के नए आईटी नियमों की अगुवाई कर रहे थे. इन नियमों को लेकर सरकार और ट्विटर आमने-सामने है. वहीं प्रकाश जावड़ेकर का इस्तीफा भी चौंकाने वाला कदम साबित हुआ. जावड़ेकर सरकार के प्रवक्ता भी थे.

एनडीए की लोक जनशक्ति पार्टी के पशुपति पारस भी कैबिनेट में शामिल हो गए हैं. इस पर उनके भतीजे चिराग पासवान ने नाराजगी जताई है. चिराग ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि वह पारस को लोजपा के आधार पर अपने प्रशासन में मंत्री के रूप में नियुक्त न करें. लोजपा के संस्थापक रामविलास पासवान की मृत्यु के बाद लोजपा का स्लॉट खाली हो गया था, इस बीच पार्टी में भी विभाजन हो गया.

चिराग ने कहा था “पशुपति पारस को लोजपा कोटे पर केंद्रीय मंत्री बनाना संभव नहीं है क्योंकि पार्टी के कार्यकारी बोर्ड ने उन्हें निष्कासित कर दिया है. मैंने प्रधानमंत्री को पत्र के माध्यम से सूचित किया है. अगर उन्हें नियुक्त किया जाता है, तो मैं अदालत जाऊंगा.”

उत्तर प्रदेश में अगले सात महीने के भीतर विधानसभा चुनाव होने हैं. यूपी के मद्देनजर इस फेरबदल में कई चेहरे दिखाई दे रहे हैं. अब तक यूपी के किसी भी दलित सांसद को मंत्री नहीं बनाया गया था. यूपी चुनाव से ऐन पहले इस समुदाय को बड़ी हिस्सेदारी दी गयी है. पिछड़े समुदाय की ही तरह इस बात दलित समुदाय से भी तीन-तीन मंत्रियों को कैबिनेट में शामिल किया जा रहा है.

आगरा से एसपी सिंह बघेल, जालौन से भानु प्रताप सिंह वर्मा और लखनऊ की मोहनलालगंज सीट से कौशल किशोर तीनों दलित समुदाय से हैं. वहीं ब्राह्मणों की तथाकथित नाराजगी को पाटने के लिए भाजपा ने एक और ब्राह्मण चेहरे को मंत्री पद दिया है. चंदौली सांसद महेन्द्रनाथ पांडेय के साथ अब लखीमपुर खीरी के सांसद अजय मिश्रा भी मंत्री होंगे.

इसके अलावा उत्तर प्रदेश में सहयोगी पार्टी अपना दल की नेता अनुप्रिया सिंह पटेल को भी कैबिनेट में जगह दी गई है. अनप्रिया सिंह की पार्टी अपना दल की राज्य के पटेल समुदाय में अच्छी खासी पकड़ मानी जाती है. इसके अलावा पंकज चौधरी और बीएल वर्मा को भी ओबीसी मतदाताओं को साधने के लिए जगह दी गई है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अब केंद्रीय मंत्रिमंडल में वापसी की है. इस बार और पहली बार वह एनडीए नेता के रूप में मंत्री पद संभालने जा रहे हैं. मार्च 2020 में सिंधिया के नेतृत्व में कांग्रेस के 22 विधायक पार्टी से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए थे. इस कदम के बाद मध्य प्रदेश में तत्कालीन कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई थी, जिसने फिर से राज्य में भाजपा के सत्ता में लौटने का मार्ग प्रशस्त किया.

कैबिनेट विस्तार के पहले मध्य प्रदेश के जिलों का दौरा कर रहे सिंधिया उन अटकलों पर चुप्पी साधे रहे कि उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल के विस्तार के दौरान शामिल किया जा सकता है और उन्होंने कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है.

महाराष्ट्र से भी कई नेताओं को कैबिनेट में जगह दी गई है. इनमें सबसे प्रमुख नाम नारायण राणे का है. महाराष्ट्र की राजनीति में नारायण राणे कद्दावर नेता हैं. अगले साल बीएमसी का चुनाव होना है. ऐसे में पार्टी बीएमसी इलेक्शन में उनके प्रभाव का इस्तेमाल पार्टी मतदाताओं को लुभाने के लिए करेगी. साथ ही राज्य से जातीय समीकरण साधने के लिए डॉ. भारती पवार, कपिल पाटिल और भगवत करद को भी जगह दी गई है.

पश्चिम बंगाल विधानसभा के चुनाव गुजर चुके हैं लेकिन कैबिनेट फेरबदल देखकर लगता है कि बीजेपी के फोकस में राज्य अब भी बना हुआ है. यही कारण है कि राज्य से चार नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी गई है. इन नेताओं में निशिथ प्रमाणिक, जॉन बराला, शांतनु ठाकुर, सुभाष सरकार हैं. शांतनु ठाकुर मटुआ समुदाय से आते हैं जो बीजेपी का वोटर माना जाता है. इनके अलावा जॉन बराला आदिवासी नेता हैं. राज्य से नेताओं को मंत्रिमंडल में मिली जगह को देखते हुए लगता है कि 2024 चुनावों की तैयारी अभी से शुरू हो चुकी है.

सात राज्य मंत्रियों समेत स्वतंत्र प्रभार संभाल रहे मंत्रियों को भी पदोन्नति दी गई है. इन नामों में हरदीप सिंह पुरी, अनुराग ठाकुर, जी किशन रेड्डी शामिल हैं जिन्होंने नई मंत्रिपरिषद में शपथ ली है.

इस साल सम्पन्न हुए असम चुनाव के बाद भाजपा ने फिर से सरकार बनाई. नई सरकार में पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की जगह हिमंत बिस्वा सरमा को राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त किया गया. अब सोनोवाल को केंद्रीय कैबिनेट में जगह दी गई है.

वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य से अब मंत्रिमंडल में 7 मंत्री हैं. इनमें गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जशंकर भी शामिल हैं. बता दें कि एस. जयशंकर गुजरात से राज्यसभा सांसद हैं. पुरुषोत्तम रुपाला और मनसुख मांडविया को भी प्रमोट कर कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. इसके अलावा दर्शन जारदोष, मुंजपारा महेंद्र भाई और देवू सिंह चौहान को भी जगह दी गई है. गुजरात में भी अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने राज्य में बेहतर प्रदर्शन किया था और बीजेपी किसी तरह बहुमत के आंकड़े को छू पाई थी. माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल में गुजराती मंत्रियों को जगह देकर गुजरात में राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिश की गई है.

 

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